Mon. May 25th, 2020

हैदराबाद जैसे रांची के मामले में आरोपी को सीबीआई कोर्ट ने सुनाई फांसी की सजा

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सीबीआई की स्पेशल कोर्ट के जज एके मिश्र ने झारखंड की राजधानी रांची की इंजीनियरिंग की 19 वर्षिया छात्रा से बलात्कार और हत्या मामले के मुख्य आरोपी राहुल राज को फांसी की सजा सुनाई है। जांच एजेंसियों को ढाई साल तक चकमा देने के बाद राहुल राज सीबीआई के हत्थे चढ़ा था।

19 महीने की सुनवाई के बाद सीबीआई की विशेष अदालत के जज एके मिश्रा ने 20 दिसंबर को राहुल को दोषी करार दिया और 21 दिसंबर को उसे फांसी की सजा सुना दी। अदालत ने जुर्माना भी लगाया। इस मामले में सीबीआई ने 19 सितंबर 2019 को आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी और 25 अक्टूबर 2019 को राहुल के खिलाफ आरोप तय किए गए थे।

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जज ने अपने फैसले में कहा, ‘इंजीनियरिंग की छात्रा के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले में सीबीआई द्वारा दायर आरोप पत्र, दस्तावेज, गवाहों और दोनों पक्षों की ओर से पेश की गई दलीलों के आधार पर राहुल कुमार उर्फ राहुल राज को दोषी करार दिया जाता है। उसे घर में घुस कर दुष्कर्म करने, हत्या करने और सुबूत मिटाने के लिए आईपीसी की धारा 302, 376, 449 और 201 के तहत दोषी पाया गया।’

उल्लेखनीय है कि रांची के बूटी मोड़ स्थित एक मकान में 16 दिसंबर 2016 की रात  रामटहल चौधरी इंजीनियरिंग कॉलेज की छात्रा की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई थी। उस के शव को भी जला दिया गया था। 16 दिसंबर को छात्रा के पिता ने सदर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। घटना के बाद पूरी रांची आक्रोशित हो उठी थी। 17 दिसंबर को रांची के लोग इंसाफ के लिए सड़कों पर उतर आए। महीनों तक रांची के नागरिक सड़कों पर निकल कर अपनी बेटी के साथ हुई घटना के लिए न्याय की मांग करते रहे।

पुलिस और सीआईडी मामले का खुलासा करने में पूरी तरह विफल रही। जन दबाव में सरकार ने आखिरकार यह मामला सीबीआई को सौंपा। राज्य सरकार ने सीबीआई जांच की अनुशंसा की। सीबीआई ने 28 मार्च 2018 को प्राथमिकी दर्ज करने के बाद अनुसंधान की जिम्मेदारी परवेज आलम को दी। सीबीआई ने अपराधी राहुल राज का पता लगा लिया।

बता दें कि सीबीआई की जांच में राहुल के कई नाम सामने आए। 30 वर्षीय राहुल कुमार, उर्फ राहुल राज, उर्फ राज श्रीवास्तव, उर्फ रॉकी राज, उर्फ आर्यन, उर्फ अंकित होने का खुलासा हुआ। यह पहचान छिपाने में माहिर था। यह बेउर जेल में था, जहां यह एक श्राद्ध में शामिल होने के लिए पेरोल पर छोड़े जाने के दौरान भाग गया था। सीबीआई के एसपी नागेंद्र प्रसाद ने बताया कि जिस समय केस सीबीआई के पास आया, उस समय केस के बारे में कोई सुराग नहीं था। बिल्कुल ब्लाइंड मर्डर था। कुछ भी पता नहीं था। किसने किया है? कहां किया है? कैसे किया है?

फॉरेंसिक साक्ष्य में डीएनए रिपोर्ट के आधार पर काफी छानबीन की गई। अनुसंधानकर्ता और रांची सीबीआई की टीम ने बेहतर काम किया और यह पुष्ट करने में सफल रही कि राहुल ने घटना को अंजाम दिया है। हमारे विशेषज्ञों ने भी सहयोग किया। तेजी से स्पीडी ट्रायल हुआ। उन्होंने कहा कि सुकून है कि हमलोग पीड़ित परिवार को न्याय दिला सके। फैसला सुनाते हुए जज ने कहा कि सभी तथ्यों को देखने के बाद मुझे यह लगता है कि यह मामला रेयरेस्ट ऑफ द रेयर केस की श्रेणी में आता है।

