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बजरंग दल का सदस्य निकला जामिया में गोली चलाने वाला शख्स, घटना के पीछे गहरी साजिश की आशंका

नई दिल्ली। महात्मा गांधी के बलिदान दिवस के मौके पर बृहस्पतिवार को शांति मार्च लेकर राजघाट के लिए निकले जामिया मिल्लिया इस्लामिया के स्टूडेंट्स पर एक हिन्दुत्ववादी युवक ने फायरिंग कर दी जिससे एक छात्र जख़्मी हो गया। इस दौरान वहां मौजूद भारी पुलिस फोर्स इत्मिनान से तमाशा देखती रही। पुलिस ज़िंदाबाद के नारे लगा रहे हमलावर को रोकना तो दूर पुलिस का रवैया वारदात के बाद भी बेहद ढीला-ढाला औऱ संदिग्ध रहा। यहां तक कि उसने जख़्मी छात्र को अस्पताल ले जाने के लिए बैरिकेड खोलकर रास्ता बनाने की जहमत भी नहीं उठाई। इस वारदात को दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की भारतीय जनता पार्टी की कोशिशों से जोड़कर देखा जा रहा है।

आम आदमी पार्टी के एमपी संजय सिंह ने आरोप लगाया कि यह वारदात गृह मंत्री अमित शाह की दिल्ली चुनाव स्थगित कराने की साजिश का हिस्सा है। इस वारदात के लिए तीन दिन पहले सार्वजनिक मंच से `गोली मारो सालों को` जैसे नारे लगवा चुके केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर और चुनावी भाषणों में साम्प्रदायिक विष वमन कर चुके भाजपा सांसद प्रवेश वर्मा को भी ज़िम्मेदार ठहराया जा रहा है।

पुलिस ने डेढ़ महीना पहले 15 दिसंबर को जामिया मिल्लिया इस्लामिया में घुसकर भारी तांडव मचाया था। यहां तक कि लाइब्रेरी और टॉयलेट्स में घुसकर भी छात्र-छात्राओं के साथ हिंसा की थी। इस बर्बर हिंसा और सीएए-एनपीआर-एनसीआर के विरोध में जामिया के छात्र निरंतर आंदोलनरत हैं। गाँधी के बलिदान दिवस के मौके पर जामिया के स्टूडेंट्स कोऑर्डिनेशन कमेटी के आह्वान पर राजघाट के लिए शांति मार्च लेकर निकले थे। पुलिस ने होली फैमिली हॉस्पिटल के पास बेरिकेडिंग कर रखी थी।

यहाँ भारी पुलिस फोर्स मौजूद थी। बताया जाता है कि अचानक प्रदर्शनकारियों के सामने गोपाल नाम का एक युवक पिस्तौल लहराते हुए ज़ोर से चिल्लाने लगा। वायरल हो रहे वीडियो और तस्वीरों से पता चलता है कि इस दौरान पुलिस में कोई हलचल नहीं हुई। उसने दौड़कर पिस्तौलधारी को पकड़ने या रोकने की कोशिश तक नहीं की। पुलिस या तो वीडियो बनाती रही या तमाशायियों से भी ज़्यादा सहज मुद्रा में बनी रही। युवक ने फायरिंग कर प्रदर्शन में शामिल पत्रकारिता के छात्र शादाब फारूख़ (25) को घायल कर दिया। इस दौरान हमलावर युवक पिस्तौल लहराते हुए यह लो आज़ादी, हिंदुस्तान ज़िंदाबाद, पुलिस ज़िंदाबाद जैसे नारे लगा रहा था।

आरोप है कि वारदात के बाद भी पुलिस का रवैया शर्मनाक ढंग से ढीला-ढाला और गैरज़िम्मेदाराना बना रहा। यहां तक कि उसने जख़्मी छात्र शादाब को अस्पताल ले जाने की तत्परता दिखाने के बजाय उसके लिए बैरिकेड हटाकर रास्ता भी नहीं बनाया। हाथ में गोली लगने से लहूलुहान शादाब को बैरिकेड के ऊपर से ही दूसरी पार उतार कर एम्स के ट्रौमा सेंटर पहुंचाया जा सका। आंदोलनों और विधानसभा चुनाव प्रचार अभियान की वजह से संवेदनशील मानी जा रही देश की राजधानी में यह ख़बर तेज़ी से फैल गई। सोशल मीडिया पर इस वारदात के लिए भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के साम्प्रदायिक व उत्तेजक भाषणों को ज़िम्मेदार ठहाराया गया।

