Tuesday, May 30, 2023

हेट कान्क्लेव के खिलाफ सेनाओं के पूर्व प्रमुखों ने लिखा राष्ट्रपति और पीएम को पत्र

सशस्‍त्र बलों के पांच पूर्व प्रमुखों समेत सौ से अधिक प्रमुख लोगों ने, जिसमें नौकरशाह, गणमान्‍य नागरिक शामिल हैं, ने हाल में आयोजित धर्म संसद में नफ़रत फैलाने वाले भाषणों को लेकर राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी को पत्र लिखा है।

गौरतलब है कि हाल में हरिद्वार और कुछ अन्‍य स्‍थानों पर हुए ऐसे आयोजनों में मुस्लिमों के जनसंहार का आह्वान किया गया था। पत्र में ईसाइयों, दलितों और सिखों जैसे अन्‍य अल्‍पसंख्‍यकों को टारगेट किए जाने का भी जिक्र किया गया है।

पत्र में लिखा गया है कि “हम 17 से 19 दिसंबर के बीच उत्‍तराखंड के हरिद्वार में आयोजित हिंदू साधुओं और अन्‍य नेताओं की धर्मसंसद में दिए गए भाषणों की सामग्री (कंटेट) से आहत है। जिसमें लगातार हिंदू राष्‍ट्र की स्‍थापना के लिए आह्वान किया गया और इसके लिए ज़रूरत पड़ने पर हथियार उठाने और हिंदू धर्म की रक्षा के लिए भारत के मुस्लिमों को मारने की भी बात कही गई”।

गौरतलब है कि हरिद्वार में एक धर्म संसद में भगवा आतंकियों ने ‘कड़वे बोल’ को लेकर नाराज़गी जाहिर की गई थी। इस धर्म संसद में वक्‍ताओं ने कथित तौर पर मुस्लिमों के ख़िलाफ़ हिंसा की पैरवी की और ‘हिंदू राष्‍ट्र’ के लिए संघर्ष का आह्वान किया।

समाज के गणमान्य लोगों ने पत्र में आगे कहा है कि, “हम नफ़रत की सार्वजनिक अभिव्यक्ति के साथ-साथ हिंसा के लिए इस तरह के उकसावे की अनुमति नहीं दे सकते हैं– जो न केवल आंतरिक सुरक्षा के गंभीर उल्लंघन का गठन करता है, बल्कि हमारे देश के सामाजिक ताने-बाने को भी तोड़ सकता है।”

पत्र में आगे कहा गया है कि, “हमारी सीमाओं पर मौजूदा स्थिति को देखते हुए, राष्ट्र के भीतर शांति और सद्भाव का कोई भी उल्लंघन बाहरी ताकतों को प्रोत्साहित करेगा।”

आखिर में कहा गया है कि, “सीएपीएफ और पुलिस बलों सहित वर्दी में हमारे पुरुषों और महिलाओं की एकता और एकजुटता, हमारे विविध और बहुल समाज में एक या दूसरे समुदाय के ख़िलाफ़ हिंसा के लिए इस तरह के ज़बरदस्त आह्वान की अनुमति देने से गंभीर रूप से प्रभावित होगी।”

हस्ताक्षर करने वालों में पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल (सेवानिवृत्त) एल रामदास, एडमिरल (सेवानिवृत्त) विष्णु भागवत, एडमिरल (सेवानिवृत्त) अरुण प्रकाश और एडमिरल (सेवानिवृत्त) आरके धवन शामिल थे।

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