बिहार के सारण में मॉब लिंचिंग: लोकसभा चुनाव से पहले भड़काई जा रही सांप्रदायिक आग?

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28 जून 2023 को बिहार की राजधानी पटना से लगभग 80 किलोमीटर दूर सारण जिला के जलालपुर प्रखंड के बंगरा गांव में 55 साल के जहीरुद्दीन की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी। इस बार भी भीड़ ने हत्या के कनेक्शन को बीफ से जोड़ दिया। देखा जा रहा है कि चुनाव के नजदीक आते ही बिहार में धार्मिक संघर्ष बढ़ रहा है।

इसके पहले 7 मार्च 2023 को छपरा जिले के रसूलपुर थाना क्षेत्र के जोगिया गांव में नसीब क़ुरैशी को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला था। भीड़ ने इल्जाम लगाया था कि नसीब क़ुरैशी इलाक़े में गोमांस बेचने आया था।

2022 के फरवरी महीने में बिहार के समस्तीपुर जिले में सत्ताधारी पार्टी जनता दल यूनाइटेड से जुड़े मोहम्मद ख़लील आलम का अपहरण कर हत्या कर दी गई थी। बाद में सोशल मीडिया पर एक वीडियो क्लिप में कथित तौर पर दिखाया गया कि कैसे गोमांस खाने का आरोप लगाकर उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया और बेरहमी से पीटा गया। पूरे मामले को बीफ से जोड़ दिया गया था, लेकिन जिला पुलिस ने इससे इनकार कर दिया था। पुलिस के मुताबिक पूरा मामला पैसों के लेनदेन से जुड़ा हुआ था।

बिहार सरकार दो महीने पहले रामनवमी के दौरान भी शांति व्यवस्था सुनिश्चित करने में विफल रही। अल्पसंख्यक समुदाय के कई लोगों के घर और सामुदायिक पुस्तकालय को आग में झोंक दिया गया था। आने वाले वक्त में लोकसभा के चुनाव हैं। नि:संदेह ये घटनाएं परेशान करने वाली हैं। जो सुशासन सरकार की कानून व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह खड़े कर रही है।

बंगरा गांव में हुई जहीरुद्दीन की मॉब लिंचिंग

सारण के जलालपुर प्रखंड के बतराहा बाजार से कुछ दूरी पर बंगरा गांव के बगल में सड़क किनारे एक पीपल का वृक्ष है। जहां से लगभग 50 मीटर की दूरी पर सड़क के एक तरफ मंदिर तो दूसरी तरफ स्कूल है। इसी जगह पर भीड़ ने 50 वर्षीय जहीरुद्दीन को मार दिया। इस जगह से जहीरुद्दीन का मझवलिया गांव सिर्फ 7 किलोमीटर की दूरी पर है। क्षेत्र में मुसलमानों की भी अच्छी खासी संख्या है।

इसी मंदिर के पास सड़क पर हुई जहीरुद्दीन की मॉब लिंचिंग।

कय्यूम खान उस दिन जहीरुद्दीन के साथ थे, लेकिन भीड़ को देखते हुए वह भाग गए थे। पूरी घटना को कय्यूम विस्तार से बताते हुए कहते हैं कि, “उस दिन बकरीद का पर्व था, लेकिन काम की वजह से हम दोनों को डस्ट कारखाने के लिए ताजपुर बसही से ट्रक पर हड्डी लेकर जाना पड़ा। ट्रक में मरे हुए जानवर की हड्डियां थीं। अचानक ट्रक खराब हो गया, इस वजह से हम लोगों को रुकना पड़ा। हम लोग गाड़ी ठीक करने की व्यवस्था कर रहे थे। तभी वहां के कुछ स्थानीय लोग आकर ट्रक के बारे में पूछने लगे।

जहीरुद्दीन ने उन्हें बताया कि हम लोग हड्डी फैक्ट्री में काम करते हैं। इस वजह से मरे हुए जानवर की हड्डी को लेकर जा रहे हैं।  हड्डी का नाम सुनते ही भीड़ अचानक बढ़ गई और आक्रोश वाला माहौल बनने लगा। कुछ लोग तो ये भी कहने लगे कि पर्व में ये लोग गाय काटे होंगे। पुलिस के कुछ जवान आए जरूर थे, लेकिन लोगों की भीड़ को देखकर चले गए। मैं भाग गया वहां से, जहीरुद्दीन पैर से अपाहिज था, इसलिए भाग नहीं सका। मैं नहीं भागता तो मुझे भी मार देते।”

मृतक जहीरुद्दीन के चाचा ने बताया कि मृतक के तीन पुत्री और दो पुत्र हैं। तीन पुत्री और एक पुत्र की शादी हो गई है। दोनों पुत्र विदेश में मजदूर के तौर पर काम करने गए हैं। घटनास्थल के 20 मीटर की दूरी पर नवीन का घर है। नवीन से जब हमने इस घटना के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि,”हमें कोई जानकारी नहीं है। उस वक्त हम लोग मौजूद नहीं थे। जितना आपको अखबार से पता चला है उतना हमें भी।” आस-पड़ोस के कोई लोग भी इस घटना के बारे में बात करना नहीं चाह रहें है। गांव के लोगों से बात करने पर लगता ही नहीं हैं कि उन्हें इस घटना का कोई अफसोस है।

