Saturday, February 24, 2024

आईआईटी में सबसे पहला प्रश्न- तुम्हारी जाति क्या है?

तुम्हारी जेईई की रैंक क्या है? ‘भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान’, यानि आईआईटी में यह पहला सवाल है, जो छात्रावास में आपके रूम-पार्टनर द्वारा, पहली कक्षा के पहले की घबराहट के बीच या कैंटीन में पहली कॉफी की टेबल पर, कहीं से भी दागा जा सकता है। देखने में परिचय बढ़ाने के लिए किया गया यह मासूम सवाल सा दिख सकता है, लेकिन आरक्षित वर्ग के छात्रों के लिए इसके पीछे छिपा हुआ भाव होता है, कि ‘तुम्हारी जाति क्या है?’

आईआईटी-बॉम्बे के मकैनिकल इंजीनियरिंग के दूसरे वर्ष के छात्र दर्शन सिंह सोलंकी की गत फरवरी में आत्महत्या के कारणों की जांच कर रही 12 सदस्यीय टीम ने निष्कर्ष निकाला है कि उसकी आत्महत्या के पीछे जातीय भेदभाव का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिला है और संभव है कि खराब परीक्षा परिणामों के चलते उसने ऐसा क़दम उठाया हो।

दर्शन ने हॉस्टल-16 की सातवीं मंजिल से कूद कर अपनी जान दे दी थी। समिति के निष्कर्षों को खारिज करते हुए उसके पिता ने निदेशक को पत्र लिखा कि, “यह किस तरह का संस्थान है जो अनुसूचित जातियों/जनजातियों के छात्रों को सुरक्षित और अच्छी परवरिश के लायक माहौल देने के अपने वायदों को निभाने की जगह उनके द्वारा झेली जा रही तकलीफों के लिए खुद उन्हें ही गुनहगार ठहराता है?”

लेकिन सच्चाई यही है कि इन संस्थानों के परिसरों में पहले क़दम से ही जाति अपने पांव पसारना शुरू कर देती है और वही आगे चल कर इन छात्रों के आत्मसम्मान के साथ-साथ शैक्षणिक परिणामों को भी कमजोर करती जाती है।

ज्यादातर छात्र जेईई की तैयारी के दौरान यही सोचते हैं कि एक बार दाखिला मिल जाए तो जिंदग़ी पटरी पर आ जाएगी। इसीलिए दाखिले के बाद वे उन सभी पाठ्येतर गतिविधियों में भाग लेना शुरू कर देते हैं, जो तैयारी के समय छूट गयी रहती हैं। संतुलन बना कर फिर से पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने में थोड़ा समय लग जाता है।

इसी वजह से पहला वर्ष लगभग सभी छात्रों के लिए भारी साबित होता है। लेकिन कमजोर पृष्ठभूमि से आये छात्रों के लिए तो यह विशेष तौर पर मुश्किल होता है, क्योंकि वे इसके साथ ही साथ अंग्रेजी पर पकड़ और संसाधनों की कमी से भी जूझ रहे होते हैं। ग्रामीण पृष्ठभूमि से आये वे बच्चे जो जेईई की परीक्षा हिंदी माध्यम से पास करके आये होते हैं, उन्हें भी यहां पूरी पढ़ाई अंग्रेजी में ही करनी होती है।

अंग्रेजी के लिए दिया जाने वाला अतिरिक्त प्रशिक्षण भी शुरुआती दिनों में ज्यादा कारगर नहीं साबित होता। कुछ बच्चों को यही समझने में अच्छा खासा समय निकल जाता है कि प्रोफेसर द्वारा पढ़ाई जाने वाली ‘पोटेंशियल एनर्जी’ तो दरअसल ‘स्थितिज ऊर्जा’ ही है। अंग्रेजी में जवाब देने में हिचक और अपने सहपाठियों की हंसी के डर से कई बच्चे वाइवा ही छोड़ देते हैं।

कई ऐसे छात्र जो अपने स्कूलों में टॉपर रहे होते हैं, यहां आकर सबसे नीचे हो जाते हैं। कई बार उनको ‘एफआर’ (फेल एंड रिपीट) ग्रेड मिल जाते हैं। ऐसे शुरुआती झटके ही कई छात्रों को तबाह करने के लिए काफी होते हैं।

