Friday, October 22, 2021

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तथाकथित सभ्यता की दरारों में संवेदनहीन समाज की पालकी ढोती बेनाम, बेआवाज़ और अदृश्य ज़िंदगियों की ‘स्वर्ग से विदाई’

मेहनतकश लोगों के बारे में हमारी व्यवस्था किस हद तक असंवेदनशील है, इसे अचानक लागू किए गए लॉकडाउन के निर्णय से समझा जा सकता है। एक झटके के साथ सारी सामाजिक और आर्थिक गतिविधियां ठप कर दी गईं। जो...
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जज साहब! ये तो न्याय का मज़ाक़ है

(अभिनेता शाहरूख खान के बेटे आर्यन खान का मसला देश के नागरिकों और समाज के संवेदनशील तबके के लिए...
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