Subscribe for notification

बीएचयू में पितृसत्ता के खिलाफ छात्राओं का आंदोलन

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में पितृसत्ता के खिलाफ लड़कियों का एक और जोरदार आंदोलन हुआ। सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने 14 सितंबर की शाम से प्रो. एसके चौबे के खिलाफ बीएचयू के सिंह द्वार पर धरना दिया। मामला यौन उत्पीड़न के आरोपी जीव विज्ञान विभाग के प्रो. एसके चौबे की बहाली का है। गौरतलब है कि अक्टूबर 2018 में शैक्षणिक टूर के दौरान प्रोफेसर ने लड़कियों के साथ अश्लील हरकतें की थी। 36 लड़कियों ने टूर से वापस आकर उनके खिलाफ लिखित रूप में शिकायत की थी।
विश्वविद्यालय के आईसीसी  यानी इंटरनल कम्प्लेंट्स कमिटी ने प्रोफेसर एसके  चौबे को दोषी पाया और अपनी रिपोर्ट विश्वविद्यालय के कार्यकारी परिषद के समक्ष रखी। जांच के दौरान आरोपी प्रोफेसर को निलंबित कर दिया गया था। लेकिन जुलाई 2018 में कुलपति की अध्यक्षता वाली एग्जेक्यूटिव कॉउन्सिल ने  उनका निलंबन वापस लेते हुए उन्हें प्रोफेसर पद पर पुनः बहाल कर दिया। सज़ा के नाम पर बस उन्हें भविष्य में कोई भी प्रशासनिक पद नहीं दिया जाएगा या वह अब कुलपति भी नहीं बन सकते। बहाली के बाद प्रोफेसर ने अगस्त से क्लास लेनी शुरू भी कर दी। जिससे छात्राओं में प्रशासन के प्रति गुस्सा उबल पड़ा और छात्राओं ने 28 घण्टे से भी अधिक सिंह द्वार पर अंदोलन किया।
एक तरफ जहां बीएचयू  प्रशासन लड़कियों को सुरक्षा के नाम पर रात 10 बजे के बाद उनके हॉस्टलों में कैद कर देता है वहीं एक यौन उत्पीड़न के आरोपी को लड़कियों की क्लास लेने की इजाजत दे देता है।
पूरे मामले में बीएचयू प्रशासन का सामंती पितृसत्तात्मक चरित्र खुलकर सामने आया है जहां वाईस चांसलर समेत सभी अधिकारी खुले तौर पर यौन अपराधी को संरक्षण दे रहे थे। आंदोलन की मांगे में- आरोपी प्रोफेसर को तत्काल बर्खास्त कर उनपर कानूनी कर्रवाई करने, छात्राओं की सुरक्षा के लिए कैंपस में यूजीसी की  गाइडलाइन के अनुसार GSCASH( Gender Sensitisation Committee Against Sexual Harrassment) का गठन करने, कैंपस में यौन उत्पीड़न के लंबित मामलों का जल्द से जल्द कार्रवाई करने के साथ ही फ़र्ज़ी एफआईआर के आधार पर डिबार किये गए छात्र-छात्राओं का डिबार वापस लेने की थी।
हालांकि प्रशासन ने किसी भी मांग को पूरी तरह से नहीं माना। कार्रवाई के नाम पर प्रोफेसर एसके चौबे को लंबी छुट्टी पर भेज दिया गया है। एग्जीक्यूटिव कॉउन्सिल अपने निर्णय पर पुनर्विचार करेगी। उसके बाद ही वो किसी नतीजे पर पहुंचेगी। GSCASH की मांग मानने से वाइस चांसलर ने साफ तौर पर इनकार कर दिया। लड़कियां इसे अपनी आधी जीत मान रहीं हैं। जबतक कैंपस में यौन उत्पीड़न के लंबित सभी मामलों में कार्रवाई नहीं होती, प्रोफेसर एसके  चौबे को बर्खास्त नहीं किया जाता, कैंपस में GSCASH लागू नहीं हो जाता तब तक इसके खिलाफ आंदोलन चलता रहेगा। फिलहाल आंदोलन को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। मांगे पूरी नहीं होने पर कैंपस में दोबारा बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
(आकांक्षा बीएचयू में एमए. राजनीतिशास्त्र की छात्रा हैं।) 

Donate to Janchowk!
Independent journalism that speaks truth to power and is free of corporate and political control is possible only when people contribute towards the same. Please consider donating in support of this endeavour to fight misinformation and disinformation.

Donate Now

To make an instant donation, click on the "Donate Now" button above. For information regarding donation via Bank Transfer/Cheque/DD, click here.

This post was last modified on September 21, 2019 8:08 pm

Share