बंगरा गांव का कोई व्यक्ति इस घटना पर खुलकर नहीं बोल रहा है। एक व्यक्ति ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि,”लगभग 50 से ज्यादा लोग होंगे। कई दिनों से हम लोग गौ हत्या की खबर सुन रहे थे। इस इलाके में यह लोग गाय का ही काम करते हैं। सब जानते हैं इस बात को। इसलिए भीड़ ज्यादा उग्र हो गई।”

जहीरुद्दीन की बेटी की शादी बंगरा गांव में ही हुई है। उनके घर के सदस्य जैबार मियां भी उनके साथ हड्डियों की कंपनी में काम करते थे। वो बताते हैं कि, “इस इलाके में सालों से मृत जानवरों की हड्डियों की प्रोसेसिंग का काम हम लोग करते हैं। सभी लोगों को जानकारी है। आपको जानकर हैरानी होगी कि हड्डी मिल के मालिक मोहम्मद सफाकत को प्रधानमंत्री रोज़गार सृजन योजना के अंतर्गत आर्थिक मदद भी मिली है। हड्डियों को ट्रेन में लोड करके कानपुर और गुजरात भेजा जाता है। इलाके के कई लोग इस काम से जुड़े हुए है।”

बंगरा गांव में इसी जगह हुई जहीरुद्दीन की मॉब लिंचिंग।

मॉब लिंचिंग का संबंध रंगदारी से तो नहीं?

हड्डी फैक्ट्री के मालिक महमद अली उर्फ बच्चू बाबू से नगरा प्रखंड के मझवलिया गांव में उनके आवास पर ‘जनचौक’ ने बातचीत की। बच्चू बाबू ने बताया कि उनके पास हड्डी की लाइसेंसी फैक्ट्री है। उसे पीएजीटी के तहत लोन भी मिला है। बच्चू बाबू के नगरा बाजार में दो मॉल और जमीन भी है, जिसमें पिछले दो साल से इंटरनेट कॉल से रंगदारी मांगी जा रही है। बच्चू बाबू ने इसकी लिखित शिकायत थाने से लेकर वरीय पुलिस पदाधिकारी तक से की हुई है, जिसमें उन्हें सुरक्षा मुहैया कराने की बात कही गई। बच्चू बाबू ने कहा कि घटना का संबंध पूर्व में रंगदारी नहीं देने का भी हो सकता है।

7 आरोपी गिरफ्तार, 20-25 अज्ञात पर मुकदमा

इस पूरे प्रकरण पर सारण पुलिस ने ट्वीट करके बताया है कि इस पूरे मामले में 7 अभियुक्तों को गिरफ़्तार किया गया है। साथ ही मृतक के परिजनों के बयान के आधार पर 20-25 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया हैं।

मॉब लिंचिंग की कई घटनाओं के बाद भी सरकार चुप

पटना के व्यापारी और समाजसेवी रैहान खान पूछते हैं कि,”क्या जहीरुद्दीन के घर पर एक भी सत्ताधारी पार्टी के नेता गए। कहीं कोई शोर शराबा दिखा? मॉब लिंचिंग इन का मुद्दा ही नहीं है। क्या मुसलमान सिर्फ एक वोट बैंक बनकर रह गया है?”

माले जांच दल पहुंचा सारण, पीड़ित परिजनों से की मुलाकात

भाकपा-माले की एक राज्यस्तरीय टीम ने सारण के जलालपुर का दौरा किया, और मृतक के परिजनों से मुलाकात की और घटना की विस्तृत जानकारी ली। माले जांच दल ने कहा है कि सारण को भाजपा व आरएसएस ने निशाना बनाया है। वहां हाल के दिनों में मॉब लिंचिंग की कई घटनाएं घटी हैं। भाजपा द्वारा समाज में फैलाए जा रहे नफरती अभियान के कारण ही आज मुसलमानों पर हमले बढ़े हैं और दिनदहाड़े उनकी हत्याएं हो रही हैं।

सारण में भाकपा माले का जांच दल।

जांच दल में दरौली के पूर्व विधायक अमरनाथ यादव, सिवान से महफूज, भाकपा-माले सारण जिला सचिव सभापति राय, जिला कमेटी सदस्य अनुज कुमार दास, पानापुर प्रखंड सचिव नागेंद्र प्रसाद, रविंद्र महतो, वीरेंद्र राय, तारकेश्वर कुशवाहा, लगन राम सहित दर्जनों पार्टी कार्यकर्ता मौजूद रहे।

(बिहार के सारण से राहुल की रिपोर्ट।)

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