यदि आप 29 जनवरी 2025 को दिल्ली से प्रयागराज जाकर मौनी अमावस्या के दिन संगम में स्नान करने की तैयारी कर रहे हैं तो आपको रिटर्न फ्लाइट के लिए कम से कम 44,563 रूपये खर्च करने के लिए तैयार रहना होगा। ये सबसे किफायती दर है। लेकिन प्रयागराज जाने के बजाय यदि आप देश से बाहर मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर जाने का विचार कर रहे हैं तो एयर मलेशिया आपको मात्र 21,554 रूपये में आने-जाने की सुविधा प्रदान कर रही है।
यानि यदि आप हिंदू धर्म में आस्था रखते हैं, और मानते हैं कि महाकुंभ के पावन अवसर पर आपको भी अपने चार लोगों के परिवार के साथ जाकर लाखों श्रद्धालुओं की तरह गंगा में डुबकी लगानी चाहिए तो इसके लिए कम से कम 3 लाख रूपये का इंतजाम कर लें।
ऐसा नहीं है कि उड्डयन मंत्री या केंद्र सरकार को फ्लाइट ऑपरेटर्स की इस लूटमार के बारे में कोई खबर नहीं है। डीजीसीए की ओर से 25 जनवरी को जानकारी साझा करते हुए बताया गया था कि महाकुंभ के दौरान प्रयागराज के लिए एयर ट्रेवल की मांग को देखते हुए 81 अतिरिक्त फ्लाइट्स को मंजूरी दी गई है। इस प्रकार देश भर से प्रयागराज के लिए कनेक्टिविटी बढ़कर 132 हो जाएगी।
नागरिक विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) की जिम्मेदारी विमानों के परिचालन और सुरक्षा से संबंधित है। विमानों के रेट में कमी-बढ़ोत्तरी से उसका कोई सरोकार नहीं है। 81 अतिरिक्त फ्लाइट्स को मंजूरी देकर असल में डीजीसीए एयर ऑपरेटर्स के लिए देश के कोने-कोने से लूट की व्यवस्था का इंतजाम ही कर सकते हैं।
बता दें कि एनडीए के मौजूदा कार्यकाल में नागरिक उड्डयन मंत्री का कार्यभार टीडीपी के राम मोहन नायडू के जिम्मे है। पिछले कुछ दिनों से वे डावोस में दुनिया के सबसे अमीर लोगों की बैठक में थे।
कल 26 जनवरी को मंत्री जी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल से महाकुंभ के लिए अपने मंत्रालय की तैयारियों के बारे में जिक्र करते हुए लिखा है, “माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से प्रयागराज एयरपोर्ट ने महाकुंभ 2025 के दौरान कई नए मानक स्थापित किए हैं। हमने तीर्थयात्रियों के लिए निर्बाध यात्रा को सुनिश्चित करने के लिए कनेक्टिविटी को बढ़ाया है, बुनियादी ढांचे को उन्नत किया है और 24×7 संचालन किया है। यह विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचे के लिए भारत की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करने का हमारा एक ऐसा ही प्रयास है।”
माननीय मंत्री जी को कोई फर्क नहीं पड़ता कि फ्लाइट ऑपरेटर्स ने दिल्ली से प्रयागराज का एक तरफ का किराया 4,000 रूपये से बढ़कर 20-25,000 रूपये कर दिया है। यह साफ़ बताता है कि देश में सरकार नाम की कोई चीज नहीं है।
आखिर दिल्ली से प्रयागराज तक की दूरी को नापने के लिए किसी एयरलाइन को मलेशिया से दोगुना किराया वसूलने की क्या वजह हो सकती है? यह तभी संभव है यदि देश में कोई सरकार नहीं है, या फिर सरकार ही पूंजीपतियों की हो।
अगर सरकार खुली आंखों से एयर टिकट में लूट को अनदेखा कर सकती है, तो भला गेंहू, चावल, दाल और सब्जियों के रेट को काबू में रख पाना तो उसके लिए कहीं से भी संभव नहीं हो सकता। ऐसा इसलिए क्योंकि खाद्य वस्तुओं की कीमत बढ़ने के पीछे सैकड़ों कारक होते हैं।
ऐसा भी नहीं है कि प्रयागराज के लिए विमानों के किराये में यह भारी बढ़ोत्तरी अभी हो रही है। कुंभ की शुरुआत के साथ ही सभी एयरलाइन ताबड़तोड़ किराये में बढ़ोत्तरी करते जा रहे थे।
पेशे से वकील संजय घोष ने 23 जनवरी की अपनी टिप्पणी में लिखा है, “कल प्रयागराज के लिए एक तरफ़ का टिकट 24,277 रुपये से लेकर 36,879 रुपये तक है! DGCA और नागरिक उड्डयन मंत्रालय आखिर क्या कर रहे हैं? विनिवेश के चैंपियन और समझौते के साथ चलने वाले नियामक आज कहाँ हैं? पीएम मोदी की हसरत थी कि चप्पल वाले हवाई जहाज़ से यात्रा करें। लेकिन डिज़ाइनर चप्पल भी इतनी महंगी नहीं होती!”