आरक्षित श्रेणी के प्रथम वर्ष के छात्र आरक्षण संबंधी टिप्पणियों और कटाक्षों के सामने अक्सर असहाय और रक्षात्मक महसूस करने लगते हैं, क्योंकि इस समय वे खुद ही कई मोर्चों पर संतुलन बनाने के लिए संघर्ष कर रहे होते हैं और इस प्रश्न पर विचार करने की स्थिति में नहीं होते।

ऐसे कटाक्ष उनके आत्मविश्वास को और ज्यादा कमजोर कर देते हैं। जबकि प्रथम वर्ष के झंझावात से निकल जाने के बाद यही छात्र आरक्षण की जरूरत और औचित्य पर बेहतर ढंग से बहस करने में सक्षम हो जाते हैं।

दर्शन सोलंकी केमिकल इंजीनियरिंग के छात्र थे। आईआईटी की व्यवस्था के मुताबिक इन छात्रों को रूम पार्टनर कंप्यूटर साइंस जैसी टॉप 500 रैंकिंग की मांग वाली शाखाओं के छात्र मिलते हैं। अपने खराब स्कोर और ‘फेल एंड रिपीट’ ग्रेडिंग के साथ ऐसे छात्रों के बीच रहना ज्यादा अवसाद पैदा करता है।

हलांकि अब अलग-अलग शाखाओं और  पृष्ठभूमियों के छात्रों के बीच मेल-मिलाप विकसित करने के लिए कमरों के आवंटन का आधार बदल दिया गया है। अब एक कमरे में एक छात्र सामान्य वर्ग का और दूसरा आरक्षित वर्ग का रखा जाने लगा है।

आईआईटी में रैंक और मेरिट पर ज्यादा जोर हाशिये के समाजों से आये हुए छात्रों को किनारे ढकेलता रहता है। ऐसा नहीं है कि इनमें प्रतिभा का अभाव है, आखिर ये जेईई पास करके आईआईटी में प्रवेश लिये होते हैं। समुचित मार्गदर्शन और सलाह से वंचित ये बच्चे कक्षाओं के भीतर भी और बाहर भी संघर्ष को अभिशप्त हो जाते हैं।

रैंक और मेरिट पर जोर देने वाले प्रोफेसरों का नजरिया और रवैया भी इन छात्रों का मनोबल तोड़ने वाला होता है। वे अक्सर इस बात का उल्लेख करते रहते हैं कि “आरक्षण के कारण आईआईटी में आने वाले छात्रों की गुणवत्ता में गिरावट आई है।” या कैसे “भारत आरक्षण के कारण संघर्ष कर रहा है।”

दरअसल ऐसे संस्थानों ने मजबूरी में अपने यहां आरक्षण लागू तो कर दिया, लेकिन इसके अनुकूल शिक्षण तकनीकें, मूल्यांकन पद्धति और प्रशासनिक उपाय विकसित करने के काम में या तो असमर्थ रहे अथवा अनिच्छुक बने रहे। इसका खामियाजा यह हुआ कि इनकी पूरी प्रणाली मेरिट और उत्कृष्टता पर जोर देने वाली बनी रही।

इसका हश्र अनिवार्यतः यही होना था कि आरक्षण लागू करने के बावजूद आरक्षित वर्गों के छात्रों में मेरिट की कमी बताते हुए पूरी व्यवस्था अपनी सोच के स्तर पर आरक्षण के प्रावधान के खिलाफ खड़ी हो जाती। यही हुआ भी।

संस्थान ने जाति आधारित भेदभाव से बचने-बचाने तथा परिसरों को ज्यादा समावेशी बनाने के लिए अपनी तरफ से कई उपाय किये हैं। प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के बाद किसी भी दस्तावेज़ में जेईई रैंकिंग का उल्लेख नहीं किया जाना, जाति के मुद्दों पर छात्रों में संवदनशीलता विकसित करने के लिए अनुकूलन सत्रों का आयोजन, आरक्षित वर्गों के छात्रों की शिकायतों को सुनने और समाधान करने के लिए मंच और सरकारी निर्देश के अनुसार अनुसूचित जातियों/जनजातियों के छात्रों के लिए सलाहकार उपलब्ध कराना।

