पाप आखिर छुपता कहां है? यह बात और है कि पाप छुपाने की कोशिश तो खूब होती है लेकिन एक समय ऐसा आता है पाप की सारी परतें खुलती चली जाती हैं और गुनहगार खुद उसके चंगुल में फंसता चला जाता है। हालांकि अभी यह साफ़ नहीं हुआ है कि बिहार में बीजेपी नेताओं में अचानक शुमार हो चुके डिप्टी सीएम के पद पर बैठे सम्राट चौधरी के कितने अपराध और पाप से जुड़े दस्तावेज जन सुराज वाले प्रशांत किशोर खोलने को तैयार हैं और बीजेपी की मुश्किलें बढ़ाने वाले हैं लेकिन जिस अंदाज में प्रशांत किशोर सम्राट चौधरी के ऊपर हमला कर रहे हैं उससे तो साफ़ है कि सम्राट चौधरी अब बच नहीं सकते।
उनकी कथित फर्जी डिग्री की कहानी हो यह फिर उम्र से जुड़े सवाल और फिर चर्चित शिल्पी गौतम हत्या कांड की बात। अगर मामला अदालत में पहुँचता है तो सम्राट चौधरी की सिर्फ मुश्किलें ही नहीं बढ़ेंगी, उनकी राजनीति भी ख़त्म हो जाएगी और बीजेपी के साथ नीतीश बाबू का इकबाल भी ध्वस्त हो जाएगा।
आगे बढ़ें इससे पहले प्रशांत किशोर ने जो कहा है उस पर गौर फरमाने की जरूरत है। जन सुराज के नेता प्रशांत किशोर ने बिहार चुनाव की तैयारी के बीच सम्राट चौधरी और अशोक चौधरी पर अनगिनत आरोप लगाए हैं। सच तो यह है कि राजनीतिक रणनीतिकार से नेता बने और जन सुराज के प्रमुख प्रशांत किशोर ने 2025 के विधानसभा चुनावों से पहले उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और जदयू मंत्री अशोक चौधरी पर कई सनसनीखेज आरोप लगाकर बिहार में हलचल मचा दी है।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, किशोर ने न केवल फंडिंग से जुड़े सवालों का बचाव किया, बल्कि यह भी खुलासा किया कि उन्होंने पिछले तीन वर्षों में अपने राजनीतिक परामर्श कार्य से ₹241 करोड़ कमाए हैं। उन्होंने अपनी आय के स्रोतों, चुकाए गए करों और दिए गए दान का ब्यौरा दिया और बिहार के शीर्ष नेताओं पर भ्रष्टाचार और आपराधिक आरोपों का आरोप लगाया।
किशोर ने आरोप लगाया कि उप-मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी छह हत्या के मामलों में आरोपी हैं, जिनमें कुख्यात तारापुर कांड (संख्या 44/1995) भी शामिल है। उन्होंने उनकी तत्काल बर्खास्तगी और गिरफ्तारी की मांग की। पीके ने कहा, “सम्राट चौधरी भ्रष्टाचार और ‘जंगल राज’ की बात करते हैं, लेकिन खुद उन पर कई हत्याओं के आरोप हैं। ऐसे व्यक्ति को उच्च पद पर नहीं रहना चाहिए।”
सम्राट चौधरी पर प्रशांत किशोर के आरोप यहाँ तक ठीक लग रहे थे लेकिन जब उन्होंने 25 साल पहले की चर्चित घटना का उल्लेख करते हुए उसके साथ सम्राट चौधरी का नाम जोड़ा तो पटना की राजनीति अचानक गर्म हो गई। शिल्पी -गौतम बलात्कार और हत्या कांड की याद फिर से ताजा हो गई। उन्होंने चौधरी का नाम शिल्पी गौतम बलात्कार और हत्या मामले से जोड़ते हुए पूछा कि क्या उप-मुख्यमंत्री की सीबीआई द्वारा जाँच की गई है और क्या उनकी फोरेंसिक जाँच की गई है। किशोर ने आगे कहा कि अगर प्रधानमंत्री मोदी कार्रवाई नहीं करते हैं, तो उनकी पार्टी अदालत जाएगी।
याद करा दें कि 3 जुलाई, 1999 को पटना के फ्रेजर रोड इलाके में एक कार के अंदर दो लाशें अर्धनग्न अवस्था में मिली थीं। दोनों 2 जुलाई से गायब थे। लाश मिलने की खबर ने सनसनी फैला दी। कार में मिली लाश थी- शिल्पी जैन और गौतम सिंह की। प्रशांत किशोर इसी हत्याकांड की बात कर रहे थे और बोले- शिल्पी-गौतम केस में था सम्राट चौधरी का नाम।
प्रशांत किशोर ने कहा कि इस हत्याकांड में भी सम्राट चौधरी से सीबीआई ने पूछताछ की थी। और इस हत्याकांड में भी सम्राट चौधरी नामजद अभियुक्त थे। प्रशांत किशोर के इस बयान के बाद बीजेपी की मुश्किलें कुछ ज्यादा ही बढ़ गई हैं। हालांकि सम्राट चौधरी ने इन आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि जिस राकेश कुमार का नाम इस मामले में आया था, वह आइसक्रीम बेचता था।
