Thursday, October 21, 2021

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माहेश्वरी का मत: सत्ता विमर्श की एक प्रस्तावना है नंदकिशोर आचार्य का नाटक ‘बापू’

नटरंग पत्रिका के मार्च 2006 के अंक में प्रकाशित नंदकिशोर आचार्य जी के ‘बापू’ नाटक को पढ़ कर कोई यदि उस पर आरएसएस की सांप्रदायिक और कपटपूर्ण विचारधारा की लेश मात्र छाया भी देखता है तो वह सचमुच तरस खाने के योग्य...
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ब्राह्मणवादी ढोल पर थिरकते ओबीसी के गुलाम नचनिये

भारत में गायों की गिनती होती है, ऊंटों की गिनती होती है, भेड़ों की गिनती होती है। यहां तक...
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