2014 में आईआईटी बॉम्बे के बीटेक के चौथे साल के छात्र अनिकेत अंभोरे की आत्महत्या के बाद ‘ए के सुरेश समिति’ की संस्तुति पर वहां एससी-एसटी सेल का गठन किया गया। हालांकि यह गठन भी 2017 में हो पाया, फिर भी 2022 तक भी इस सेल को कोई ऑफिस नहीं मुहैया कराया गया। अभी भी हालत यह है कि इस सेल को कोई अधिकार-पत्र नहीं सौंपा गया है, जिसके अभाव में यह सेल एससी-एसटी मामलों में हाथ ही नहीं डाल सकता।

यहां तक कि यह सेल ऐसे फैकल्टी सदस्यों द्वारा चलाया जा रहा है, जो खुद एससी-एसटी समुदाय के नहीं हैं। संस्थान के मानसिक स्वास्थ्य सेवा में एक भी सलाहकार एससी-एसटी समुदाय का नहीं है। ऐसे सलाहकार अक्सर खुद ही कमजोर वर्गों की समस्याओं को समझने में असमर्थ होते हैं।

जाति के सवाल पर संवेदनशीलता विकसित करने के लिए पिछले साल एक ऐसा पाठ्यक्रम शुरू करने की घोषणा की गयी थी जो सभी छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए अनिवार्य होगा, लेकिन वह पाठ्यक्रम अभी तक तैयार भी नहीं हुआ है। संस्थान द्वारा किये गये उपायों की जमीनी हक़ीक़त यही है।

पिछले साल इस सेल ने एक सर्वेक्षण करके बताया कि आरक्षित वर्गों के छात्रों की मानसिक समस्याओं में परिसर में होने वाला जातीय भेदभाव केंद्रीय कारण है। सर्वेक्षण में भाग लेने वाले लगभग एक चौथाई छात्र मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित थे, जबकि 7.5 प्रतिशत छात्र खुद को नुकसान पहंचा सकने वाली गंभीर मानसिक समस्याओं से ग्रस्त मिले।

कुछ छात्रों का मानना है कि जिस तरह से रैगिंग और छेड़खानी को अपराध घोषित किया गया, उसी तरह रैंक पूछने को भी अपराध घोषित करने जैसे बड़े क़दम उठाने की जरूरत है। भेदभाव की समस्याओं के निराकरण के सांस्थानिक प्रयासों में ऐसे प्रोफेसरों को ही शामिल किया जाना चाहिए जो हाशिये की पृष्ठभूमि से आने वाले छात्रों के प्रति स्वयं भी संवेदनशील हों और जो खुलेआम मेरिट की वकालत करने वाले न हों।

दरअसल, कमजोर वर्गों से आने वाले छात्रों के सशक्तीकरण से भी ज्यादा जरूरी है सामान्य वर्गों के छात्रों और प्रोफेसरों को जागरूक करना और उन्हें जाति के प्रश्न पर संवेदनशील बनाना। इसका सबसे आवश्यक पहलू है कि आईआईटी के शिक्षकों, कर्मचारियों और कार्यालयों में कमजोर वर्गों के लोगों का प्रतिनिधित्व बढ़े और वे समावेशी हों।

लोकसभा के हालिया शीत सत्र में पेश आंकड़ों के अनुसार केंद्र सरकार द्वारा 5 सितंबर 2021 से 5 सितंबर 2022 के बीच आरक्षित पदों पर नियुक्तियों के अभियान चलाये जाने के शोर-शराबे के बावजूद आईआईटी संस्थानों में आरक्षित श्रेणी के मात्र लगभग 30 प्रतिशत पद भरे जा सके हैं।

आईआईटी रुड़की में 62%, आईआईटी बॉम्बे में 53% और आईआईटी गांधीनगर में 34% आरक्षित श्रेणी के पद अभी भी खाली हैं। आईआईटी मद्रास के इस श्रेणी के 44 खाली पदों में से 29 भरे गये, जबकि 25 अभी भी खाली हैं।

आईआईटी संस्थानों के परिसर भी भारतीय समाज का ही आईना हैं। इसलिए संस्थानों द्वारा अपने परिसरों में जातीय भेदभाव के अस्तित्व को नकारना व्यर्थ है। बेहतर है कि वे अपने यहां आरक्षित श्रेणी के खाली पदों को शीघ्र भरें और भेदभाव के खात्मे के लिए घोषित क़दमों को अमली जामा पहनाएं।

(शैलेश स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं, यह लेख ‘इंडियन एक्सप्रेस’ में पल्लवी स्मार्ट की रिपोर्ट पर आधारित है)

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Anurag kumar
Anurag kumar
Guest
10 months ago

I have experienced in 2012, in IIT delhi, energy department. I have been asked more not only cast name.

