Saturday, February 4, 2023

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उत्तराखंड में दिखा जातिवाद का बर्बर चेहरा

देहरादून/अल्मोड़ा। उत्तराखंड पढ़े-लिखे लोगों का राज्य है। यहां न सिर्फ साक्षरता का प्रतिशत देश के औसत से ज्यादा है, बल्कि इस राज्य में उच्च शिक्षित लोगों की संख्या भी अच्छी-खासी है। 2011 में हुई अंतिम जनगणना के अनुसार उत्तराखंड...

उत्तराखंड स्पेशल: आपदा आते ही फेल हो जाता है सिस्टम

देहरादून। साल बीतते न बीतते उत्तराखंड एक बार फिर आपदा की चपेट में है और आपदा आते ही एक बार फिर पूरा सिस्टम लाचार नजर आ रहा है। ऐसा हमने इस राज्य में पहले भी देखा है। 2013 की...

उत्तराखंड में फिर तबाही; कहीं बादल फटा, कहीं अतिवृष्टि

देहरादून। उत्तराखंड में मॉनसून अब तक बेशक कमजोर रहा हो, लेकिन मॉनसून में आखिरी पड़ाव खतरनाक साबित हो रहा है। परसों यानी 19 अगस्त से राज्य के अनेक हिस्सों में शुरू हुआ बारिश का सिलसिला लगातार जारी है। इस...

ग्राउंड रिपोर्ट: सजल नेत्रों से अपने गांव को डूबते देख रहे हैं लोहारी के लोग

लोहारी (देहरादून)। बिजली के लिए देहरादून जिले के सुदूरवर्ती लोहारी गांव को बांध के पानी में जलसमाधि दे दी गई है। वह भी गांव वालों को बिना पूरा मुआवजा दिये और बिना उनके रहने की व्यवस्था किये। इस तरह...

पांच सौ से ज्यादा लोग जुटे आशारोड़ी को बचाने के लिए

देहरादून। देहरादून के जंगलों को काटने का जो आंदोलन शुरू में बहुत कमजोर प्रतीत हो रहा था, वह अब मजबूत रूप ले रहा है। हालांकि अब तक शासन-प्रशासन की ओर से इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया गया है।...

जोर पकड़ने लगा देहरादून का वन बचाओ आंदोलन

देहरादून। देहरादून का आशारोड़ी के जंगल बचाने का काम अब जोर पकड़ने लगा है। सिटीजन फाॅर ग्रीन दून के आह्वान पर कुछ लोगों द्वारा शुरू किये गये इस आंदोलन में दर्जनों संस्थाएं और कई नामी पर्यावरणविद भी जुड़ गये...

‘ये जो कुल्हाड़ी पेड़ में मारी, तुमने अपने पैर पे मारी’

देहरादून। देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेस-वे के लिए आशारोड़ी रेंज में साल के सैकड़ों साल पुराने जंगल को काटने का काम लगातार जारी है। दूसरी तरफ दून के सामाजिक संगठन और पर्यावरण प्रेमियों की ओर से किया जा रहा प्रदर्शन का सिलसिला...

देहरादून में सौ साल पुराने साल के जंगल का सफाया

देहरादून। विकास के नाम पर एक बार फिर से उत्तराखंड में विनाश का खेल शुरू कर दिया गया है। चार धाम सड़क परियोजना के नाम पर हजारों पेड़ों की बलि देने और पर्यावरण प्रभावों का अध्ययन करने वाली कमेटी...

देहरादून नहरों के बाद बाग भी इतिहास बनने की ओर

अंग्रेज पहली बार 1815 में देहरादून आए। गढ़वाल के अपदस्थ राजा मानवेन्द्र शाह के अनुरोध पर अंग्रेजों ने गढ़वाल पर कब्जा किए बैठे गोरखों को कई जगहों पर परास्त किया। अंतिम लड़ाई देहरादून के पास खलंगा में हुई। कई...

भुजाएं फड़काने और सीना दिखाने वाले मोदी गुजरात में क्यों नहीं भर पाते सेना में भर्ती का जोश?

देश को केवल अपने हाथों में सुरक्षित होने का दावा कर रहे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उत्तराखण्ड, पंजाब और हरियाणा जैसे सैन्य बाहुल्य राज्यों में जा कर सेना के पराक्रम, शौर्य और सर्वोच्च बलिदान का जज्बा जगा रहे हैं, जबकि...

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गुरमीत राम रहीम के सत्संग और अमृतपाल की खिलाफत: ‘काले दिनों’ के मुहाने पर पंजाब

भारत का सबसे प्रमुख दक्षिणपंथी दल भारतीय जनता पार्टी है और इस वक्त केंद्र की शासन-व्यवस्था नरेंद्र मोदी की...