Tuesday, December 7, 2021

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राजनीति में महिला विमर्श शुरू करतीं कांग्रेस महासचिव ने बाराबंकी से रवाना की ‘प्रतिज्ञा यात्रा’

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कांग्रेस महासचिव व उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी प्रियंका गांधी ने आज उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के हरख बाज़ार से ‘प्रतिज्ञा यात्रा’ रवाना किया। उन्होंने बाकायदा हरी झंडी दिखाकर “हम वचन निभाएंगे” नारे के साथ ‘प्रतिज्ञा यात्रा’ रवाना किया। बाराबंकी, वाराणसी और सहारनपुर से प्रतिज्ञा यात्रा शुरू हुई। इसके साथ ही कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने सात प्रतिज्ञायें घोषित की। उनकी सात प्रतिज्ञायें यूं हैं –

1-       टिकटों में महिलाओं की 40 सीट प्रतिशत हिस्सेदारी

2-       सत्ता में आने पर लड़कियों को स्मार्टफोन और स्कूटी 

3-       किसानों का पूरा क़र्जा माफ़ 

4-       2500 में गेहूं-धान, 400 पाएगा गन्ना किसान

5-        बिजली बिल सबका हाफ, कोरोना काल का बकाया साफ 

6-       दूर करेंगे कोरोना की आर्थिक मार 

7-       परिवार को देंगे 25 हज़ार, 20 लाख को सरकारी रोज़गार

महिला कृषि मजदूरों से खेत संवाद

प्रतिज्ञा यात्रा के लिये जाते समय प्रियंका गांधी ने एक जगह रुककर, वहां सड़क किनारे खेतों में धान काटती स्त्रियों के साथ आधे घंटे का संवाद किया। इस बीच उन्होंने उन स्त्रियों की दैनिक जीवनचर्चा को जाना और उन्हें राजनीति में सक्रिय भागीदारी के लिये कहा।

प्रियंका गांधी ने धान काटती स्त्रियों से बात की और उनसे पूछा कि कब कितने बजे तक धान काटती हो। औरतों ने बताया कि –“हम सुबह 8 बजे से दोपहर एक बजे तक धान काटती हैं। फिर घर जाकर खाना खाकर, फिर तीन बजे वापस आ जाती हैं खेतों में और 6 बजे तक धान काटती हैं। ”

प्रियंका गांधी ने खेतों में धान काटती स्त्रियों से पूछा फिर 6 बजे घर जाकर क्या करते हो। औरतों ने बताया कि 6 बजे घर जाकर खाना बनाती हैं परिवार को खिलाती हैं।

प्रियंका आगे फिर पूछती हैं- “सोती कितने बजे हो? औरतें जवाब देती हैं 9 बजे के पहले तो नहीं सोती।

प्रियंका गांधी पूछती हैं फिर कितने बजे जगती हो। औरतें जवाब देती हैं सुबह 4 बजे। औरतें कहती हैं काम में ध्यान लगा रहता है आंख आप से आप खुल जाती है।

औरतों ने प्रियंका को बताया कि हमारा धान बहुत सस्ता जा रहा है 10 रुपये किलो। लागत और मेहनत का दाम भी नहीं मिल रहा है। जबकि महंगाई इतनी ज़्यादा है। जबकि हमें हर चीज मोल ही लेना होता है।

प्रियंका गांधी स्त्रियों से फिर पूछती हैं जो सरकार ने गैस सिलेंडर दिया था। उस पर खाना बनाती हो कि नहीं। औरतें जवाब देती हैं हमारे पास इतना पैसा नहीं है कि गैस भरवायें। कई औरतों ने बताया कि उन्हें सिलेंडर नहीं मिला है। औरतों ने बताया कि हम मजदूरी करती हैं उसमें जो मिलता है उससे बच्चों को जिलायें खिलायें कि गैस भरवाएं। कुछ औरतों ने बताया कि कई बार बुखार आ जाता है इलाज के पैसे नहीं होते हैं।

