Friday, October 22, 2021

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Hakeem

जयंतीः तरक्कीपसंद शायरी में गजल को मुक़ाम दिलाने वाले शायर मजरूह सुलतानपुरी

मैं अकेला ही चला था जानिबे मंज़िल मगरलोग साथ आते गए और कारवां बनता गया उर्दू अदब में ऐसे बहुत कम शेर हैं, जो शायर की पहचान बन गए और आज भी सियासी, समाजी महफिलों और तमाम ऐसी बैठकों में...
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जज साहब! ये तो न्याय का मज़ाक़ है

(अभिनेता शाहरूख खान के बेटे आर्यन खान का मसला देश के नागरिकों और समाज के संवेदनशील तबके के लिए...
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