Col A K Tiwari
Col A K Tiwari
Guest
Reply to  Anurag kumar
10 months ago

No. I studied there 70-75. Not one case. Not one case of casteist slur or caste based discrimination.

The Bitter Truth
The Bitter Truth
Guest
Reply to  Anurag kumar
10 months ago

तो जाति पूछी तो बुरा लग गया। और जब आवेदन में अपनी जाति और जाति प्रमाणपत्र लगाते हो। प्रवेश प्रक्रिया के समय तो बीसों बार पूछा जाता है, तब तो बड़े गर्व से बताते हो, कि सर मैं 22 प्रतिशत अंक लाया हूँ, मेरे आगे से ये 92 प्रतिशत वालों को हटाओ और मुझे प्रवेश दो।

Rajesh Kumar
Rajesh Kumar
Guest
Reply to  The Bitter Truth
10 months ago

Dosto Hamare Desh me Aarakshan Constitution me Paravdhan anusar Diya ja raha hai chahe Nokri me hoo ya Kisi bhi Sansthan me addmission ke waqt hoo lekin Hamare yeha hamesha ek mudda rehta hai SC/ST ko reservation kyo? Kya unko di jane wali relief according to niyam anusar nahi hai? Agar Legal way me sahi hai tab uss par questions kyo? Dosto caste system hamare samaaj ka hissa hai joh by birth nidharit hota hai uss bache ko nahi pata hota usne kiss caste me Janam liya hai lekin Janam hote hi baad me badaa hone par Gyan hone ke baad pata chalata hai ki uski caste samajh me niman hai usko alag se category SC/ST kaha jatta hai tab wah uss caste anusar sochna ,rehna, jena, padna suru karta hai jab Tak jeta hai wah caste uske sath iss Desh me bani rehti hai usme Janam ke baad martu tak Sarkar and samajh dewara kya milta wah jag jahir hai sarkar ne Arekhsan dekar khana purti kar di Samajh ne caste bata kar khana purti kar diya lekin uske sath kya kya hua jiwan bhar kaha kisiko yaad hai jisko jaha mokaa mila vase hi nipta Diya chahe Nokri me ya education patee waqat kabhi bhi kisi ka mulayankan karna hoo toh ek baar apne ko uske jagah khada karke dekhna padega verna 22 percentage and 95 percentage ka terk bhemani legega God ne koi caste nahi banayi sab ek hai ek dusre ka samaan and kamjor ki madad karna hi batlaya hai iershya nahi ji baki kitna hi likhte jao thoda padega

Anonymous
Anonymous
Guest
Reply to  Anurag kumar
10 months ago

Not gonna lie, I many times heard and saw my so called batchmates and friends bitching on my caste and other stuffs. I just don’t reply and do my own work. I’m in 3rd year right now at IIT BHU. By God’s grace in this mid sem exam I scored much greater marks than them who were bitching, yes they are General guys🙂 and I’m from SC category.
(A bit background- my father is a farmer who have 1/4 th of acre of land, handles 6+ court case, I have 2 siblings) only God knows how my family is just existing and facing all this.

Santosh meena
Santosh meena
Guest
10 months ago

ye sab school me hi shuru ho jata h .tab baccha arakshan ka matalab bhi nahi janta .

Dr Rupesh Tiwary
Dr Rupesh Tiwary
Guest
Reply to  Santosh meena
10 months ago

Neither all the candidates who came from reservation commit suicide nor the candidates from other classes do not commit suicide. Those who commit suicide will commit it wherever they will be put into stress. Don’t blaim the environment of such great institutes for these sad incompatible individuals. If the environment is responsible than it is for everyone and so everyone will get the same fate. The cunning people who don’t have any education or level are always looking for these sad moments. These frustrated people must be ignored. Obviously institutes should also look into these sad cases critically to find out the methods to screen out such susceptible individuals so that the people who are looking like vultures for the moment may get the minimum chances.

