लेटेस्ट सुनने में आया है कि चुनाव आयोग गा – गा के कह रहा है, “हमसे भूल हो गई, हमका माफी दई दो!”
गलती तो हुई है, आधिकारिक विज्ञप्ति पर केंद्र में सत्तारूढ़, केरल में सत्ता पाने को बेचैन, विश्व की सबसे बड़ी और धनी पार्टी की मुहर लग गई है।
एकबारगी लगा कि फेक न्यूज़ होगी। अमित भाई (आईटी सेल वाले) ने भी कह दिया तो पक्का यकीन हो गया कि यह कांग्रेस या कम्युनिस्टों की कारस्तानी होगी।
पर फिर एंटी क्लाइमैक्स हो गया और चुनाव आयोग की सफाई आ गई कि क्लेरिकल मिस्टेक हो गई। जिसने गलती की है, उसे निलंबित भी किया गया है पेंडिंग इंक्वायरी!
इतनी बड़ी भूल? बीजेपी और चुनाव आयोग के सोशल मीडिया में हज़ार दुश्मन बैठे हैं। वो निदाजी कह गए हैं न कि जिसके दुश्मन हों बहुत, समझ लो आदमी अच्छा है! तो सारे दुश्मन टूट पड़े। मज़ाक बनाने लगे। गलती रामस्वरूप की थी, निशाने पर फलस्वरुप आ गया। गलती केरल चुनाव आयोग की थी, निशाने पर ज्ञानेशजी आ गए! क्या ऐसा होना चाहिए क्या? क्या किसीको माथे पर कमल के फूल को चिपकाकर मीम साझा करना चाहिए क्या?
कहानी में एक ट्विस्ट और आया जब केरल पुलिस ने सोशल मीडिया मंचों से वह नोट हटाने को कहा क्योंकि उनके अनुसार यह “एक प्रतिष्ठित संस्था को बदनाम करने” का मामला था और “सांप्रदायिक सद्भाव” भी बिगड़ सकता था। वैसे तो लॉजिक समझ में नहीं आया पर पुलिस कहती है तो सही ही कहती होगी।
वैसे, अपना भी मानना है कि इस गलती को माफ कर देना चाहिए। कांग्रेस और तृणमूल समेत विपक्षी वैसे ही ज्ञानेशजी के पीछे हाथ धोकर पड़े हैं।
जाने भी दो यारो, आखिर एक गलती तो भगवान भी माफ करता है।
और अंत में एक रिक्वेस्ट है। इस टिप्पणी के साथ नत्थी तस्वीर (उस नोट का स्क्रीनशॉट) मत देखना। देखा तो उसकी तस्वीर या स्क्रीनशॉट निकालने की कोशिश मत करना और निकाल लिया तो उसे सोशल मीडिया में साझा मत करना वरना सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और पुलिस का काम बढ़ जाएगा।
(लेखक जनचौक से मुंबई से सहयोगी के रूप में जुड़े हुए हैं।)