Monday, August 8, 2022

भाजपा क्या छत्तीसगढ़ में तख्तापलट की कोशिश कर रही है

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में इन दिनों सूर्यकांत तिवारी सुर्खियों में हैं। छत्तीसगढ़ के कोयला कारोबारी सूर्यकांत तिवारी ने रायपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आईटी छापे को लेकर कई बड़े खुलासे किए। आयकर छापे के आधार पर सूर्यकांत तिवारी ने दावा किया है कि छत्तीसगढ़ में सत्ता पलट की साजिश रची जा रही थी। उन्होंने बीजेपी और आयकर विभाग पर आरोप लगाते हुए कहा कि “मुझ पर आयकर विभाग ने जबरदस्त दवाब बनाया कि मैं सीएम भूपेश बघेल की उप सचिव सौम्या चौरसिया का नाम छापे में ले लूं। मुझ पर आयकर विभाग के कुछ अफसरों ने दबाव बनाया कि मैं प्रदेश के 40-45 विधायकों की सूची बनाऊं”। सूर्यकांत तिवारी ने दावा किया कि “उन्हें आयकर विभाग के अफसरों ने कहा कि आप चालीस विधायकों की लिस्ट बनाइए उसके बाद विपक्ष के विधायकों के सहयोग से प्रदेश की सरकार बदल दी जाएगी”

सूर्यकांत तिवारी ने कहा कि “मुझे छत्तीसगढ़ का एकनाथ शिंदे बनाने की बात कही गई। उन्होंने कहा कि मुझे सीएम तक बनने का ऑफर दिया गया। इसके लिए आयकर विभाग के अफसरों ने आईटी छापे के नाम पर साम-दाम दंड भेद अपनाया” सूर्यकांत तिवारी ने आईटी रेड के बाद पहली बार चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि प्रदेश में सत्ता परिवर्तन की साजिश रची जा रही है। इसके लिए आईटी विभाग का इस्तेमाल किया गया”

तिवारी यहीं नहीं रूके। उन्होंने कहा कि मैं एक कारोबारी हूं, अपराधी नहीं हूं।आयकर विभाग की टीम जब 30 जून को मेरे ठिकाने पर छापे के लिए आई तो अफसरों ने मुझे पीटा। इसके बाद मुझे आयकर के अफसरों ने गलत बयान देने के लिए उकसाया। मैंने गलत बयान नहीं दिया। सूर्यकांत तिवारी ने दावा किया कि वह महात्मा गांधी को मानते हैं और छत्तीसगढ़िया आदमी हैं।

सूर्यकांत तिवारी ने कहा कि मैं “कई वर्षों से कोयला का कारोबार करता आया हूं। मेरे राजनेताओं से संबंध हैं।अभी के सरकार और इसके पहले की सरकार में भी मेरे संबंध रहे हैं। अगर मुझपर कोई टैक्स की वसूली निकलती है तो मैं टैक्स दे दूंगा। कानूनी रूप से अपनी लड़ाई लड़ंगा मगर आयकर विभाग को कार्रवाई के नाम पर मुझे प्रताड़ित करने का हक नहीं है”। उन्होंने दावा किया कि उन्हें सत्ता परिवर्तन के लिए मोहरा बनाया जा रहा है।

सूर्यकांत तिवारी ने आयकर विभाग पर आरोप लगाने के बाद पूर्व सीएम रमन सिंह पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि “किसी के यहां आयकर विभाग का छापा पड़ जाए तो वह क्रिमिनल और अपराधी नहीं हो जाता है। रमन सिंह मुझे गिरफ्तार करने की मांग कर रहे हैं। मैं जेल जाने को तैयार हूं लेकिन मैं जेल के जिस सेल में रहूंगा बगल की सेल में रमन सिंह को भी रहना होगा”।

क्या हुआ था?

कोयला कारोबार से जुड़े सूर्यकांत तिवारी के रायपुर और महासमुंद के ठिकानों पर आयकर विभाग ने दबिश दी थी। इस कार्रवाई में आयकर विभाग की तरफ से कहा गया कि उन्हें जांच में 200 करोड़ रुपये से ज्यादा के कलेक्शन के सबूत मिले हैं। आयकर विभाग को जांच के दौरान 9.5 करोड़ रुपये से अधिक की अघोषित नकदी और 5 करोड़ के आभूषण भी मिले थे। जिसे आयकर विभाग ने जब्त कर लिया था। आयकर विभाग की इस कार्रवाई के बाद बीजेपी लगातार कांग्रेस पर हमलावर थी। बीजेपी ने इस मुद्दे पर सीएम भूपेश बघेल से इस्तीफे की मांग भी की थी।