Viren
Viren
Guest
Reply to  Santosh meena
10 months ago

Hamare bachoo ka bachpana khatam kar diya ha Iss reservation n Kyoki agar general ka bacha top rank nahi layega to na usko admission milega, na job
Isliye General ka bacha Sirf padai aur padai karta ha uss par kitna pressure hota ha kyo reservation wala kaise samje ga jisse free m sab milta ha.
Isko khatam karenge tab jakar hamare bacho ka Bachpan vapis ayega.
i Inko free ki roti batana band karo Inko to saram nahi ha

Pawan
Pawan
Guest
Reply to  Viren
10 months ago

Is there any logic of taking such competitive exams to make a merit list when it is proved for the last 70 +years that a candidate with 22% marks is as “capable” as candidates with 95% marks! It’s mean these tests are farce and they themselves are proving that there is no difference in 22% and 92%. So why should there be competitive exam? Let’s take by lottery and let the children enjoy their childhood. Atleast they will be saved from post-prepation frustration.

Jitender Kaushik
Jitender Kaushik
Guest
Reply to  Santosh meena
10 months ago

Jab sarkar hi aise baar baar puchhti hai ki apni jati btao to tab ye sab rokna chahiye. Job bhi chahiye lakin study bhi nhi krni .merit me aao khud ijjat milegi .

Man singh
Man singh
Guest
10 months ago

Mai khud 1994 bach ka civil engineering student raha hoon ,jo ghor jangal ग्रामीण ilaka sarkari school se hindi medium me toper raha par engineering English medium v raging के वजह से स्टूडेंट maximum students ka back ya year loss ho jata hai ऊपर से जितना भी सामान्य वर्ग से senior student ho ya प्रोफेसर fist questions rahta hai तुम कौन से जाति का हो , entrance me tumahara kitna marks ,sabhi tarah se torchar kiya jata hai जिससे ग्रामीण area ke bacho par jayda parbhav padta hai ,ek bar year back hone par cariyar choupat ho jata hai , in sabhi problem ko dekhte huye government ko solution nikalna होगा

Niteen Kadam
Niteen Kadam
Guest
10 months ago

Kind of discrimination I am also experiencing here at IIT Bombay

Hemin Yadav
Hemin Yadav
Guest
10 months ago

Sach me yeah school se hi shuru ho jata hai hamesha gareeb Aur chhoti cast vale baccho ko dababya jata hai

Brijesh Kumar Mishra
Brijesh Kumar Mishra
Guest
10 months ago

That’s the stupid decision to establish sc,st cell, the fraudulent editor of this article won’t tell you the fact that how much sc,st act is being misused by sc,st members due to which millions of forward community members especially brahman community members have been falsely accused and had to spent years in prisons , obviously the scammer editor don’t wanna discuss the fact that sc,st communities’ cutoffs generally go upto far far less in comparison to general category candidates, i was watchin’ out score card of a obc candidate of gave jee main exam on YouTube in which his actual rank (CRL rank) was more than 28,000 but his obc rank( reserved category rank) was 7,000 infact i was lookin’ at sc,st cut off rank was 3,000 do you believe that general category candidates are compelled to get rank under 5000 to get admission in IIT but on the other hand reserved categories’ candidates get admission into IITs despite if they get rank 50000, what kinda system is this?, Obviously there’s humongous difference in meritocracy between general category candidates & reserved category candidates, no one can deny this fact , tamilnadu & chattisgarh, jharkhand has highest reservation for obc,st,st categories , IF YOU’VE GUTS THEN PUBLISH ARTICLE ‘BOUT HOW SC,ST COMMUNITY IS GRUESOMELY MISUSIN’ SC,ST ACT

Bhagwan
Bhagwan
Guest
10 months ago

India mai caste hi sabkuch hai

Col A K Tiwari
Col A K Tiwari
Guest
10 months ago

This is futile narrative being built to create a society of parasites who celebrate usurping opportunity of ‘better’, mock them and then resort to false complaints under SC ST Act.

I studied at IITD, 70-75. There was NO Caste discussion. I had a few boys, my friends from SC. We came to know of their caste from the notice board as their name appeared among SC scholarships.

They were bright n not so bright like others.

There was NO discrimination at all.

Sumit Dubey
Sumit Dubey
Guest
10 months ago

Reservation is very much required but it should given to needy rather than on basis of caste.If we want to transform india, we should think for abolition of caste system.It is only possible on basis of law.

Pawan
Pawan
Guest
Reply to  Sumit Dubey
10 months ago

You says that reservation is very much required. Is the caste system required in society?