प्रियंका गांधी ने पूछा अपने बच्चों को पढ़ाते हैं कि नहीं आप लोग। जवाब में एक औरत ने बताया कि –“मेरा पति बीमार रहता है। मैं मजदूरी करती हूँ मजदूरी भी लगातार नहीं मिलती। ऐसे में पढ़ायें कैसे। घर पर कोई काम करने वाला भी तो चाहिये।”

राजनीति में महिला विमर्श को स्थापित कर रहीं प्रियंका गांधी

प्रियंका गांधी ने आगे पूछा कि आप लोग ज़्यादा काम करती हैं कि पति ज़्यादा काम करते हैं। इसके जवाब में स्त्रियों ने कहा कि दोनों लोग मिलकर काम करते हैं।

फिर प्रियंका गांधी ने कहा कि आप लोग तो घर का काम भी करती हो। दूना काम करती हो ना आप तो।

 औरतें कहती हैं जब दोनों लोग काम करते हैं तो डेढ़ सौ वो (पति) कमाते हैं डेढ़ सौ हमें मजदूरी मिलती है। तभी घर का खर्च चल पाता है। महंगाई इतनी ज़्यादा है। लड़की बड़ी हो रही हैं ब्याह भी करना है।

फिर प्रियंका गांधी ने स्त्रियो सें बिजली के बिल की समस्या पूछी। औरतों ने बताया कि अब तो बिजली नहीं आती बस बिल ही आता है वो भी बहुत ज़्यादा। औरतों ने बताया कि उन्हें मिट्टी का तेल नहीं मिलता है न कोटे में न बाज़ार में। रात में बिजली नहीं रहती तो कड़ुवा (सरसों) तेल डालकर दीया बारती हैं।

फिर प्रियंका गांधी ने औरतों से कहा कि जब हमारी सरकार आयेगी तो हम छात्राओं को स्कूटी और लैपटॉप देंगे। क्योंकि मैं चाहती हूँ कि आप आगे बढ़ो। उन्होंने आगे कहा कि मैं कुछ लड़कियों से बात कर रही थी तो उन्होंने मुझे बताया कि उनकी शिक्षा के लिये स्मार्टफोन बहुत ज़रूरी है। तो हमने तय किया है कि 12 वीं पास लड़कियों को स्मार्टफोन मिलेगा और जो स्नातक हैं उनको ई-स्कूटी मिलेगी।

प्रियंका गांधी ने आगे महिलाओं से कहा कि हम 40 प्रतिशत महिलाओं को टिकट देना चाहते हैं। क्योंकि मैं जहां भी जाती हूँ, उन्नाव में क्या हुआ आप लोग जानती ही हैं दो लड़कियों के साथ बलात्कार किया गया फिर उनके परिवारों पर भी अत्याचार किये गये।  दोनों घटनाओं को किसने अंजाम दिया। एक घटना को भाजपा के विधायक ने किया और दूसरा भाजपा के ग्राम प्रधान के बेटे ने किया।

उन्होंने आगे लखीमपुर खीरी की घटना का उल्लेख करके महिलाओं को बताया कि भाजपा सरकार में मंत्री के बेटे ने किसानों पर गाड़ी चढ़ाकर 5 लोगों को मार डाला। इसका मतलब है कि जब ये लोग सत्ता में आते हैं तो कुछ भी कर सकते हैं। और आजकल सारी राजनीति इन्होंने जातिवाद पर आधारित कर दी है, धर्म पर आधारित कर दी है।

प्रियंका गांधी ने खेतिहर महिला मजदूरों को राजनीति का मतलब महिलाओं की हिस्सेदारी और अधिकारों की प्राप्ति बताते हुये समझाया कि –“लेकिन राजनीति क्या होती है। राजनीति का मतलब है विकास लाना। मदद करना। जैसे आपको फसल का दाम नहीं मिल रहा है। आप महंगाई से मारे जा रहे हो। कुछ ख़रीद नहीं पा रहे हैं। गैसे सिलेंडर हजार रुपये का हो गया है। ये जो सवाल उठ रहे हैं इन सवालों, इन समस्याओं का समाधान करना ये होता है राजनीति का मतलब। इसका मतलब यह नहीं है कि आप सत्ता में हैं तो आप किसी को कुचल डालो किसी को मार डालो। कुछ भी कर डालो।”