बता दें कि शिल्पी जैन पटना वीमेंस कॉलेज में पढ़ती थीं। उनकी मॉडलिंग में रुचि थी। मिस पटना का खिताब भी जीत चुकी थी। वह देखने में सुन्दर भी थीं और स्टाइलिश भी थीं। वहीं गौतम एक एनआरआई डॉक्टर के बेटे थे, राजनीति में आना चाहते थे। साधु यादव के करीबी थे। उन्हें लगा था कि साधु यादव उन्हें टिकट दिला देंगे। लेकिन बाद में साधु यादव ही गौतम की हत्या के आरोपी बने।
2 जुलाई, 1999 को जब शिल्पी कंप्यूटर क्लास जा रही थी, तभी उसे रास्ते से किडनैप कर लिया गया। उसे बताया गया कि गौतम एक गेस्ट हाउस में उसका इंतजार कर रहा है। लेकिन गेस्ट हाउस में गौतम नहीं था। मीडिया रिपोर्ट्स से पता चलता है कि गौतम को जब इस बात की जानकारी मिली तो वह गेस्ट हाउस पहुंचा। वहां आरोपियों ने शिल्पी का रेप किया और गौतम के साथ मारपीट की। बाद में दोनों की लाश को गैरेज में खड़ी मारुति कार में रख दिया गया। शिल्पी ने गौतम की टीशर्ट पहन रखी थी और गौतम ने सिर्फ पैंट।
इस घटना ने कई सालों तक बिहार की राजनीति को गर्म रखा। सीबीआई की जांच शुरू हुई। शुरुआती जांच में पता चला कि शिल्पी के साथ कई लोगों ने रेप किया था। जबकि गौतम के शरीर पर चोट के निशान थे। जिससे हत्या की आशंका जताई जा रही थी। लेकिन इस घटना को आत्महत्या बताने की कोशिश हुई।
6 दिन बाद शिल्पी के परिवार ने सामने आकर इसे हत्या बताया। बाद में मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई। सीबीआई ने साधु यादव से डीएनए सैंपल मांगा लेकिन साधु यादव ने कभी सैंपल नहीं दिया। हालांकि साधु यादव कहते हैं कि उनसे कभी सैंपल नहीं मांगा गया था। 2003 में सीबीआई ने इसे आत्महत्या मानते हुए क्लोजर रिपोर्ट फाइल की।
हालांकि परिवार हमेशा इसे हत्या मानता रहा। 2006 में शिल्पी के भाई प्रशांत जैन ने इस केस को दुबारा खुलवाने की कोशिश की लेकिन प्रशांत का अपहरण हो गया। इसके बाद परिवार ने कोशिशें बंद कर दी। हर बार चुनाव में इस घटना को भुनाया जाता है। बीजेपी हमेशा लालू राज पर जंगलराज का आरोप लगाती रहती है। अब प्रशांत किशोर ने इस मामले में सम्राट चौधरी का नाम घसीटा है।
अब क्या होगा यह देखने की बात है। लेकिन प्रशांत किशोर यही नहीं रुके। उन्होंने जदयू नेता अशोक चौधरी पर भी बड़ा हमला किया है। पीके ने मंत्री अशोक चौधरी पर भी हमला करते हुए वैभव विकास ट्रस्ट पर सवाल उठाए, जिसके बारे में उन्होंने कहा कि अशोक चौधरी की बेटी की सगाई के बाद से ट्रस्ट को लगभग ₹100 करोड़ मिले हैं। उन्होंने इस बात पर पारदर्शिता की मांग की कि पिछले साल इतनी बड़ी धनराशि कैसे जुटाई गई और कैसे बड़े पैमाने पर ज़मीनें खरीदी गईं।
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि अशोक चौधरी ₹20,000 करोड़ से ज़्यादा के ठेकों पर 5% कमीशन ले रहे थे, और हाल ही में एक इंजीनियर को घर में नकदी जलाते हुए पकड़े जाने की घटना को रिश्वत के सबूत के तौर पर पेश किया। किशोर ने चेतावनी दी, “अगर वह पाँच दिनों के भीतर इस्तीफ़ा नहीं देते हैं, तो हम विरोध-प्रदर्शन शुरू करेंगे और राज्यपाल से संपर्क करेंगे। अन्यथा, उन्हें ₹500 करोड़ का मानहानि नोटिस मिलेगा।”
इन आरोपों ने बिहार में राजनीतिक भूचाल ला दिया है और सत्तारूढ़ गठबंधन से जवाबदेही की माँग की जा रही है। विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले किशोर की प्रेस कॉन्फ्रेंस ने राज्य में भ्रष्टाचार और शासन पर बहस को और गहरा कर दिया है।
अब चुनाव से पहले प्रशांत किशोर के इस हमले से लग रहा है कि इन दोनों नेताओं की राजनीतिक बलि चढ़ सकती है। इनकी राजनीति ध्वस्त हो सकती है और ऐसा हुआ तो आगामी चुनाव पर इसका बड़ा असर देखने को मिल सकता है और सबसे बड़ी बात यह कि जन सुराज को भले ही जो लाभ -हानि हो लेकिन प्रशांत किशोर एक हीरो के रूप में स्थापित हो सकते हैं।
(अखिलेश अखिल वरिष्ठ पत्रकार हैं।)