Ravi Shanker
Ravi Shanker
Guest
10 months ago

Jab Sab kuch free hai to kam se kam top institute me merit hi aadhar hona chahiye nhi to complain karna chhod dijiye ki apne desh me acchhe hospital nhi hai teacher nhi hai scientist nhi hai kaam samay par nhi hota mere under yogyta nhi hai aur mai sarkari madad se doctor ya engineer ban jaoo to mai kya yogdan de sakta hoo

Anup N
Anup N
Guest
10 months ago

This will keep happening.
Necessary is to make aware the students of reserved category first and ti make them and their parents capable to defend themselves..
Rest all is jargon.

Anuj roy
Anuj roy
Guest
10 months ago

Agree 💯

Pratiksha Saxena
Pratiksha Saxena
Guest
10 months ago

Bhimrao Ambedkar ne life time ke liye reservation nahi diya tha to ab reservation rakh hi kyu rakha hai ise band karo or dusro baat to iit /neet ke
preparation ke waqt general struggle karta hai use to koi newspaper nahi publish karta hai tb to general ko chahiye 97 percentile to sc ko something 80 ye injustice nahi hai general ke saath mein general ke paas kya zyada energy hoti hai ?

Viren
Viren
Guest
10 months ago

Reservation khatam karo.
General ka bacha bahut mehant kakre top rank leta ha jabki reservation wale free m seat lete ha.

Galat to general walo k sath ho raha ha.
Jo deserve karta ha usko he milna chaiye na ki non deserve candidates ko jo reservation ki bheek par jinda ha sirf.

Mona Verma
Mona Verma
Guest
10 months ago

I wish we could make our children understand that Our country is still developing and hamare bache is desh ka bhavishya hai..Education ka matlab he liberalisation..,aaj bh kuch aise bache hain jo apne parivar ka first child hoga IIT me and wala, genuinely we and our society need to me more inclusive.

Angesh
Angesh
Guest
10 months ago

Reservation promote mediocres. They get into premiere institute inspite of having very low ranking. Then these reserved category candidates don’t understand the subject and lags in result . They don’t accept that they have no merit,only use to blame caste discrimination to hide inefficiency.

Kiran
Kiran
Guest
10 months ago

Jab 11th 12th me saath me padhane wale 2 baccho me se ek ko accha rank hone ke bavjud admission nahi milta to wo kya Karen?? Kya sochega ?? Uske man me hamesha ke liye ye baat rahegi..
Ye aapko chalta hai kya??
Ranking system hi kyun??
College ki rank, usme padhne walo ki rank??
Ek seat ke liye roj 15 ghante se upar padhai karte hai…
Engineering supposed to be most difficult course in world..
admission se pahale Mental status check karna jaruri hai, aur at least 6 months dene chahiye ki wo banda kya wo course asani se kar payega? Nahi to field change kar do.. jo willing hai aur capable hai u se de do.

श्याम परमार
श्याम परमार
Guest
10 months ago

आरक्षण समाज मे भेदभाव का बुनियाद है, यह दिखावे के चलते इंसान को अनिच्छुक प्रोफेशन मे धकेलता है और मजबूर इंसान मनोवैज्ञानिक रुप से टूट जाता है जबकि उसमे कहीं और साबित होने की योग्यता थी पर दिखावे की होड जानलेवा, या तनावग्रस्त रखती है।

RAMAN KUMAR
RAMAN KUMAR
Guest
10 months ago

Ye only iit m hi nahi h, aap kahi jaoge India m to sbse 1st question yhi pucha jata h. Chahe padhai ho ya job.

D guru
D guru
Guest
10 months ago

Aise bade sansthano me aarkshan nahi hona chaiye

Saurabh
Saurabh
Guest
10 months ago

What’s wrong in asking for cast of anyone?
When it come to get benefitted, one always shows the documents and affirm their cast, but if asked publically, it becomes a trauma. What an irony!

Sandeep Pathak
Sandeep Pathak
Guest
10 months ago

जिस वास्तविकता की वजह से और जिस तथ्य के आधार पर तुम कहीं खड़े हो उसे बताने या स्वीकारने में हिचक क्यों? जब संविधान ने अधिकार दिया है तो उस अधिकार का उपयोग किये जाने की वास्तविकता को खल्लम खुल्ला स्वीकारने में हिचक या संकोच होने का कोई औचित्य नहीं. एक बार क्या हजार बार भी कहना पड़े तो यह बताना कि मैंने संविधान प्रदत्त अधिकार का उपयोग किया है और आगे भी करूँगा एक गर्व भरी स्वीकारोक्ति होना चाहिये. जिसे संविधान से आपत्ति हो वह चाहे तो संविधान बदलने का प्रयास कर ले, लेकतंत्र में उसको भी यह अधिकार है.