योगी सरकार को महाकुंभ से है 2 लाख करोड़ व्यापार की उम्मीद
हर 12 साल बाद लगने वाले इस महाकुंभ की शुरुआत में ही उत्तर प्रदेश सरकार ने दावा किया था कि इस बार कुल 40 करोड़ श्रद्धालु प्रयागराज आयेंगे। अब सरकार के कारकुनों ने कैलकुलेटर हाथ में लेकर कुल व्यापार और उत्तर प्रदेश को होने वाली आय का अनुमान भी मिनटों में निकाल लिया।
2 लाख करोड़ रूपये की आय का उनका अनुमान इस प्रकार से है। औसतन हर आने वाला श्रृद्धालु कम से कम यदि 5000 रुपये खर्च करेगा तो 40 करोड़ लोगों के हिसाब से महाकुंभ से 2 लाख करोड़ रुपये का व्यापार आसानी से हो सकता है। जबकि उद्योग जगत ने प्रति व्यक्ति का औसत खर्च 10 हजार रुपये लगाकर कुल 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक के व्यापार की योजना तैयार कर ली।
एक समाचार पत्र के अनुसार महाकुंभ के आयोजन से देश की नॉमिनल और रियल जीडीपी एक फीसदी से भी अधिक बढ़ सकती है। इतना ही नहीं यदि महाकुंभ में दो लाख करोड़ का कारोबार होता है तो इससे यूपी सरकार को 25 हजार करोड़ रुपये का रेवेन्यू भी हासिल हो सकता है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने महाकुंभ मेला 2025 के लिए कुल 6,990 करोड़ रूपये खर्च कर 25,000 करोड़ रुपये कमाने की योजना बनाई हुई है। लेकिन योगी सरकार इतना पैसा आखिर कमाएगी कैसे? क्या उसने एयर ट्रेवल, रेलगाड़ियों और बसों के किराये में अधिभार वसूलने का कोई प्लान बनाया हुआ है? या उसे उम्मीद है कि प्रयागराज में होटलों और रेस्तरां में कई गुना बढ़ चुकी आय पर उसे अच्छा-खासा जीएसटी वसूलने से आय प्राप्त होगी?
