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‘लॉ एंड आर्डर’ पर लॉकडाउन: योगी राज में अपहरणकर्ताओं के हौसले बुलंद

लखनऊ। कानपुर, गोंडा, गोरखपुर समेत यूपी में अपहरणकर्ताओं के हौसले बुलंद हैं। आम आदमी समाज विरोधी तत्वों से त्रस्त है। वहीं दूसरी ओर पुलिस रसूखदारों और दबंगों की सेवा-टहल करने में लगी है। राजधानी के अलीगंज से भी लखीमपुर खीरी के सुजीत की गुमशुदगी की खबर सामने आ रही है। एक के बाद एक हुई अपहरण की घटनाओं पर रिहाई मंच ने चिंता व्यक्त करते हुए प्रदेश सरकार के अपराध पर ज़ीरो टॉलरेंस के दावे को निराधार और झूठा प्रचार बताया। योगी सरकार में पुलिस को बेगुनाहों पर जुल्म ढाने के लिए खुला छोड़ दिया गया है।

रिहाई मंच महासचिव राजीव यादव ने कहा कि कानपुर, गोंडा और यहां तक कि मुख्यमंत्री के गृह जनपद गोरखपुर में अपहरण की घटनाएं बताती हैं कि अपराधी बेखौफ हैं और सरकार कानून का राज स्थपित करने में नाकाम है। गोंडा से आठ वर्षीय बालक नमो गुप्ता और गोरखपुर से 14 वर्षीय बलराम गुप्ता का दिन दहाड़े अपरहण ने बता दिया कि सूबे में बहन-बेटियों के बाद बच्चे तक सुरक्षित नहीं हैं। योगी जी से जब उनका गृहजिला नहीं संभल रहा है, तो वे प्रदेश क्या संभाल पाएंगे।

कानपुर के संजीत यादव को 22 जून को अपहरणकर्ताओं ने मात्र तीन किलोमीटर के फासले पर रखा था। पुलिस ने संजीत के परिजन की एफआईआर दर्ज करने में तीन दिन लगा दिए। खबरों के अनुसार संजीत के परिजनों से अपहरणकर्ताओं ने 29 जून और 13 जूलाई के बीच फिरौती की रकम के लिए 26 बार फोन किया। पुलिस को इस बात की भी भनक नहीं लगी कि संजीत की तो पहले ही हत्या की जा चुकी है। हद तो यह है कि पुलिस ने फिरौती के लिए परिवार को न केवल तैयार किया बल्कि उसकी रकम भी दिलवा डाली। कानपुर देहात के भोगनीपुर थाना क्षेत्र के बृजेश पाल के अपहरण की सूचनाएं भी आईं हैं। 17 जुलाई को उसके न मिलने के बाद परिजनों को 20 लाख की फिरौती की काल आई। 28 जुलाई को सामने आया कि उसकी भी अपहरणकर्ता ने हत्या कर दी।

24 जूलाई को गोंडा से नमो गुप्ता और गोरखपुर से बलराम गुप्ता का दिनदहाड़े अपहरणकर्ताओं ने अपहरण कर लिया। इन सभी मामलों में अपहरणकर्ताओं ने फिरौती की रक़म मांगने के लिए मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया। इसके बावजूद अपहरणकर्ताओं ने पकड़ में आने से पहले बलराम गुप्ता की भी हत्या कर दी।

नमो गुप्ता के पड़ोसी इस बात से हैरान थे कि शुक्रवार होने की वजह से भारी पुलिस बंदोबस्त के बीच अपहरण की घटना भीड़-भाड़ वाले क्षेत्र में कैसे अंजाम दी गई। नमो गुप्ता को सकुशल अपहरणकर्ताओं के चंगुल से छुड़ाने में एसटीएफ की टीम कामयाब रही लेकिन यह सवाल अपनी जगह कायम है कि प्रदेश को अपराधमुक्त बनाने के नाम पर सैकड़ों एनकाउंटर का हासिल क्या रहा?

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This post was last modified on August 1, 2020 8:35 pm

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