पटना।1980 के दशक में बिहार के ग्रामांचलों में क्रांतिकारी किसान संघर्षों के समर्पित योद्धा और इंडियन पीपल्स फ्रंट के संस्थापक महासचिव का. राजाराम के पहले स्मृति दिवस पर आज राज्य कार्यालय पटना में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया और उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई।
इस मौके पर केडी यादव ने कहा कि का. राजाराम ने 1970 के दशक की शुरुआत में सीपीआईएम छोड़कर कॉमरेड एके रॉय के साथ जुड़ गए थे। वे आपातकाल के दौरान गिरफ्तार कर लिए गए थे। अपनी रिहाई के बाद वे सीपीआई (एमएल) में शामिल हुए और इंडियन पीपुल्स फ्रंट की स्थापना और पूरे देश में क्रांतिकारी लोकतंत्र का संदेश फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इसके बाद सीपीआई (एमएल) की केंद्रीय समिति के सदस्य के रूप में उन्होंने छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार में पार्टी का नेतृत्व किया. कॉमरेड राजाराम की विरासत जीवित रहेगी और संघर्ष के हर क्षेत्र में कम्युनिस्टों और अन्य फासीवाद-विरोधी सेनानियों को प्रेरित करती रहेगी।
का. कुणाल ने कहा कि राजाराम जी वामपंथी आंदोलन में एक उल्लेखनीय शख़्सियत के रूप में याद किये जायेंगे। उन्होंने अपने विचारों और मूल्यों पर कभी कोई समझौता नहीं किया। सादगी भरा जीवन जिया और सबके साथ हमेशा सहज और सह्रदय रहे।
उनके विचारों में गजब की दृढ़ता और व्यवहार में सहज उदारता थी। वे हम सबको प्रेरणा देते रहेंगे। भाकपा-माले की राज्य कमिटी उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करती है।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से माले राज्य सचिव कुणाल, वरिष्ठ पार्टी नेता केडी यादव, विधायक रामबलि सिंह यादव, एआइपीएफ के कमलेश शर्मा, प्रकाश कुमार, विभा गुप्ता आदि उपस्थित थे।
(प्रेस विज्ञप्ति)
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