प्रियंका गांधी ने आगे कहा कि मेरा मानना है कि हम महिलायें ज़्यादा समझदार हैं। और मेरा मानना है कि औरतों को राजनीति में आना चाहिये। आप राजनीति में नहीं आओगे तो महिलाओं के लिये कौन खड़ा होगा। पुरुष तो करने से रहा। तो औरत अपने लिये खुद लड़े। इसके लिये उसे राजनीति में आना होगा। तब सत्ता मिलेगा। वैसे भी महिलाओं में करुणाभाव होता है, सेवाभाव होता है, वो दूसरों को साथ लेना जानती हैं। हर परिस्थितियों से लड़कर आगे बढ़ती हैं। तो वो राजनीति में आयेंगी तो अपनी बहनों की मदद करेंगी। राजनीति में ज़्यादा से ज़्यादा महिलायें आगे आयें, चुनाव लड़ें मैं मदद करुंगी। इस बार नहीं जीतोगी तो अगली बार जीत जाओगी। लेकिन कम से कम महिला आगे तो आयें।

प्रियंका गांधी ने महिलाओं को आगे बताया कि मैं एक मोहल्ले में गई थी वहां बहुत सी लड़कियों से मिली सबने पढ़ाई की है। बहुत मुश्किलों से पढ़ाई की है। लेकिन उन्हें काम नहीं मिल रहा है। ये समस्याएं हमें सुलझानी हैं। जब तक हम जाति और धर्म की राजनीति के दायरे में फंसे रहेंगे तो इससे बाहर नहीं निकल पायेंगे। आप लोगों को उन नेताओं से पूछना चाहिये कि आप लोग हमारे लिये कर क्या रहे हैं।

नेता आपको समझाये ये उसकी जिम्मेदारी है। लेकिन ये तो उल्टा हो रहा है। वो एक सिलेंडर देकर कहता है लो एक सिलेंडर लो और खुश हो जाओ। देने को तो हम तीन सिलेंडर दे देंगे। लेकिन उसे भराने के लिये पहले लोगों को पैरों पर खड़ा करना होगा।

प्रियंका गांधी ने महिलाओं को बताया कि अगर हमारी सरकार आयेगी तो हम कुछ ऐसे विद्यालय बनायेंगे जोकि सिर्फ़ महिलाओं को 9वीं से 12वीं तक सक्षम बनाने के लिये। उसमें पढ़ाई होगी उसके साथ बताया जायेगा कि अपनी सुरक्षा कैसे करें, कंप्यूटर कैसे चलाना है, नौकरी कैसे कर सकती हैं। उन्होंने आगे कहा कि महिलाओं के लिये हमारा अलग ही घोषणा पत्र है। जिसमें महिलाओं के लिये ही सारी घोषणायें हैं।

एक महिला ने रोते हुये बताया कि उसकी एक भान्जी है 17-18 साल की। जिसके कोई नहीं है। उसकी कुछ मदद कीजिये। प्रियंका गांधी ने कहा उसे मुझे मेरे पास ले आइये।

इसके बाद उन्होंने औरतों के साथ बैठकर गुड़ खाकर पानी पिया। औरतों ने बारी बारी से उन्हें भाव विभोर होकर अपने हाथों से गुड़ खिलाया। फिर औरतों ने उन्हें अपने हाथों से रोटियां और अपने हाथों का बना अचार खिलाया ।

एक पत्रकार जो कि महिलाओं के बीच घिरी प्रियंका गांधी तक माइक पहुंचाना चाहता था एक महिला से बोला कि आप माइक थामेंगी।

इस पर प्रियंका गांधी ने जवाब देते हुये कहा कि ये औरतें माइक भी लेंगी और सत्ता भी लेंगी।   

फिर आज तक के एक पत्रकार ने पूछा कि मोहब्बत तो आपको बहुत मिल रही है प्रियंका जी क्या यह वोट में भी बदलेगा। इस पर प्रियंका ने जवाब देते हुये कहा कि मोहब्बत, मोहब्बत होती है उसका मोल वोटों से नहीं आंका जा सकता।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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