न्याय के लिए फांसी की सजा जरूरी है। इससे कम कोई भी सजा पर्याप्त नहीं होगी। इस मामले में जो प्रताड़ना हुई है और इससे समाज पर जो असर पड़ा, ये कुछ ऐसे कारण हैं, जो यह दर्शाते हैं कि दोषी को फांसी की सजा दी जाए। जज ने कहा कि इंजीनियरिंग की छात्रा का दुष्कर्म और हत्या आकस्मिक नहीं है, बल्कि पूरी प्लानिंग के तहत किया  गया अपराध है। क्राइम करने के बाद बॉडी को लुब्रिकेंट डालकर जलाया गया है, जो बर्बरता को दिखाता है। दुष्कर्म में जो तरीका अपनाया गया है, वह बताता है कि दोषी कितनी जघन्य मानसिकता वाला है। यह हाई लेवल क्राइम है। समाज और सोसाइटी की चेतना को इस जघन्य वारदात से सदमा लगा है।

जज ने कहा कि पटना में राहुल ने नाबालिग का रेप किया था। टीआईपी में पीड़िता ने इसे पहचाना था। चोरी सहित कई मामले इसके ऊपर हैं। यह पहचान छिपाए रखता था। अपराधी बेउर जेल में रह चुका है। वहां से श्राद्ध में पेरोल पर जाने के दौरान भाग गया था। इससे पता चलता है कि यह सीरीज ऑफ क्राइम में संलिप्त रहा है और इसके सुधार की कोई गुंजाइश नहीं है।

सीबीआई के सीनियर पीपी राकेश प्रसाद ने कहा कि जांच के दौरान डीएनए टेस्ट में पाया गया कि घटना का अभियुक्त राहुल राज ही है। कोर्ट में उनकी ओर से दलील दी गई कि राहुल राज ने पटना में भी एक नाबालिग के साथ रेप किया था। मामला वहां चल रहा है। चोरी वगैरह के कई मामले भी इस पर दर्ज हैं। यह आदतन अपराधी है। इसने बर्बर तरीके से घृणित अपराध को अंजाम दिया है। इसलिए राहुल को फांसी की सजा दी जाए।

बचाव पक्ष के अधिवक्ता विनोद कुमार सिंह ने कहा कि फांसी तो रेयर ऑफ द रेयरेस्ट केस में ही दी जाती है। सजा से पूर्व सुनवाई के दौरान कोर्ट से आग्रह किया था कि राहुल की उम्र कम है। इसे ध्यान में रखते हुए सजा में रियायत दी जाए। उन्होंने कहा कि कोर्ट का आदेश देखने के बाद अपील में हाइकोर्ट जाएंगे।

सीबीआई के विशेष न्यायाधीश अनिल कुमार मिश्रा ने अपने 95 पेज के फैसले में कहा कि राहुल को तब तक फंदे पर लटकाया जाए, जब तक इसकी मौत न हो जाए। नियम के तहत अब सीबीआई कोर्ट की रिपोर्ट के आधार पर अगले 15 दिनों में हाइकोर्ट सजा को कन्फर्म करेगा। फिर आगे की कार्रवाई चलेगी। इस संबंध में सीबीआई कोर्ट की ओर से हाइकोर्ट को रिपोर्ट भेज दी गई है। हाइकोर्ट निचली अदालत की कार्रवाई से संतुष्ट होने के बाद फांसी की सजा बरकरार रख सकता है। अन्यथा सजा को उम्रकैद में तब्दील कर सकता है। हाइकोर्ट अगर फांसी की सजा बरकरार रखता है, तो सजायाफ्ता अपनी सजा कम कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट भी तमाम बिंदुओं को देखने के बाद फांसी की सजा बरकरार रख सकता है या कम कर उम्र कैद में परिवर्तित कर सकता है। अगर फांसी की सजा बरकरार रखता है, तो बचाव पक्ष सुप्रीम कोर्ट में ही फिर से रिव्यू पिटीशन डाल सकता है। रिव्यू पिटीशन में भी अगर सजा में रियायत नहीं मिलती है, तो बचाव पक्ष राष्ट्रपति के यहां दया याचिका दे सकता है।

(रांची से जनचौक संवाददाता विशद कुमार की रिपोर्ट।)

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