Subscribe for notification

कश्मीर पर कहर (पार्ट-6): “इससे अच्छा होता कि शादी के बजाए मौत आ जाती”

श्रीनगर। रिपोर्ट की छठीं किस्त में मैं कई चीजों को एक साथ समेटने की कोशिश करूंगा। कश्मीर में इन 50 दिनों के दौरान तमाम चीजों के अलावा जिस एक क्षेत्र में सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ा वह शादियों और सगाइयों का रहा। नोटबंदी के दौर में जिस तरह से कैश के चलते देश में शादियां रद्द हुई थीं या फिर उन्हें जैसे-तैसे निपटाना पड़ा था। कुछ वही हाल इस दौरान कश्मीर में दिखा। बहुत सारी शादियां लोगों को रद्द करनी पड़ी। क्योंकि बारातें ही नहीं आ जा सकती थीं। साथ ही बाजार बंद होने से लोगों के लिए खरीदारी सबसे बड़ी समस्या बनी हुई थी। वैसे भी शादी में सब कुछ बाजार पर ही निर्भर होता है। हालांकि इन तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद कुछ परिवारों ने शादियों को नहीं टालने का फैसला किया।

उन्हीं में से एक सौरा के पास स्थित अचार इलाके का मामला है। कहते हैं शादियों का स्थान किसी पुरुष या महिला के जीवन में नया जन्म लेने सरीखा होता है। क्योंकि वह यहां से अपनी एक नई जिंदगी शुरू कर रहा होता/होती है। और इसको लेकर दूल्हा और दुल्हन के मन में ढेर सारे सपने होते हैं। इस मौके पर संजने-संवरने को लेकर महिलाओं के खास आग्रह की बात जगजाहिर है। लेकिन आचार की इस शादी में न केवल दुल्हन के सपने बिखरते दिख रहे थे बल्कि घर वालों के लिए जश्न की बजाय यह मातम का मौका ज्यादा दिख रहा था। 370 का साया यहां कदम-कदम पर महसूस किया जा सकता था। और उसको दोनों पक्षों ने छुपाया भी नहीं।

दुल्हन के हाथ में 370 की मेंहदी।

23 सितंबर को दुल्हन की मेंहदी की रस्म थी। जिसमें उसने अपने पूरे हाथ में मेंहदी लगाने की जगह केवल हथेली पर ARTICLE 370 लिखवाना पसंद किया। एक हथेली पर 370 और दूसरी पर लिखा गया ARTICLE। इससे समझा जा सकता है कि अनुच्छेद 370 कश्मीरियों के मन को कितने गहरे तक प्रभावित किया है। इस मौके पर शादी में पहना जाने वाला लहंगा भी दुल्हन को नसीब नहीं हो सका। यहां तक कि बाजारों के बंद होने के चलते बारातियों के खान-पान और उनके स्वागत-सत्कार की जो व्यवस्था होनी चाहिए थी वह भी नहीं मुहैय्या करायी जा सकी।

नतीजतन 24 सितंबर को घरातियों ने बारातियों के सामने केवल राजमा, साग और अंडे को परोसने का फैसला किया। हालांकि इसके साथ ही दोनों पक्षों की जेहन में सुरक्षा का सवाल स्थाई रूप से बना हुआ था। बारात कैसे आएगी? और कितने लोग आ पाएंगे और फिर शादी किस तरह से संपन्न होगी इसको लेकर तमाम आशंकाएं बनी हुई थीं। जो घरातियों के चेहरों पर बिल्कुल पढ़ी जा सकती थीं। शायद इसी गम और गुस्से का नतीजा था कि दुल्हन ने पत्रकारों से कहा कि “इससे अच्छा होता कि शादी के बजाए मौत आ जाती”।

बच्चे जिनके नाम 370 रखे गए हैं।

अनुच्छेद 370 कश्मीरियों की जेहन में किस कदर घुस चुका है उसका दूसरा उदाहरण कुछ बच्चों की पैदाइश में दिखा। अचार में ही दो नवजात शिशुओं के नाम 370 रख दिए गए हैं। और लोग अब उन्हें इन्हीं नामों से बुला रहे हैं। दोनों बच्चों की तस्वीरें यहां दी जा रही हैं। जिन्हें 370 के नाम से जाना जाता है। यह घटना बताती है कि पैदा होने से लेकर शादी और फिर मौत तक कश्मीरियों की जिंदगी में अनुच्छेद 370 का अहम स्थान बना हुआ है।

