Saturday, October 16, 2021

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देश को संकीर्णता, नफ़रत और नस्लवाद से निकालना पहला कार्यभार: बाइडेन

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देश और समाज को बांटने वाली एक विभाजकवादी विचारधारा के राजनीतिक सत्ता से बाहर जाने के बाद जनता द्वारा निर्वाचित सरकार का पहला और सबसे महत्वपूर्ण काम देश और समाज को वापस एकजुट करना होता है। संयुक्त राज्य अमेरिका के 46वें राष्ट्रपति के तौर पर शपथ लेने के बाद जो बाइडन यही काम करते दिखे।

पहले ही दिन ट्रंप के 17 फैसलों को उलटा
बतौर राष्ट्रपति कार्यकाल के पहले ही दिन नये राष्ट्रपति जो बाइडन ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 17 फैसलों को उलट दिया। राष्ट्रपति जो बाइडन ने जिन 17 कार्यकारी आदेशों पर हस्ताक्षर किए, उनमें पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अहम विदेश नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित कुछ फैसलों को पलटने वाले हैं। इन 17 कार्यकारी आदेशों, ज्ञापनों और घोषणाओं में से एक में ट्रंप के उस फैसले को भी वापस लिया गया, जिसमें अमेरिकी जनगणना से गैर-अमेरिकी नागरिकों को अलग करने का आदेश दिया गया था।

जो बाइडन ने डोनाल्ड ट्रंप के फैसले को पलटते हुए अमेरिका में ‘मुस्लिम ट्रेवल बैन’ को भी खत्म कर दिया। बता दें कि ट्रंप ने इसके तहत कुछ मुस्लिम देशों और अफ्रीकी देशों के अमेरिका में ट्रेवल पर रोक लगा दी थी। इतना ही नहीं, बाइडन ने मैक्सिको बॉर्डर पर दीवार बनाने के ट्रंप के फैसले को भी पलट दिया और इसके लिए फंडिंग भी रोक दी। जो बाइडन ने राष्ट्रपति बनने के तुरंत बाद कीस्टोन एक्सएल पाइप लाइन के विस्तार पर भी रोक लगाने के आदेश पर दस्तखत किए हैं। बता दें कि कीस्टोन एक तेल पाइपलाइन है, जो कच्चे तेल को अल्बर्टा के कनाडाई प्रांत से अमेरिकी राज्यों इलिनोइस, ओक्लाहोमा और टेक्सास तक ले जाती है।

जो बाइडन ने बुधवार को कार्यकारी आदेशों पर हस्ताक्षर के बाद व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में संवाददाताओं से कहा, “मैं आज के कार्यकारी कदमों से गौरवान्वित हूं और मैंने अमेरिका की जनता से जो वादा किया किया था, उन्हें मैं पूरा करने जा रहा हूं, अभी लंबी यात्रा करनी है। ये बस कार्यकारी आदेश हैं। वे जरूरी हैं, लेकिन जो हम करने वाले हैं उनके लिए हमें विधेयकों की जरूरत पड़ेगी।” इसके अलावा राष्ट्रपति ने कहा कि आने वाले दिनों में वह और कार्यकारी आदेशों पर हस्ताक्षर करने वाले हैं।

राष्ट्रपति जो बाइडन का ऐतिहासिक भाषण
46वें राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ग्रहण करने के बाद जो बाइडन जब कहते हैं, “हम एक महान राष्ट्र हैं, हम अच्छे लोग हैं।” तब वह अमेरिकी नागरिकों के मन को दक्षिणपंथी नस्लवादी डोनाल्ड ट्रंप के दौर की श्वेत संकीर्णता से बाहर निकालने की कोशिश करते हैं। जब उन्होंने कहा कि मैं सभी अमेरिकियों का राष्ट्रपति हूं- सारे अमेरिकियों का, हमें एक-दूसरे की इज्जत करनी होगी और यह सावधानी रखनी होगी कि सियासत ऐसी आग न बन जाए, जो सबको जलाकर राख कर दे तो वह गहरे बंटे हुए अपने समाज के बीच भाईचारा और सौहार्द का पुल बनाते हैं और राजनीति के जहरखुरानों से सचेत करते हैं।

यूएसए के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन का पूरा भाषण
अपने 21 मिनट के शपथ ग्रहण भाषण में 78 वर्षीय बाइडन ने कहा, “यह अमेरिका का दिन है, लोकतंत्र का दिन है। सदियों से जिसके लिए अमेरिका की परीक्षा ली जाती रही, हम उसमें उत्तीर्ण हुए हैं। आज हम एक प्रत्याशी नहीं, लोकतंत्र की जीत का उल्लास मना रहे हैं। लोकतंत्र मूल्यवान है, नाजुक है, लेकिन हमारे प्रयासों से जी उठा है।

