संस्कृति-समाज साहिर का जन्मशती वर्षः ‘आओ कि कोई ख्वाब बुनें कल के वास्ते’ by ज़ाहिद खान March 7, 2021March 7, 2021 साल 2021, शायर-नग्मा निगार साहिर लुधियानवी का जन्मशती साल है। इस दुनिया से रुखसत हुए, उन्हें एक… Read More
संस्कृति-समाज जन्मदिन पर विशेषः मजाज़ की शायरी में रबाब भी है और इंक़लाब भी by नाज़िश अंसारी October 19, 2020October 19, 2020 एक कैफ़ियत होती है प्यार। आगे बढ़कर मुहब्बत बनती है। ला-हद होकर इश्क़ हो जाती है। फिर… Read More
लेखक राहत की स्मृति: ‘वो गर्दन नापता है नाप ले, मगर जालिम से डर जाने का नहीं’ by ज़ाहिद खान August 17, 2020August 19, 2020 अब ना मैं हूं ना बाक़ी हैं ज़माने मेरेफिर भी मशहूर हैं शहरों में फ़साने मेरेकुछ ऐसे… Read More
बीच बहस रंज यही है बुद्धिजीवियों को भी कि राहत के जाने का इतना ग़म क्यों है! by धीरेश सैनी August 12, 2020August 16, 2020 अपनी विद्वता के ‘आइवरी टावर्स’ में बैठे कवि-बुद्धिजीवी जो भी समझें, पर सच यही है, इत्ते बड़े… Read More