बता दे कि छत्तीसगढ़ में आयकर विभाग  की छापेमारी के बाद खलबली मच गई है। कांग्रेस और बीजेपी में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। एक नाम को लेकर सबसे ज्यादा खलबली है, उस शख्स का नाम सूर्यकांत तिवारी है। सूर्यकांत तिवारी की पकड़ हर खेमे में है। कहा जाता है कि वह सत्ताधारी दल के ‘संकटमोचक’ भी हैं। छापे के बाद बीजेपी के कुछ नेताओं ने सूर्यकांत की तस्वीर सीएम भूपेश बघेल के साथ शेयर की है। इसके बाद जवाब में कांग्रेस की तरफ से पूर्व सीएम रमन सिंह के साथ तस्वीर शेयर की गई है।

द सूत्र ने सूर्यकांत तिवारी को लेकर लिखा है कि सत्ता जगत में खासा रसूख रखने वाले सूर्यकांत तिवारी मूल रूप से महासमुंद के रहने वाले हैं। पूर्व में उनकी पहचान कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे विद्याचरण शुक्ल के समर्पित कार्यकर्ता के रूप में रही है। बताते हैं कि विद्याचरण उन्हें बेटे जैसा स्नेह करते थे। कालांतर में वे अजीत जोगी के साथ नजर आने लगे। जानकार बताते हैं कि 2003 में प्रदेश में सत्ता की बाजी पलटने के बाद वे बीजेपी सरकार में दो प्रभावशाली मंत्रियों की नजदीकी हासिल करने में भी कामयाब रहे हैं। सूर्यकांत तिवारी उस दौर में राजधानी के एक प्रभावशाली व्यवसायी के साथ भी खूब देखे गए हैं। यह व्यवसायी विधानसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं। 15 सालों के शासन के बाद जब प्रदेश में कांग्रेस सरकार आई तो फिर से सत्ता के गलियारों में सूर्यकांत का नाम सूरज की तरह चमकने लगा।

सौम्या चौरसिया कौन हैं?

द सूत्र  ने सौम्या चौरसिया को लेकर लिखा है कि राज्य प्रशासनिक सेवा की वही अधिकारी हैं जो छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल की सरकार बनते ही मुख्यमंत्री सचिवालय में बतौर उप सचिव नियुक्ति हुई थीं। सरकार में अपने जबरदस्त दखल और रसूख के चलते सौम्या चौरसिया देखते ही देखते शासन-प्रशासन की प्रमुख धुरी बन गईं। 

छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक व्यवस्था को समझने वाले जानते हैं कि सरकार में सौम्या चौरसिया इस कदर प्रभावी हैं कि मामला चाहे सरकार से जुड़ा हो अथवा राजनीति से अंतिम फैसला डिप्टी सेक्रेटरी चौरसिया की हरी झंडी मिलने के बाद ही होता है। हालत ये है कि कांग्रेस सरकार में कई वरिष्ठ आईएएस अफसरों का कद भी राज्य प्रशासनिक सेवा की अधिकारी सौम्या के आगे बौना नजर आता है। राज्य में छोटे- बड़े अधिकारियों की पोस्टिंग से लेकर प्रदेश सरकार की नीति-कार्यक्रमों से संबंधित फैसले भी उनकी मंजूरी से ही फाइनल होते हैं। यह माना जाता है कि सौम्या चौरसिया के केंद्रीय एजेंसियों के निशाने पर होने की वजह भी उनका मुख्यमंत्री बघेल का सर्वाधिक विश्वासपात्र होना ही है।

बता दें कि साल 2020 में भी छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के करीबी समझे जाने वाले सहायकों, राजनीतिकों, नौकरशाहों और व्यवसायियों के परिसरों पर आयकर विभाग के तलाशी अभियान चले थे। जिसके बाद राजधानी रायपुर की सियासी गर्मी तेजी से बढ़ी थी और पूरा प्रकरण केंद्र बनाम राज्य में बदल गया था।

फरवरी 2020 में छह दिन तक आयकर विभाग का तलाशी अभियान चला था। उस दौरान रायपुर के नवनिर्वाचित मेयर एजाज ढेबर, पूर्व मुख्य सचिव तथा रेरा के अध्यक्ष विवेक ढांड, उद्योग विभाग के निदेशक अनिल टुटेजा और ब्यूटी पार्लरों की शृंखला चलाने वाली उनकी पत्नी मीनाक्षी, शराब कारोबारी अमोलक भाटिया, आबकारी अधिकारी अरुणपति त्रिपाठी, कांग्रेस के कोषाध्यक्ष और मुख्यमंत्री सचिवालय में उपसचिव सौम्या चौरसिया शामिल थीं। उस समय यह तलाशियां पूरी गोपनीयता के साथ आयकर विभाग की दिल्ली शाखा ने ली थी और कार्रवाई शुरू होने के पहले तक उसकी स्थानीय जांच इकाई को कुछ नहीं पता था।

(छत्तीसगढ़ से जनचौक संवाददाता तामेश्वर सिन्हा की रिपोर्ट।)

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