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राज्य

झारखंड चुनाव : सोशल मीडिया पर ‘शैडो एकाउंट्स’ के माध्यम से बीजेपी राज्य में फैला रही नफरत के बीज 

  • by विशद कुमार
  • November 7, 2024November 7, 2024
  • 1 minute
  • 0

झारखंड। जिस तरह से झारखंड चुनाव के पहले से ही भाजपा के नफ़रती सागर से उनके गोताखोर सोशल मीडिया के माध्यम से नफरत के बीज लाकर पूरे राज्य में छींट रहे हैं।

जिसे लेकर एक तरफ जहां शांति अमन के पक्षधर राज्य के भविष्य को लेकर काफी चिंतित हैं, वहीं दूसरी तरफ चुनाव आयोग जिसे चुनाव आचार संहिता लागू होने बाद से यह अधिकार है कि इस तरह सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित करने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ कार्रवाई करे, लेकिन चुनाव आयोग मौन है।

झारखंड में विभिन्न शोध संस्थानों द्वारा 6 नवंबर 2024 को जारी एक रिपोर्ट ने भाजपा के नफरती एजेंडा और चुनाव आयोग के पक्षपात को फिर से उजागर कर दिया है। फेसबुक में उपलब्ध सार्वजनिक तथ्यों के आकलन पर बने इस रिपोर्ट से दो बातें सामने आईं हैं। 

पहला- भाजपा चुपके से सोशल मीडिया पर झूठ व साम्प्रदायिकता फ़ैलाने और आदिवासी मुख्यमंत्री को जानवर जैसे दर्शाने के लिए करोड़ों रूपए खर्च कर रही है।

दूसरा- भाजपा अनेक शैडो पेज व अकाउंट बनाकर इसे अंजाम दे रही है। 

शैडो अकाउंट उसे कहा जाता है जो किसी खास राजनैतिक दल का प्रचार व काम करते हैं, लेकिन जिसे दल द्वारा घोषित नहीं किया जाता है। 

शोध से यह सामने आया है कि भाजपा ने पिछले तीन महीनों में फेसबुक पर राजनीतिक विज्ञापन पर 2.25 करोड़ रूपए खर्च किये हैं। इसमें से आधा पैसा भाजपा के अधिकारिक पेज द्वारा खर्च हुआ है, जिस पर लगभग 3,100 विज्ञापन डाले गए, जिन्हें लगभग 10 करोड़ बार (इंप्रेशन) देखा गया।

वहीं 87 लाख रु खर्च करके शैडो पेजेस के माध्यम से लगभग 15,000 पेड विज्ञापन फैलाये गए हैं, जिसे लगभग 45 करोड़ बार देखा गया। शोध ने ऐसे 90 शैडो अकाउंट चिन्हित किये हैं, जिनमें प्रमुख ‘Jharkhand Choupal’ व इससे जुड़े अन्य चौपाल नामक एकाउंट्स हैं।

उल्लेखनीय है कि भाजपा का अधिकारिक पेज राजनीतिक विज्ञापन डालता है, लेकिन यह शैडो अकाउंट मुख्यतः हेमंत सोरेन सरकार और गठबंधन पार्टियों के विरुद्ध सांप्रदायिक और विभाजनकारी कंटेंट आधारित विज्ञापन डालते हैं। 

इस शैडो अकाउंट में चार तरीके के विज्ञापन दिखाई दिए हैं। 

पहला – जिसमें मुसलमानों को दुश्मन की तरह दिखाया है। 

दूसरा – जिसमें सांप्रदायिक बातें दर्शाई है। 

तीसरा – जहां झारखण्ड के आदिवासी मुख्यमंत्री को सर पर सिंहों के साथ हैवान की तरह दर्शाया है।

चौथा – जहां ‘घुसपैठियों’ के मुद्दे को षड्यंत्र की तरह दिखाया गया है। 

इन पोस्ट्स के माध्यम से हेमंत सोरेन सरकार और INDIA गठबंधन दलों के विरुद्ध लोगों को उकसाया जाता है। राज्य भर में तकरीबन 90 ऐसे शैडो पेजेज़ काम कर रहे हैं जो भाजपा से 5 गुना ज़्यादा विज्ञापन डालते हैं और 4 गुना ज़्यादा ऑनलाइन इंप्रेशन बटोरते हैं। 