बहुत से लोगों ने वारदात के दौरान पुलिस के तमाशबीन बने रहने और बाद में घायल के लिए बैरिकेड तक न हटाने जैसी बातों के आधार पर आरोप लगाया कि वारदात के पीछे सिर्फ़ उकसावा नहीं लगता बल्कि पूरी वारदात सुनियोजित हो सकती है। वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश के रे ने लिखा, `जब वह फ़ासीवादी ठग पिस्तौल दिखाकर धमकी दे रहा था, तब दिल्ली पुलिस उसको रोकने के बजाय उसका वीडियो बना रही थी। जब उसने गोली चलाकर एक छात्र को घायल कर दिया, तो पुलिस ने उसे उपचार के लिए ले जाने के बैरीकेड हटाने से मना कर दिया और उस घायल छात्र को बैरीकेड के ऊपर से चढ़कर जाना पड़ा।`

आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने इस वारदात को गृहमंत्री अमित शाह की 8 फरवरी को प्रस्तावित दिल्ली विधानसभा चुनाव स्थगित कराने की साजिश करार दिया है। उन्होंने कहा कि अपनी पार्टी की हार के डर से अमित शाह दिल्ली का माहौल खराब करने की साजिश कर रहे हैं। इससे पहले उन्होंने अपने नेताओं से उत्तेजक भाषण दिलाए।

गौरतलब है कि सोमवार को केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने सार्वजनिक मंच पर खड़े होकर `देश के गद्दारों को, गोली मारो सालों को` जैसे नारे लगवाए थे। भाजपा सांसद प्रवेश वर्मा भी मुसलमानों को निशाने पर लेकर बयानबाजी कर चुके हैं। सीपीआई के महासचिव डी राजा ने जामिया के छात्रों के शांति मार्च पर फायरिंग के लिए अनुराग ठाकुर की इस कारगुजारी को ही जिम्मेदार बताते हुए उनकी गिरफ्तारी की मांग की है।

सीपीआई नेता राजा ने कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण है कि दिल्ली में जिस दिन गांधी को गोली मारी गई थी, उसी दिन ऐसी वारदात हुई है। ओखला से आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार व विधायक अमानुल्लाह खान ने कहा कि 1948 में गोडसे ने गांधी पर गोलियां चलाई थीं, आज गोडसेवादियों ने। अनुराग ठाकुर जो कह रहे थे, उनके अनुयायी कर रहे हैं।

जामिया के प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग करने वाले युवक का नाम गोपाल बताया जाता है जिसने रामभक्त गोपाल नाम से फेसबुक प्रोफाइल बना रखी है। बताया जाता है कि वारदात को अंज़ाम देने से पहले उसने फेसबुक लाइव भी किया था और शहीदाना अंदाज़ में स्टेटस अपडेट किए थे। उसके फेसबुक प्रोफाइल और स्टेटस के स्क्रीनशॉट भी वायरल हो रहे हैं। बताया जाता है कि वह ग्रेटर नोएडा के जेवर इलाके का रहने वाला है और उसके पिता राजेंद्र शर्मा पान की दुकान चलाते हैं। गोपाल को 12वीं का स्टूडेंट बताया जा रहा है और कुछ चैनल उसके नाबालिग होने पर बहस में मुब्तिला हैं। एक फेसबुक प्रोफाइल में उसे बजरंग दल का सदस्य बताया गया है। कुछ फोटो में वह बंदूक और किसी में तलवार जैसे हथियारों के साथ खड़ा है। गोदी मीडिया ने इतनी भयानक वारदात के बावजूद अपना घिनौना रवैया नहीं छोड़ा है। एक कुख्यात चैनल ने हमलावर को प्रोटेस्टर्स के बीच का ही युवक बताने की कोशिश की तो एक ने दावा कर डाला कि वह पुलिस मुर्दाबाद के नारे लगा रहा था।

फायरिंग की वारदात के बाद जामिया इलाके में तनाव है। घटनास्थल पर भी बड़ी संख्या में लोग इकट्ठे हो गए थे। नागरिक संगठनों से जुड़े लोगों ने इस वारदात के बहाने बड़ी हिंसा और दमन के षड़यंत्र की आशंका भी जाहिर की है।

This post was last modified on January 30, 2020 10:42 pm

Janchowk

Janchowk Official Journalists in Delhi

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