महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय प्रशासन ने सत्याग्रह स्थल की घेराबंदी की, सभी प्रवेश द्वार किए बंद : छात्र

वर्धा। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा में शैक्षणिक मांगों को लेकर 8 जुलाई से छात्र-छात्राओं एवं शोधार्थियों द्वारा प्रारंभ किया गया अनिश्चितकालीन सत्याग्रह आज दूसरे दिन भी जारी रहा। छात्रों का आरोप है कि उनकी लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण आवाज़ सुनने और संवाद स्थापित करने के बजाय विश्वविद्यालय प्रशासन लगातार छात्र-विरोधी रवैया अपना रहा है।

सत्याग्रह पर बैठे छात्रों का कहना है कि आंदोलन को प्रभावित करने के उद्देश्य से प्रशासनिक भवन, जहाँ वे सत्याग्रह कर रहे हैं, उसके आसपास के सभी प्रवेश द्वार बंद कर दिए गए हैं। इससे न केवल सत्याग्रह स्थल तक पहुँच बाधित हुई है, बल्कि प्रशासनिक भवन के भीतर मौजूद विद्यार्थियों की आवाजाही भी सीमित कर दी गई है।

छात्रों का आरोप है कि बाहर से आने वाले छात्र-छात्राओं, शोधार्थियों एवं समर्थकों को सत्याग्रह स्थल तक पहुँचने से रोका जा रहा है। साथ ही सत्याग्रह पर बैठे छात्रों के लिए भोजन, पानी, दवाइयाँ तथा अन्य आवश्यक सामग्री लेकर आने वाले साथियों को भी प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। छात्रों का कहना है कि शांतिपूर्ण एवं अहिंसक आंदोलन के दौरान इस प्रकार की पाबंदियाँ प्रशासन के छात्र-विरोधी व्यवहार को दर्शाती हैं।

छात्रों ने कहा कि सत्याग्रह शुरू हुए दो दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक विश्वविद्यालय का कोई जिम्मेदार अधिकारी उनकी मांगों पर चर्चा करने या संवाद स्थापित करने नहीं पहुँचा है। उनका आरोप है कि समस्याओं के समाधान की दिशा में पहल करने के बजाय प्रशासन आंदोलन को प्रशासनिक आदेशों और प्रतिबंधों के माध्यम से नियंत्रित करने का प्रयास कर रहा है।

छात्रों के अनुसार, इसी क्रम में प्रभारी कुलानुशासक द्वारा पत्र क्रमांक: 011/2018-19/सामान्य पत्राचार/16/1537 जारी किया गया है। छात्रों का आरोप है कि इस पत्र में विभिन्न नियमों का हवाला देकर आंदोलनरत विद्यार्थियों पर दबाव बनाने तथा उन्हें भयभीत करने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना है कि संवाद के स्थान पर चेतावनी और प्रतिबंधों का सहारा लेना विश्वविद्यालय प्रशासन के छात्र-विरोधी दृष्टिकोण को उजागर करता है।

छात्रों ने दोहराया कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय के शैक्षणिक भविष्य, शोध संस्कृति और विद्यार्थियों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए है। उनकी प्रमुख मांगों में वर्ष 2022 से बंद पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया को तत्काल पुनः प्रारंभ करना, स्त्री अध्ययन विभाग एवं फ़िल्म अध्ययन विभाग को वर्धा मुख्य परिसर में पुनः स्थापित करना तथा बंद किए गए सभी डिप्लोमा कार्यक्रमों को शैक्षणिक सत्र 2026–27 से पुनः प्रारंभ करना शामिल है।

छात्रों का कहना है कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन वास्तव में महात्मा गांधी के विचारों, संवाद, अहिंसा और लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखता है, तो उसे आंदोलन को रोकने के बजाय सत्याग्रह कर रहे छात्रों से तत्काल वार्ता करनी चाहिए तथा उनकी मांगों पर समयबद्ध एवं लिखित निर्णय सार्वजनिक करना चाहिए। उनका कहना है कि गांधी की कर्मभूमि में लोकतांत्रिक आंदोलन का उत्तर संवाद से होना चाहिए, न कि घेराबंदी, प्रतिबंध और भय के वातावरण से।

छात्रों ने स्पष्ट किया कि उनका सत्याग्रह पूरी तरह शांतिपूर्ण, अहिंसक और संवैधानिक है तथा जब तक उनकी शैक्षणिक मांगों पर सकारात्मक एवं लिखित निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका अनिश्चितकालीन सत्याग्रह जारी रहेगा।

(प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित)

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