हम 200 से अधिक सालों से शांतिपूर्ण ढंग से सत्ता का परिवर्तन करते आए हैं। हम बहुत दूर तक चले तो आए हैं, लेकिन अभी और बहुत दूर जाना भी है। हम एक बेहतर संयुक्त राष्ट्र बनाने का प्रयास करते रहेंगे। इसके लिए आज बहुत कुछ सुधारना, निर्माण करना और हासिल करना बाकी है। इतिहास में कुछ ही लोगों ने आज जैसे हमारे हालात सहे हैं। हमने जितने लोग विश्व युद्धों में गंवाए, उससे अधिक इस महामारी में मारे गए हैं, लाखों नौकरियां खत्म हुईं, हिंसा और नुकसान हुआ।

श्वेत प्रभुत्ववाद और घरेलू हिंसावादियों से हमें देश को बचाना है। यह देश के लिए खतरा हैं। इसके खिलाफ हमें एकता चाहिए। मैं सभी अमेरिकियों को साथ आने के लिए आमंत्रित करता हूं। एकता से ही अब तक हुई गलतियां सुधार सकते हैं। अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दे सकते हैं। नौकरियां बढ़ा सकते हैं। नस्लवादी भेदभाव में न्याय दे सकते हैं। हिंसा खत्म कर सकते हैं। मध्यम वर्ग को फिर से मजबूत बना सकते हैं।

हमारा इतिहास नस्लवाद, भेदभाव और लोकतंत्र विरोधी विचारों के खिलाफ सभी मानव को समान मानने वाले विचार के लगातार चले संघर्षों का इतिहास है। समानता का विचार हमेशा जीता है। हम आज भी इसे जिताएंगे। हम एक-दूसरे को दुश्मन नहीं, पड़ोसी की तरह समान रूप से देखें। ऐसा नहीं करेंगे तो असुरक्षा, कड़वाहट और बढ़ेगी। कोई देश गड़बड़ी भरे हालात में आगे नहीं बढ़ सकता। हमें इस क्षण संयुक्त राष्ट्र के तौर पर खड़ा रहना होगा। नई शुरुआत करते हैं, एक-दूसरे को सुनते हैं, बोलने देते हैं।

देश वासियों, हमें बेहतर बनना होगा। अपने चारों ओर देखें, आज हम कैपिटल के गुंबद के साये में खड़े हैं, जो गृह युद्ध के समय बना। 108 साल पहले महिलाओं को मतदान के अधिकार के लिए खड़े होने पर रोका गया, लेकिन आज हम एक अश्वेत महिला को उपराष्ट्रपति बनते देख रहे हैं। आज हम उस पवित्र स्थल पर खड़े हैं, जिसे दो हफ्ते पहले दक्षिणपंथियों की भीड़ ने बिगाड़ने का प्रयास किया था, लेकिन हमने ऐसा नहीं होने दिया, न कभी होने देंगे।

अगर आप किसी से असहमत हैं तो यह कोई गलत बात नहीं, बल्कि यही अमेरिका का विचार है, लेकिन इसकी वजह से एकता खंडित नहीं होनी चाहिए। कई देश वासी अपनी नौकरियों, हेल्थ केयर, लोन राशि चुकाने की चिंताओं से घिरे हैं। इन हालात में हम क्या उनसे नफरत करेंगे जो हमसे अलग दिखते हैं, अलग धर्म मानते हैं, अलग अखबार पढ़ते हैं?

बीते महीनों ने हमें सिखाया कि सच में भी झूठ छिपाया जाता है। हमें संविधान का सम्मान करना है तो सत्य की रक्षा करें और असत्य को हराएं। मैं सभी अमेरिकियों का राष्ट्रपति हूं, जिन्होंने मेरा समर्थन नहीं किया, मैं उनके हकों के लिए भी उतनी ही शिद्दत से लड़ूंगा, जितना उनके लिए जिन्होंने मुझे वोट किया।

जीवन में कभी न कभी आपको किसी की मदद की जरूरत पड़ेगी, कभी आप भी मदद देने में सक्षम होंगे। इसी से देश आगे बढ़ेगा, समृद्ध होगा। असहमति के बीच भी हमें पूरी शक्ति इस काले समय से निकलने के लिए लगानी है। दुनिया हमें देख रही है। जो हमारी सीमाओं से परे हैं, उन्हें कहना चाहूंगा कि हम न केवल इस विकट समय से उबरेंगे, बल्कि कल की चुनौतियों के लिए तैयार रहेंगे। शांति, प्रगति और सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय साझेदार की भूमिका निभाएंगे।

हमने वायरस, असमानता, नस्लवाद, हिंसा को सहा, लेकिन अब हमारी चुनौती निडर होकर खड़े होने की है, क्योंकि काफी काम करना है। इन बढ़ती चुनौतियों से हम निपटते हैं, अपने बच्चों को एक बेहतर दुनिया दे पाते हैं, तभी हम अमेरिका की कहानी का हिस्सा बने पाएंगे। हमारा काम हमारी कहानी कहेगा। हमारे बच्चे और उनके बच्चे अपनी कहानियों में लिखेंगे कि किस तरह हमने अपने बिखरते देश को संवारा। यह उम्मीद, एकता और महानता की कहानी होगी, डर और बिखराव की नहीं। वे लिखेंगे कि हमने हमारी निगहबानी में लोकतंत्र को मरने नहीं दिया, उसे बचाया।”

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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