Sunday, December 4, 2022

महेंद्र मिश्र

ग्राउंड जीरो से गुजरात: परिवर्तन का आगाज है नाउम्मीदी और निराशा से पैदा लोगों का गुस्सा

दानी लिमड़ा (अहमदाबाद)। अहमदाबाद की सुरक्षित सीट दानी लिमड़ा और उसकी एक दलित बस्ती सवाय नात की चाली। मेन रोड से सटी यह बस्ती गलियों से भरी पड़ी है। अंदाजा लगाना कठिन हो जाता है कि गलियों में बस्ती...

‘आंदोलन से ही निकले और आंदोलन में विलीन हो गए अरुण’

नई दिल्ली। वो अजातशत्रु थे। आंदोलन से ही पैदा हुए और आंदोलन में ही विलीन हो गए। तमाम शहीद किसानों की तरह वह भी हमारे लिए एक शहीद हैं। वह मृदुभाषी थे। सरल थे। उनका अपनापा हर किसी को...

ताकि गुजरात का तंबू न उखड़े!

आजकल पीएम मोदी के मंदिरों के दौरों का सिलसिला तेज हो गया है। पहले उज्जैन महाकाल, फिर केदारनाथ और अब अयोध्या की तैयारी। पहले जनाब जब उज्जैन गए तो लगा कि कोरिडोर बनाया गया है लिहाजा उसका उद्घाटन करने...

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद नहीं, दंगाई राष्ट्रवाद

ये खुद भी घिनौने हैं। और पूरे देश और समाज को अपने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के उसी घिनौने परनाले में ले जाकर गिरा देना चाहते हैं। इन्हें न संस्कृति की समझ है न राष्ट्र की। और धर्म के नाम पर...

नये भारत के निर्माण की बारिश

पीएम मोदी दो दिन के गुजरात दौरे पर थे। परसों गुजरात से दो तस्वीरें आयीं। एक तस्वीर में पीएम मोदी देश के दूसरे नंबर के पूंजीपति और अपने खासमखास अंबानी के 5जी वेंचर का उद्गाघटन कर रहे हैं। यहां...

ये प्रायोजित आस्थाओं का दौर है!

ये प्रायोजित आस्थाओं का दौर है। जिसमें न धर्म की कोई भूमिका है न ही अध्यात्म के लिए कोई स्थान। यहां बस सत्ता और उसकी राजनीतिक जरूरत है और फिर उसके हिसाब से धर्म का इस्तेमाल। इस काम के...

सुरक्षा का दावा हुआ तार-तार, योगी के गृहनगर गोरखपुर में नाबालिग दलित युवती के साथ गैंगरेप

कौड़ीराम/गोरखपुर। गोरखपुर में एक नाबालिग दलित बच्ची के साथ सामूहिक बलात्कार की घटना सामने आयी है। घटना दिन के खुले आसमान के नीचे खेत में हुई है। घटनास्थल प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ के घर से महज 35 किमी...

जनचौक स्पेशल: नफरत का कैराना नहीं, जीतेगा प्रेम का ‘किराना’

कैराना। पंडित भीमसेन जोशी की पुण्यतिथि पर आए साहित्यकार शैलेंद्र चौहान के लेख में 'किराना घराना' के जिक्र के साथ ही मेरे जेहन में कैराना जाने की ख्वाहिश पैदा हो गयी थी। और वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के चुनावी...

प्रधानमंत्री जी, आप कैलाशा चले जाइये!

प्रधानमंत्री जी अगर आप इस देश में सुरक्षित नहीं हैं तो आपको कैलाशा चले जाना चाहिए। जिस जनता के वोट के बल पर आप चुने गए अगर वही जनता आपको आपके खून की प्यासी दिख रही है तब तो...

जीत गया लोकतंत्र, हार गयी तानाशाही

लोकतंत्र आज एक बार फिर जीत गया। लोकतंत्र की वह डोर जो छूटती जा रही थी जनता ने आज फिर से उसे मजबूती से पकड़ ली। सत्ता की तमाम संस्थाएं जब अपनी जवाबदेहियों से पीछे हट रही थीं और...

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 मोदीराज : याराना पूंजीवाद की पराकाष्ठा

पिछले पांच वर्षों में विभिन्न कम्पनियों द्वारा बैंकों से रु. 10,09,510 करोड़ का जो ऋण लिया गया वह माफ...