Thursday, February 2, 2023

ज़ाहिद खान

स्मृति दिवस पर विशेष: यंग मार्वल कॉमरेड पीसी जोशी

वे असाधारण स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, राजनीतिक चिंतक और करिश्माई संगठनकर्ता थे। देश में साम्यवादी आंदोलन उन्हीं की अगुआई में शुरू हुआ। आधुनिक भारत के वे एक अहम सियासी हस्ती रहे। जिन्होंने पूरी ज़िंदगी अपने देशवासियों की बेहतरी और कम्युनिस्ट...

स्मृति दिवस पर विशेष: उदयशंकर ने भारतीय नृत्य और संगीत को दिया वैश्विक फ़लक

देश में उदयशंकर की पहचान भारतीय नृत्य और संगीत को वैश्विक फ़लक पर स्थापित करने वाले एक अद्भुत कलाकार की है। जिन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी नृत्य के लिए समर्पित कर दी। जब देश परतंत्र था, तब उन्होंने भारतीय शास्त्रीय,...

स्मृति दिवस पर विशेष: दिनेश ठाकुर, थिएटर जिनकी सांसों में बसता था

हिन्दी रंगमंच की दुनिया में दिनेश ठाकुर की पहचान रंगकर्मी, अभिनेता और नाट्य ग्रुप ‘अंक’ के संस्थापक और निर्देशक के तौर पर है। ‘अंक’ का सफ़र साल 1976 में शुरू हुआ, जो उनके इस दुनिया से जाने के बाद...

जब बेदी और मंटो में ख़तो-किताबत बंद हो गई

अफ़साना निगार राजिंदर सिंह बेदी का दौर वह हसीन दौर था, जब उर्दू अदब में सआदत हसन मंटो, कृश्न चंदर, इस्मत चुग़ताई और ख़्वाजा अहमद अब्बास जैसे महारथी एक साथ अपने अफ़सानों से पूरे मुल्क में धूम मचाए हुए...

रणवीर सिंह के निधन पर विशेष: अस्त हो गया आधुनिक रंगमंच का एक चमकता नक्षत्र

आधुनिक रंगमंच के गहन अध्येता, अभिनेता-निर्देशक, नाट्य आलोचक और नाटककार रणवीर सिंह दुनिया के इस विशाल रंगमंच पर अपनी भूमिका निभाकर, हमेशा के लिए नेपथ्य में चले गए हैं। 23 अगस्त की सुबह जयपुर में उन्होंने अपनी आखिरी सांस ली।...

शंभु मित्र के जन्मदिन पर विशेष: जिन्होंने टैगोर के नाटकों का मंचन करके बतलाया

आधुनिक बांग्ला नाट्य मंच में शंभु मित्र की पहचान शीर्षस्थ नाटककार, अभिनेता और निर्देशक के रूप में है। उनकी पूरी जिंदगी नाटक के लिए समर्पित रही। उन्होंने न सिर्फ़ नाटकों में अभिनय-निर्देशन किया, बल्कि फ़िल्मों में भी अपने आप...

आजादी की लड़ाई में कई तरक्कीपसंद शायरों ने सीधे तौर पर की थी हिस्सेदारी

देश की आज़ादी लाखों-लाख लोगों की कु़र्बानियों का नतीज़ा है। जिसमें लेखक, कलाकारों और संस्कृतिकर्मियों ने भी एक अहम रोल निभाया। ख़ास तौर से तरक़्क़ीपसंद तहरीक से जुड़े लेखक, कलाकार आज़ादी के आंदोलन में पेश-पेश रहे। अपने गीत, ग़ज़ल, नज़्म, नाटक, अफ़सानों और आलेखों के...

जश्न और जुलूसों के नाम थी आज़ादी की वह सुबह

देश की आज़ादी लाखों-लाख लोगों की कु़र्बानियों का नतीज़ा है। जिसमें लेखक, कलाकारों और संस्कृतिकर्मियों ने भी अपनी बड़ी भूमिका निभाई। ख़ास तौर से तरक़्क़ीपसंद तहरीक से जुड़े लेखक, कलाकार मसलन सज्जाद ज़हीर, डॉ. रशीद जहां, मौलाना हसरत मोहानी,...

अमृत महोत्सव के दौर में प्रतिरोध : प्रलेस का दो दिवसीय आयोजन

दिल्ली। 'अमृत महोत्सव के दौर में प्रतिरोध' आज के दौर में बेहद महत्वपूर्ण और विचारोत्तेजक विषय पर प्रगतिशील लेखक संघ की दिल्ली इकाई 8 और 9 अगस्त को दो दिवसीय आयोजन कर रही है। जिसमें चार सत्रों में अलग—अलग...

स्मृति दिवस पर विशेष: भुलाई नहीं जा सकती हैं निरंजन सेन की कु़र्बानियां

निरंजन सेन का इप्टा में एक अलग ही मुक़ाम है। उन्होंने इप्टा को संगठित और उसे खड़ा करने में अपनी पूरी ज़िंदगी कु़र्बान कर दी। वे लंबे समय तक इप्टा के महासचिव पद पर रहे। इस दरमियान संगठन का...

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नई दिल्ली। अडानी इंटरप्राइजेज ने अपना एफपीओ वापस ले लिया है। इसके साथ ही 20 हजार करोड़ के इस...