Wednesday, October 27, 2021

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Natasha Narwal

महिलाओं और दलितों की दुर्दशा प्रशासनिक विफलता नहीं, सत्ता की राजनीतिक सफलता है: शैलेन्द्र शैली व्याख्यान में संध्या शैली

शैलेन्द्र शैली स्मृति व्याख्यान 2021 में बोलते हुए अखिल भारतीय जनवादी की केंद्रीय कार्यकारिणी सदस्य सुश्री संध्या शैली ने अनेक संवैधानिक प्रावधानों और संरक्षणों के बावजूद महिलाओं और दलितों पर बढ़ते अत्याचारों की वजहें गिनाई। मध्यप्रदेश में दलितों और महिलाओं...

पुलिस राज में बदला जा रहा है देश: शैली स्मृति व्याख्यान में नताशा नरवाल

भोपाल। बीसवें शैलेन्द्र शैली स्मृति व्याख्यान में बोलते हुए पिजरा तोड़ आंदोलन की एक्टिविस्ट और हाल ही में जेल से जमानत पर रिहा हुई नताशा नरवाल ने कहा कि देश को एक पुलिस स्टेट में बदला जा रहा है। विरोध...

यह कैसा न्याय! जो मरते पिता महावीर नरवाल से कैदी बेटी की मुलाकात भी न करा सका

9 मई 2021 की सुबह कुछ दोस्तों से बात हुई। अन्य बातों के अलावा एक बात सब से हुई– महावीर नरवाल जी की तबीयत के बारे में। मुझे ख़बर थी कि वे कोविड-संक्रमित होने के बाद अस्पताल में दाख़िल...

संवेदनहीन सरकारः जेल में बंद बेटी नताशा से मरते वक्त मिल भी नहीं सके महावीर नरवाल

पिता महावीर नरवाल की मृत्यु और बेटी नताशा की जेल बंदी एक मानवीय शर्म है। नताशा नरवाल के पिता महावीर नरवाल का जाना सिर्फ एक कोविड के कारण सामान्य मृत्यु नहीं है, बल्कि ये बेनकाब करता है कि सरकारें...

आज़ादी एक अधूरा शब्द नहीं है?

पिछली सदी के आखिरी पहर में अद्वितीय लेखक-पत्रकार राजकिशोर की एक किताब आई थी। उसमें छीजती हुई आज़ादी की चिंता के साथ लिखे उत्कृष्ट और विचारोत्तेजक निबंधों में पहला निबंध ही यही था: ‘आजादी एक अधूरा शब्द है’। इस...
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हाय रे, देश तुम कब सुधरोगे!

आज़ादी के 74 साल बाद भी अंग्रेजों द्वारा डाली गई फूट की राजनीति का बीज हमारे भीतर अंखुआता -अंकुरित...
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