Nishit kumar Mishra
Nishit kumar Mishra
Guest
10 months ago

IITs mein vacant seats rehti hai..Lekin Admissions nahi liye jaate..Ye sach hai.Lekin isme kuch galat nahi.Wo Extremely talented students ko hi lete hain candidate chahe jis caste ka bhi ho.Maine face kiya hai IITs mein rejection jisme all seats ko vacant hi chor diya gaya.

Kumar ankit
Kumar ankit
Guest
10 months ago

Tumhare utne upar pahunchne ka koi addhikar nhi jab tumhari sankirn mansikta me jaati ko lekar ek chota sa badlaw v nhi aa sakta.
#itihaspadhnashueukardo.
Bahut technology padh liye IIT walo
Tumlog se na nikal payega bharat k samasya ka samadhan
#tumsenahopayega.

Richa sahu
Richa sahu
Guest
10 months ago

But it’s true fact… Because of reservation system in India.. True deserving candidates are failed to taking admission there… And what about those suicides done by general students for not getting admission in iit.. But a reservation candidate getting lower score and rank could join.. 😑😑in education at least the caste system should not be there… The deserving one should get a seat.. Instead of reserving one

The Bitter Truth
The Bitter Truth
Guest
10 months ago

बात बड़ी गंभीर है, पर यह जात पात तब याद नहीं आता जब शून्य अंक लाकर भी सीट मिल जाती है। यह तो होगा ही जब 99 प्रतिशत और 19 प्रतिशत वालों को एक ही तराजू में तौला जाएगा। औसत प्रतिभा वालों को IIT में सीट देकर भी रामानुजम नहीं बनाया जा सकता। मैं जाति प्रथा का समर्थक नहीं हूँ, परंतु यदि जाति प्रथा खत्म करना है तो पहले ये आरक्षण की कुप्रथा बंद करो।

The Bitter Truth
The Bitter Truth
Guest
10 months ago

जिन महोदय ने ये लेख लिखा है, उनकी भी प्रतिभा देख लो, 44 में से 29 पद भरे हैं, तो 25 बचे हैं। महान प्रतिभा वाले लेखक की महान गणितीय क्षमता उल्लेखनीय है।

Dr. Dharmendra
Dr. Dharmendra
Guest
10 months ago

ये समाजिक संरचना एवं सुधार का विषय है, शिक्षा का अधिकार एवं अध्ययन के लिए एडमिशन के मापदंड और व्यवसायिक उपयोगिता का भी विषय है। जिन्दगी के हर पडाव पर तमाम तरह की संघर्ष आती है। आत्महत्या कमजोर परवरिश एवं समाज मे व्याप्त कुरीतियों कि वजह प्रमुख कारण है।

Manvendra
Manvendra
Guest
10 months ago

They only focus on reservation by ignoring their family capabilities, available study materail, study while working in fields.

Pawan
Pawan
Guest
10 months ago

Does IQ has any relation to the Caste of a person?

Does social disability leads to intellectual disability?

We must think from different perspectives. Social disabilities have been due to pervasive caste based division of society but it doesn’t mean that it should be linked to intellectual disability. All human beings have equitable capabilities. No one is inferior. We must have courage to accept it. No one should be treated as subordinate to any one.

Anish
Anish
Guest
10 months ago

Actually bright students from financially week section of the society should be encouraged for higher study and supported financially by the government but not at the cost of merit. Merit should be the sole criteria for admission to higher education Center.

Raksha Tiwari
Raksha Tiwari
Guest
10 months ago

Non-iitian also commit suiside. When the student of general category with double marks of SC/ST candidate didn’t get IIT then? Those students also feel too much pressure. He/ she only thinking about society and curse the reservation system. It is obvious after being capable she/he being pushed. So please don’t relate mental health with caste.

