बूढ़ी गंडक पर आरसीसी पुल की गुणवत्ता और सुरक्षा पर आईआईटी, पटना की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट : 80% यूपीवी टेस्ट फेल

मुजफ्फरपुर ज़िले में बूढ़ी गंडक नदी पर (डॉ. जगन्नाथ मिश्रा कॉलेज के समीप सोडा गोदाम चौक से अहियापुर के बीच) बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड द्वारा निर्मित उच्चस्तरीय आरसीसी पुल की गुणवत्ता और सुरक्षा पर बड़ा खुलासा हुआ है। सामाजिक कार्यकर्ता एवं आरटीआई याचिकाकर्ता देवव्रत कुमार साहनी द्वारा उच्च न्यायालय, पटना में दायर याचिका पर दिए गए अदालती निर्देशों के आलोक में आईआईटी पटना की विशेषज्ञ टीम द्वारा स्थल निरीक्षण किया गया था। जाँच रिपोर्ट में कंक्रीट की गुणवत्ता, संरचनात्मक मजबूती और निर्माण मानकों को लेकर कई गंभीर कमियाँ उजागर हुई हैं।

आईआईटी पटना की जाँच रिपोर्ट के मुख्य और गंभीर बिंदुओं के अवलोकन के बाद 80% से अधिक अल्ट्रासोनिक पल्स वेलोसिटी (यूपीवी) टेस्ट ‘खराब’ व कमजोर श्रेणी में पाया गया और शेष परिणाम ‘संदेहास्पद’ श्रेणी में रहे।

रिपोर्ट के अनुसार कंक्रीट के भीतर भारी हनीकोम्बिंग (अंदरूनी छिद्र/खोखलापन), अत्यधिक सरंध्रता और अंदरूनी दरारें मौजूद हैं, जो पुल की संरचनात्मक मजबूती के लिए अत्यंत चिंताजनक है।

सुलभ गर्डरों में शेयर और फ्लेक्सुरल दरारें देखी गई हैं।

कंक्रीट की सतह पर 45 मिमी या उससे अधिक गहराई तक कार्बोनेशन पाया गया है, जिससे सुदृढ़ीकरण छड़ों में जंग लगने का खतरा बढ़ गया है।

मानसून के दौरान नदी के उच्च जल स्तर और जरूरी संसाधनों की कमी के चलते जलमग्न हिस्सों व गर्डर के निचले हिस्सों की पूरी जाँच नहीं हो सकी थी।

आईआईटी पटना ने इसे प्रारंभिक रिपोर्ट करार दिया है और नदी का जल स्तर घटने के बाद व्यापक व पूर्ण जाँच करने की सिफारिश की है।

गुणवत्ता मानकों में लापरवाही के कारण निर्माण कार्य कराने वाली एजेंसी मेसर्स गणेश राम दोकानिया को विभागीय स्तर पर 2 वर्षों के लिए डिबार कर दिया गया है, यानी रोक लगा दी गई है।

मामला उच्च न्यायालय, पटना के समक्ष विचाराधीन है।

(विशद कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

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