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बीच बहस

‘ये बाबू संविधान बचाईं कि चिराग बाबू के जिताईं समझ में नाही आवत बा’

यह बात बिहार की करीब 60-65 वर्ष की पासी समाज की एक महिला ने कही। जब हम लोग संविधान बचाने और भाजपा को हराने के [more…]

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राजनीति

स्पेशल रिपोर्ट: बिहार में तेजस्वी यादव का नया सियासी प्रयोग भाजपा को डरा तो नहीं रहा?

पटना/सुपौल। राजद माय (मुस्लिम-यादव) कि नहीं बाप (बहुजन, अगड़ा, आधी आबादी और पुअर) की भी पार्टी है। तेजस्वी यादव के इस पूरे बयान को राजद [more…]

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बीच बहस

बिहार निर्दलीयों को संसद भेजता रहा है, क्या पप्पू यादव इस बार भी संसद पहुंचेंगे?

बिहार के सीमांचल जिले पूर्णिया में राजनीतिक सरगर्मी इतनी बढ़ी हुई है कि अगर आप बीच में किसी को टोक देंगे तो कोई भी खेला [more…]

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बीच बहस

जातीय मान-अपमान का इलीट विमर्श

इलीट शब्द का हिंदी अनुवाद अभिजात या सभ्रांत है। उर्दू में इसे अशराफिया कहते हैं। डिक्शनरी ब्रिटैनिका के मुताबिक इसका अर्थ ऐसे लोगों से होता है, [more…]

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राजनीति

बिहार में जाति जनगणना के आंकड़े घोषित, ओबीसी और ईबीसी की आबादी 63 फीसदी और अकेले यादव 14.27 फीसदी

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नई दिल्ली/पटना। बिहार की नीतीश सरकार ने बहुत सालों से प्रतीक्षारत जाति जनगणना के आंकड़ों को घोषित कर दिया है। आंकड़ों के मुताबिक सूबे की कुल [more…]

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ज़रूरी ख़बर

कास्ट सेंशस से मोदी जी आप डरते क्यों हैं: बिलासपुर में राहुल गांधी

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नई दिल्ली। सोमवार को छत्तीसगढ़ में एक भाषण देते हुए कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि “कांग्रेस जनता की सरकार चलाती है लेकिन भाजपा [more…]

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बीच बहस

भागवत की नई भागवत: मुंह में जाति शोषितों का सम्मान बगल में मनु

आरएसएस सरसंघचालक मोहन भागवत ने अपने ताजा बयान से एक नयी भागवत कथा की शुरुआत कर दी है। हाल ही में एक आयोजन में उन्होंने [more…]

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बीच बहस

जाति ही पूछो साधु की, ज्ञान से क्या काम?

किसी ने सही कहा है कि इंसान जन्म के साथ कुछ लेकर नहीं आता। कपड़े तक नहीं। लेकिन पैदा होते ही उसे जाति, धर्म, देश, [more…]

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बीच बहस

पतन के अपने चरम पर पहुंच गयी है हिंदी पट्टी

एक स्वस्थ समाज या देश के लिए चार तत्व ज़रूरी हैं: “ बुद्धिमत्ता, साहस, अनुशासन और न्याय”। (प्लेटो:रिपब्लिक ) आज भारतीय समाज, विशेषतः उत्तर भारतीय [more…]

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राजनीति

मनोज झा-ग़ज़ाला जमील का लेख: सामाजिक न्याय ‘पहचान की राजनीति’ नहीं, धड़कते दिलों की उम्मीद है

भारत में जाति को लेकर मुख्य समझ एक सांस्कृतिक परिघटना के रूप में जाति के विचार पर केंद्रित रही है। जाति और व्यापक सामाजिक न्याय [more…]