इस बारे में हमारे पास कोई जानकारी नहीं है। लेकिन इतना तय है कि प्रयागराज (इलाहबाद) जैसे छोटे शहर में यदि एक महीने से भी अधिक समय तक 50 लाख अतिरिक्त लोग आते हैं, तो स्थानीय जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो सकता है।
यह बात प्रयागराज के स्थानीय लोगों से बेहतर कौन बता सकता है। रेलवे स्टेशन से कुली खर्चे से लेकर ऑटो तक के रेट आसमान छू रहे हैं। आवश्यक खाद्य वस्तुओं की किल्लत और दामों में तेजी अपनी जगह पर है।
अलबत्ता होटल और रेस्तरां मालिकों की पौ बारह हो रखी है। किसी भी साधारण होटल में एक रात रुकने का किराया 15-20,000 रूपये मामूली बात है। होटलों के साथ-साथ होम स्टे कांसेप्ट पर काम करने वाले भी 8-10,000 रूपये एक रात का ले रहे हैं।
योगी सरकार भले ही दावा कर रही है कि वह बेहद किफायती दर पर कुंभ मेले में आने वाले लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था कर रही है, लेकिन आईआरटीसी की वेबसाइट कुछ और ही बयां कर रही है। यहां पर दो लोगों के लिए एक रात रुकने का खर्च 20,000 रूपये है। साथ में शर्त भी है कि 18% जीएसटी अलग से होगा और शाही स्नान के दिनों में 3 दिन से कम की बुकिंग स्वीकार नहीं की जायेगी।
कुंभ में टेंट वाले घर में रहने के किराए के बारे में तो सारा देश जान चुका है। 1 लाख रूपये से लेकर 1.5 लाख रूपये वाले टेंट की व्यवस्था आखिर किसके लिए की गई है? लाखों श्रद्धालुओं को भारी सर्दी में रोज खुले आसमान के नीचे सोने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
इनमें से लाखों श्रद्धालु वे हैं जो कई कुंभ नहा चुके हैं। लेकिन इस बार महाकुंभ को लेकर सरकारी तामझाम और प्रचार इतना हुआ कि बहुत से वे लोग भी तीर्थयात्रा के लिए लालायित हो उठे, जो इससे पहले कभी नहीं आये थे। ये ही वो मध्य वर्ग है, जिसे महसूस हो रहा है कि उसकी जेब पूरी तरह से काट ली गई है।
गौर से देखें तो इवेंट मैनेजमेंट में माहिर भाजपा सरकार के लिए यह भी एक तरह का इवेंट मैनेजमेंट ही है। भव्य आयोजन होगा और बड़ी-बड़ी हस्तियां आएंगी तो उसका जमकर प्रचार होगा। उनके लिए एयर फेयर, लक्ज़री टेंट और होटलों का खर्च कुछ भी नहीं है। लेकिन इसके चपेटे में भारत का वो मिडिल क्लास भी आ गया, जिसे हर जगह विकसित भारत का नारा देकर अभी तक चूना लगाया गया है।
बाकी बची 90% वो आम जनता, जो वास्तव में धार्मिक है, उसके लिए पिछली बार के कुंभ और इस बार के आयोजन में कोई फर्क नहीं है। रेलवे स्टेशन से पैदल ही कंधे पर गठरी बांधे संगम की ओर रुख करने वाली यह जनता सरकार से कुछ भी खास उम्मीद नहीं रखती। हां, इस बार भारी सुरक्षा व्यवस्था और वीवीआईपी तामझाम के चलते उसका कष्ट कम होने के बजाय बढ़ा ही है।
निश्चित रूप से कॉर्पोरेट जगत के लिए उत्तर प्रदेश में कुछ भी न हो, लेकिन बनारस, अयोध्या, आगरा के बाद अब उसकी निगाह में प्रयागराज की प्रॉपर्टी भी निश्चित रूप से आ चुकी होगी।
उम्मीद करनी चाहिए कि जल्द ही प्रयागराज में भी होटल लॉबी, बिग कॉर्पोरेट अपने कारोबार में इजाफा करने के लिए सरकार की मदद से प्राइम लोकेशन तलाशने में सफल रहेंगे। उनके हाथ डालते ही प्रदेश के नेता, नौकरशाह भी अयोध्या की तरह औने-पौने दामों में हजारों गरीब प्रयागवासियों की जमीन दाखिल-ख़ारिज यदि कर लेते हैं, तो आपको आश्चर्य नहीं होना चाहिए।
(रविंद्र पटवाल जनचौक की संपादकीय टीम के सदस्य हैं।)
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