Sunday, October 24, 2021

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जन्मदिवस पर विशेष: फ़ारूक़ी में हिंदुस्तानी तहज़ीब और अदबी रिवायत की थी गहरी समझ

समूचे दक्षिण एशिया की उर्दू-हिंदी अदबी दुनिया में शम्सुर्रहमान फ़ारूक़ी का नाम किसी तआरुफ़ का मोहताज़ नहीं। उनका नाम बड़े ही इज़्ज़त-ओ-एहतराम के साथ लिया जाता है। आधुनिक उर्दू आलोचना में किया गया फ़ारूक़ी का काम संगे मील है।...

हिंदी के बेडौल अपराध साहित्य की एक नजीर- ‘पिशाच’

पिछली 29 अगस्त को वीडियो पत्रकार अजित अंजुम ने अपने यूपी चुनाव और किसान आंदोलन संबंधी कवरेज के बीच अचानक ही हिंदी के हाल में प्रकाशित एक ‘क्राइम थ्रिलर’ ‘पिशाच’ पर चर्चा की। इसके लेखक संदीप पालीवाल के साथ...

अमृतलाल नागर: भारतीय जनजीवन के आशावान स्वप्नों के चितेरे

प्रेमचंदोत्तर हिंदी साहित्य को जिन साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं से संवारा है, उनमें अमृतलाल नागर का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। किस्सागोई के धनी अमृतलाल नागर ने कई विधाओं से साहित्य को समृद्ध किया। अमृतलाल नागर ने कहानी...

‘एक सुलझा हुआ रहस्य’: एक दिलचस्प विज्ञान-कथा संग्रह

जब विज्ञान-कथाएं तो क्या, कथा-साहित्य और यहां तक कि खुद साहित्य अस्तित्व के संकट से जूझ रहा हो, ऐसे दौर में उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा प्रकाशित युवा कहानीकार अमित कुमार की विज्ञान-कथाओं का संग्रह 'एक सुलझा हुआ रहस्य'...

किताब समीक्षा: कविता की जनपक्षधरता पर शैलेंद्र चौहान की नज़र

शैलेंद्र चौहान बुनियादी तौर पर कवि हैं उन्होंने कुछ कहानियां और एक उपन्यास भी लिखा है। लघु पत्रिका ‘धरती’ का एक लंबे अंतराल तक संपादन भी किया है। आलोचनात्मक आलेख और किताबों की समीक्षा गाहे-बगाहे लिखते रहे हैं। आठवें दशक से...

मौजूदा राजनीतिक हालत पर टिप्पणी करता है खालिद जावेद का उपन्यास ‘एक ख़ंजर पानी में’

प्रो. खालिद जावेद जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के ब्रांड एंबेसडर हैं। अपने बेमिसाल अफसानों से न सिर्फ उर्दू बल्कि दूसरी जुबान के लोगों का ध्यान खींचने वाले खालिद का उपन्यास, 'एक खंजर पानी में' उर्दू अदब में एक नया...

पुस्तक समीक्षा: ‘गूँगी रुलाई का कोरस’ यानी संगीत के बहाने समाज की चीर-फाड़

रणेंद्र का ताजा उपन्यास 'गूंगी रुलाई का कोरस' चर्चा में है। राजकमल प्रकाशन से आया यह उपन्यास अमेजन पर उपलब्ध है। रणेंद्र ने झारखंड में प्रशासनिक दायित्व निभाते हुए साहित्य की दुनिया में राष्ट्रीय पहचान बनाई। इससे पहले उनके...

उपन्यास, आलोचना और वीरेंद्र यादव का समाज-बोध

मार्क्सवादी साहित्यालोचक वीरेंद्र यादव के कुछ लेख और टिप्पणियां मैंने पढ़ी थीं। पर उनकी आलोचनात्मक पुस्तक पढ़ने का पहला मौका हाल के दिनों में मिला। यह पुस्तक है-उपन्यास और वर्चस्व की सत्ता।* 2017 में पुस्तक का दूसरा संस्करण प्रकाशित...

डॉ.कमला प्रसाद: प्रगतिशील आंदोलन का अनथक योद्धा

सज्जाद जहीर और भीष्म साहनी के बाद प्रगतिशील लेखक संघ को एक नई दिशा व ऊर्जा देने वाले डॉ. कमला प्रसाद पांडेय समूची साहित्यिक बिरादरी में अद्भुत सांगठनिक क्षमता और नेतृत्वशीलता के लिए जाने-पहचाने जाते थे। अपनी जिन्दगी के...

इंदिरा गांधी नहीं गायत्री देवी से प्रेरित होकर मैंने लिखी थी ‘आंधी’: कमलेश्वर

बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी कमलेश्वर की 27 जनवरी को यानी बीते कल 14वीं पुण्यतिथि थी। 6 जनवरी, 1932 को उत्तरप्रदेश के मैनपुरी में जन्मे कमलेश्वर प्रसाद सक्सेना उर्फ कमलेश्वर की आला तालीम इलाहाबाद में हुई।शिक्षा पूरी करने के बाद...
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कर्नाटक की एक कोर्ट ने भगत सिंह की किताब रखने के देशद्रोह के आरोप से एक पत्रकार और उसके आदिवासी पिता को किया बरी

आप यदि आदिवासी हैं और शहीद भगत सिंह की किताब रखते हैं, पढ़ते हैं तो आप नक्सली जरूर होंगे।...
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