अनुच्छेद 370 किसी नवजात से जुड़कर अगर जिंदगी की निशानी बन रहा है तो गोलियों से घायल होकर लोगों के मौत के रास्ते पर जाने का सबब भी। इलाके के एक बुजुर्ग अपने किसी काम से बाहर निकले थे कि तभी सुरक्षा बल के एक जवान की गोली ने उनके पैरों को छलनी कर दिया। तब से वह बिस्तर पर पड़े हैं। और उनका खाना-पीना और शौच जाना सब कुछ मुहाल हो गया है। यह उन्हें भी नहीं पता कि आखिर उनकी क्या गलती थी और सुरक्षा बल के जवान के लिए भी शायद यह बता पाना मुश्किल होगा कि आखिर एक बुजुर्ग को उसने क्यों गोली मारी। पुरुष तो पुरुष बुजुर्ग महिलाएं तक इस कहर से नहीं बच रही हैं। एक बुजुर्ग महिला भी सुरक्षा बलों की इन गोलियों का शिकार हो गयी।

घायल महिला।

शायद सुरक्षा बलों के खौफ का ही नतीजा है कि लोगों ने न केवल अपने पूरे इलाके को किलों में तब्दील कर दिया है। बल्कि वो व्यक्तिगत स्तर पर भी अपने घरों की सुरक्षा में जुट गए हैं। इसके लिए किस्म-किस्म के तरीके आजमाए जा रहे हैं। उन्हीं में से एक है घरों के मुख्य समेत सभी प्रवेश द्वारों पर लोहे के गेट लगवाना। और उसके साथ ही सुरक्षा को और पुख्ता करने के लिहाज से उसमें बिलजी के करेंट तक दौड़ा दिए जा रहे हैं। जिससे तोड़ने की बात तो दूर सुरक्षा बल के जवान उसको छूने तक की हिम्मत नहीं कर सकें।

वह दरवाजा जिस पर लोहे का गेट लग रहा है।

(कश्मीर के दौरे से लौटकर शाहिद अहमद खान के साथ महेंद्र मिश्र की रिपोर्ट।)

This post was last modified on October 2, 2019 11:19 am

Leave a Comment
Disqus Comments Loading...
Share

Recent Posts

कल हरियाणा के किसान करेंगे चक्का जाम

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के तीन कृषि बिलों के विरोध में हरियाणा और पंजाब के…

6 hours ago

प्रधानमंत्री बताएं लोकसभा में पारित किस बिल में किसानों को एमएसपी पर खरीद की गारंटी दी गई है?

नई दिल्ली। अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के वर्किंग ग्रुप के सदस्य एवं पूर्व…

6 hours ago

पाटलिपुत्र का रण: जनता के मूड को भांप पाना मुश्किल

प्रगति के भ्रम और विकास के सच में झूलता बिहार 2020 के अंतिम दौर में एक बार फिर…

7 hours ago

जनता के ‘मन की बात’ से घबराये मोदी की सोशल मीडिया को उससे दूर करने की क़वायद

करीब दस दिन पहले पत्रकार मित्र आरज़ू आलम से फोन पर बात हुई। पहले कोविड-19…

9 hours ago

फिल्म-आलोचक मैथिली राव का कंगना को पत्र, कहा- ‘एनटायर इंडियन सिनेमा’ न सही हिंदी सिनेमा के इतिहास का थोड़ा ज्ञान ज़रूर रखो

(जानी-मानी फिल्म-आलोचक और लेखिका Maithili Rao के कंगना रनौत को अग्रेज़ी में लिखे पत्र (उनके…

11 hours ago

पुस्तक समीक्षा: झूठ की ज़ुबान पर बैठे दमनकारी तंत्र की अंतर्कथा

“मैं यहां महज़ कहानी पढ़ने नहीं आया था। इस शहर ने एक बेहतरीन कलाकार और…

12 hours ago