Umesh
Umesh
Guest
10 months ago

जाति पूछने वाले यही वो दोगले लोग हैं जिन्होंने हिन्दू धर्म को कमजोर कर रखा है

Dr. Swadesh Taneja
Dr. Swadesh Taneja
Guest
10 months ago

For English the university must arrange classes for students coming from Hindi medium. I think in school books the technical words in science must be given in English in brackets so that students aspiring for higher studies don’t face problems in future.
Both SC/ ST and general category are right in their plight about admission and aftermath, sharing room may not be a good solution.Besides teachers face difficulties in teaching students who lack strong base in subjects and language. The overall standard of our education if we consider all students is going down. If students are not good in language they can’t succeed.

Ashutosh
Ashutosh
Guest
10 months ago

हमेशा एक तरफ का ही क्यों देखते हो ,,,, ऐसे तो न जाने कितनी बार स्कॉलरशिप में और मेरिट में हमको इसे फेस करना पड़ा है ,,,,,,, हमलोग के साथ तो यह सरकारी कागजों पे किया जाता है तुमसे तो शायद कभी किसी ने पूछा ही होगा ,,,,,,,, इसका ठीक उल्टा होता है असलियत में पॉलीटेक्निक और आईटीआई में रिजर्व्ड कैटेगरी के टीचर भरे पड़े है और वो हमेशा सामान्य और ओबीसी की कुछ जाति के छात्रों से भेदभाव करते हैं मैं पॉलीटेक्निक में पढ़ा हूं और सेशनल मार्क्स देते समय हमेशा हमारे साथ भेदभाव होता था ,,, अगर लिस्ट निकालते तो सबसे नीचे सामान्य कैटेगरी के ही छात्र मिलते थे

Ashutosh
Ashutosh
Guest
10 months ago

ठीक इसका उल्टा होता है प्रदेश की पॉलीटेक्निक और आईटीआई में ,,,,, मैं पॉलीटेक्निक में पढ़ा हूं इन कॉलेजों में रिजर्व्ड कैटेगरी मुख्यत: sc की कुछ विशेष जाति के लेक्चरर भरे पड़े है और इसी जाति के लेक्चरर सामान्य छात्रों को इंटर्नल मार्क्स देते समय भेद भाव करते हैं ,,,,, और इस भेदभाव का सामना सामान्य के साथ साथ ओबीसी की कुछ जातियों के छात्रों को भी करना पड़ता है ,,,, हम जब नंबर्स की लिस्ट देखते थे तो उनमें सबसे नीचे सामान्य श्रेणी के छात्र ही होते थे ।
इसके अलावा हमारे देश स्कॉलरशिप और मेरिट में तो खुलेआम संवैधानिक तरीके से भेदभाव होता है,,,,,
सामान्य वाले को 80% होने पर भी अच्छी ट्रेड नही मिलती और sc st ko 55-60 % पे बेहतरीन ट्रेड मिल जाती है ।
हमारी अगर पूरे कोर्स में फीस की आधी भी स्कॉलरशिप आ जाए तो अचंभा हो जाता है और sc st को हमेशा पूरी फीस से ज्यादा वापिस मिल जाती है ।
हम प्राइवेट नौकरी करके अमीर और सक्षम और sc st IAS IPS बनने के बाद भी कमजोर और छूट के अधिकारी।

Last edited 10 months ago by Ashutosh
MG Morr
MG Morr
Guest
10 months ago

_जिस देश का शिक्षक जातियवादी हो…_ ✍️

_जिस देश का वैज्ञानिक और शाशक पाखंडी हो…_😇

_डाक्टर के क्लिनीक के बाहर नींबू मिर्च हो…_👾

_जीस देश में मैल से बने बच्चे के शरीर से हात्ती का सर जोडने की शस्त्रक्रिय होती हो…_ 🤔

_जीस देश में आदमी के मुंह, बाहू, जांघ और पैर से बच्चे पैदा हो.._ 🤪

 _न्यायालय आस्थाएं के नामपर फैसला सुनाता हो…_🧐

_जहां स्कुल से ज्यादा मंदिर हो…_🥳

_जहा एक इन्सान 6700 जातिया में बांटा हो…_ 🥶

_जीस देश का शाशक फर्जी हो.._ 🤬

_जीस देश का इतिहास छुपाया जाता हो…_😷

_*जहा इन्सान को जानवर से भी बदतर माना जाएगा वह देश विश्वगुरू नहीं बन सकता..!*_ 
👎😎🫥
– Confucious 💐

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