खेल के मैदान में आपरेशन सिंदूर क्या कहने साहिब जी के!

हद कर दी साहिब जी आपने। कैसे प्रधानमंत्री हैं आप, जो युद्ध के मैदान से सीधे क्रिकेट के मैदान में पहुंच गए। क्या आप यह नहीं जानते जब देशों के बीच खेल होता है तो दिलों को मिलाने के लिए होता है। खिलाड़ी भी जीत हार को समभाव से देखते हैं ना कि दुश्मनी से। इसे खेल भावना कहते हैं। आपने जब इस जीत को आपरेशन सिंदूर से जोड़ा तो बहुत सी बातें फिर याद आ गईं, पीड़ित सिसकते 26 परिवार, सैन्य अधिकारी की बात को दबा के मोदी मीडिया का अनर्गल प्रलाप, राफेल सहित पांच विमानों का स्वाहा होना।

पुंछ क्षेत्र में नागरिकों का मारा जाना।एक कर्नल मुस्लिम महिला का अपमान। सिंदूर आपरेशन से कौन सी जीत मिली।कितने आतंकी मारे गए। वे चार कहां हैं जो पहलगाम हमले के गुनहगार थे। बढ़ती भारतीय सेना को डोनाल्ड ट्रम्प के आदेश से रोकना। वगैरह वगैरह, जिससे भारत की सम्प्रभुता पर चोट पहुंची। ऐसे तथाकथित आपरेशन सिंदूर की जीत को एशिया कप फाइनल में भारत की जीत से जोड़ना खौफनाक और ख़तरनाक भी है। 

आधी रात पीएम मोदी का जब ऐसा ट्वीट आया तो पाकिस्तान को दोहरी चोट लगी। पाकिस्तान एशिया कप में हार की पीड़ा से गुजर ही रहा था, लेकिन तभी पीएम मोदी ने अपनी पोस्ट से उन्हें भी ऑपरेशन सिंदूर की याद दिला दी, जब भारत के लड़ाकू विमान पाकिस्तान और पीओके के टेरर कैंपों में बम बरसा रहे थे। पीएम मोदी के इस ट्वीट से पाकिस्तान को मिर्ची लगनी स्वाभाविक है। आतंकी संगठनों पर कार्रवाई किए बिना भारत से शांति और दोस्ती की उम्मीद करने वाले पाकिस्तान ने इस ट्वीट के बाद हताश होकर कहा है कि मोदी जी ने भारत से मित्रता की आखिरी उम्मीद भी खत्म कर दी है।

इससे पहले कहा जाता है अमित शाह के एक फोन की वजह से पाक खिलाड़ियों से हाथ नहीं मिलाए गए थे। और अब मोदी जी के ट्वीट ने ना केवल माहौल को गर्मा दिया है बल्कि हमारे खिलाड़ियों को, कप, ट्राफी और अन्य सम्मान भी खोना पड़े। ऐसा भारत पाक के मैच में पहली दफा हुआ है। कितनी बार भारत ने मैच में पाकिस्तान को हराया है और कितनी बार पाकिस्तान ने भारत को हराया है।भारत पाक के बीच कितने बड़े युद्ध हुए लेकिन कभी ये मैच नहीं रुके।

ना भारतीय टीम ने ऐसा व्यवहार कभी क्रिकेट के मैदान पर किया है। यह सब दुर्भाग्यपूर्ण है। एक तरफ़ अमेरिका भारत से अलग-थलग हो रहा है तो दूसरी ओर भारत अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान से सम्बंध बिगाड़ कर ओछी हरकत कर रहा है जो भारी पड़ सकती है। युद्ध के क्षेत्र से लेकर क्रिकेट के मैदान तक इस मामले को विश्व मंच पर जब रखा जाएगा तब हमारे खिलाड़ियों को जो सजा मिलेगी उसका खामियाजा मोदी और जय शाह नहीं भर पाएंगे।

कुल मिलाकर खेल और युद्ध को एक कर जिस दृष्टिकोण से मोदी अमित शाह और उनके पुत्र जय शाह ने देखा है उससे एशिया कप पाने की खुशियां काफूर हुई हैं तथा इसके दूरगामी परिणाम अच्छे नहीं होंगे। भारत सरकार की विदेश में छवि वैसे भी अच्छी नहीं है। खेल मैदान में आपरेशन सिंदूर की कथित जीत से तुलना ने एक बार पहलगाम की दुखद त्रासदी और भारत की कमजोरी को उजागर किया है। वैसे भी, भारत सरकार की साख देश में भी निरंतर गिर रही है। किसी ने सच ही कहा कि जब पतन के दिन आते हैं तो लोग बौखला जाते हैं। सरकार भी इसी स्थिति में पहुंच गई लगती है।

(सुसंस्कृति परिहार लेखिका और एक्टिविस्ट हैं।)

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