Sunday, May 22, 2022

त्रिलोचन भट्ट

चार धामा यात्रा: इन मौतों के लिए कौन है जिम्मेदार

उत्तराखंड में चार धाम यात्रा नये रिकॉर्ड बनाने जा रही है। गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ के कपाट खुलने से लेकर अब तक इन धामों में पहुंचे तीर्थयात्रियों की संख्या पर गौर करें तो स्पष्ट हो जाता है कि...

भ्रष्टाचार में नाम कमा रहा उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय

रेगुलर पढ़ाई करने में असमर्थ नौकरीपेशा लोगों और आम नागरिकों की सुविधा के लिए नैनीताल जिले के हल्द्वानी में उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय स्थापित किया गया था। उम्मीद की गई थी कि यह विश्वविद्यालय उत्तराखंड के लोगों के लिए उतना...

ग्राउंड रिपोर्ट: सजल नेत्रों से अपने गांव को डूबते देख रहे हैं लोहारी के लोग

लोहारी (देहरादून)। बिजली के लिए देहरादून जिले के सुदूरवर्ती लोहारी गांव को बांध के पानी में जलसमाधि दे दी गई है। वह भी गांव वालों को बिना पूरा मुआवजा दिये और बिना उनके रहने की व्यवस्था किये। इस तरह...

पांच सौ से ज्यादा लोग जुटे आशारोड़ी को बचाने के लिए

देहरादून। देहरादून के जंगलों को काटने का जो आंदोलन शुरू में बहुत कमजोर प्रतीत हो रहा था, वह अब मजबूत रूप ले रहा है। हालांकि अब तक शासन-प्रशासन की ओर से इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया गया है।...

जोर पकड़ने लगा देहरादून का वन बचाओ आंदोलन

देहरादून। देहरादून का आशारोड़ी के जंगल बचाने का काम अब जोर पकड़ने लगा है। सिटीजन फाॅर ग्रीन दून के आह्वान पर कुछ लोगों द्वारा शुरू किये गये इस आंदोलन में दर्जनों संस्थाएं और कई नामी पर्यावरणविद भी जुड़ गये...

‘ये जो कुल्हाड़ी पेड़ में मारी, तुमने अपने पैर पे मारी’

देहरादून। देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेस-वे के लिए आशारोड़ी रेंज में साल के सैकड़ों साल पुराने जंगल को काटने का काम लगातार जारी है। दूसरी तरफ दून के सामाजिक संगठन और पर्यावरण प्रेमियों की ओर से किया जा रहा प्रदर्शन का सिलसिला...

देहरादून में सौ साल पुराने साल के जंगल का सफाया

देहरादून। विकास के नाम पर एक बार फिर से उत्तराखंड में विनाश का खेल शुरू कर दिया गया है। चार धाम सड़क परियोजना के नाम पर हजारों पेड़ों की बलि देने और पर्यावरण प्रभावों का अध्ययन करने वाली कमेटी...

उत्तराखंड: महिलाशक्ति फिर बनी निर्णायक

उत्तराखंड में महिला शक्ति समय-समय पर अपनी उपस्थिति दर्ज करने के साथ ही विभिन्न आंदोलनों में निर्णायक भूमिका निभाती रही है। विश्व प्रसिद्ध चिपको आंदोलन हो या नशा विरोधी आंदोलन या फिर उत्तराखंड राज्य आंदोलन, सभी जगह महिलाएं निर्णायक...

स्पेशल रिपोर्ट: दरक रहे उत्तराखंड के पहाड़ों का संदेश सुनो

28 फरवरी, 2022 को जब जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र के अंतर सरकारी पैनल (आईपीसीसी) की छठी रिपोर्ट जारी की जा रही थी, जिसमें पिघलते ग्लेशियरों और पहाड़ों में बढ़ते भूस्खलन की घटनाओं पर कई अध्याय हैं, उसी समय...

देहरादून नहरों के बाद बाग भी इतिहास बनने की ओर

अंग्रेज पहली बार 1815 में देहरादून आए। गढ़वाल के अपदस्थ राजा मानवेन्द्र शाह के अनुरोध पर अंग्रेजों ने गढ़वाल पर कब्जा किए बैठे गोरखों को कई जगहों पर परास्त किया। अंतिम लड़ाई देहरादून के पास खलंगा में हुई। कई...

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फिलिस्तीन की शीरीन की हत्या निशाने पर निर्भीक पत्रकारिता

11 मई को फिलिस्तीन के जेनिन शहर में इजरायली फौजों द्वारा की जा रही जबरिया बेदखली को कवर कर...