उदाहरण के तौर पर हम देखें तो एकाउंट्स पर फैलाये जा रहे सांप्रदायिक वीडियो में भगवा कपडे पहने लोगों के झुंड को हिन्दू दर्शाया गया है और हरे कपड़े पहने झुंड को मुस्लिम दर्शाया है।

हिन्दू झुंड पहले मुस्लिम झुंड से भागता है और फिर हिन्दू झुंड इकट्ठा हो जाता है और मुस्लिम झुंड के पीछे भागता है। इस तरह के वीडियो से यह दर्शाने की कोशिश की गई है कि हिन्दू अगर एक जुट हो जायेंगे तो मुसलामानों को ख़तम कर सकते हैं।

मज़ेदार बात यह है कि इन फेसबुक अकाउंट के पोस्ट्स में भाजपा का नाम या चुनाव चिन्ह नहीं रहता है। लेकिन इनके पोस्ट स्पष्ट दर्शाते हैं कि इनके तार भाजपा से जुड़े हैं। सारे पोस्ट पेड विज्ञापन हैं। मतलब इन्हें फ़ैलाने के लिए फेसबुक को पैसे दिए जा रहे हैं।

शोधकर्ताओं ने पाया कि एकाउंट्स में वेरिफिकेशन के लिए दिए गए मोबाइल नंबर हमेशा स्विच ऑफ रहते हैं। शोध रिपोर्ट के अनुसार भाजपा की तुलना में दूसरे दलों का सोशल मीडिया पर पेड विज्ञापन न के बराबर है।

सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट आदेश दिया है कि सोशल मीडिया के प्रचार पर भी अचार संहिता और चुनावी नियम लागू होते हैं। लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि चुनाव आयोग ने भाजपा को शैडो पेज इस्तेमाल कर साम्प्रदायिकता और नफरत फैलाकर मतदाताओं को धार्मिक ध्रुवीकरण की छूट दे रखी है।

चुनाव आयोग का ऐसा ही उदासीन रवैया भाजपा नेताओं के भाषणों पर भी दिख रहा है।

आचार संहिता लागू होने की बाद भी प्रधान मंत्री मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, असम मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा समेत सभी प्रमुख भाजपा नेता नफरती और भड़काऊ भाषण देकर धार्मिक ध्रुवीकरण कर रहे हैं और धर्म के नाम पर वोट मांग रहे हैं। हिमंता बिस्वा सरमा तो बस इसी में लगे हैं। 

आचार संहिता के इस गंभीर उल्लंघन के विरुद्ध लोकतंत्र बचाओ अभियान द्वारा मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को कई बार शिकायत की गयी है, लेकिन उनकी ओर से आज तक किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गयी है। अभियान का आरोप है कि ऐसा लगता है कि चुनाव आयोग भाजपा के पार्टी आफिस की तरह काम कर रहा है।

लोकतंत्र बचाओ अभियान उक्त तमाम मामलों पर चुनाव आयोग को उनकी संवैधानिक ज़िम्मेदारी और गरिमा को याद दिलाते हुए निम्न मांग करता है-

■ तुरंत भाजपा के सभी शैडो पेजेस को बंद किया जाये और उस पर डाले गए सांप्रदायिक व विभाजनकारी पोस्ट के आधार पर क़ानूनी कार्रवाई की जाये।

■ शैडो एकाउंट्स पर चुपके से लाखों खर्च करके मतदाताओं का ध्रुवीकरण करना आर्थिक व राजनैतिक भ्रष्टाचार है। चुनाव आयोग इस भ्रष्टाचार के विरुद्ध कार्रवाई करे।

■ लोकतंत्र बचाओ अभियान द्वारा पूर्व में दी गयी शिकायतों पर कार्रवाई करें।

(वरिष्ठ पत्रकार विशद कुमार की रिपोर्ट।)

Tags: BJP creats Shado account defame Shadow account social media

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