village

हमारे बाप दादा पुश्तैनी जल, जंगल, जमीन बचाने के लिए लड़े थे! हम भी लड़ेंगे: बोध घाट परियोजना से प्रभावित एक आदिवासी

बस्तर। पिछले चार दशक से बंद पड़ी बोध घाट परियोजना का जिन्न फिर से बाहर निकल आया… Read More

तुलसीराम के जन्मदिन पर विशेष: ‘मुर्दहिया’ में भूख, ग़रीबी और अंधविश्वास के चित्र

भारतीय साहित्य में अपनी पहली ही कृति आत्मकथा ‘मुर्दहिया’ से तुलसीराम हिन्दी साहित्य और दलित साहित्य में… Read More

मनरेगा पर सोनिया गांधी: यह वक्त कांग्रेस बनाम बीजेपी का नहीं बल्कि लोगों के जीवन को बचाने का है

नई दिल्ली। (कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मनरेगा स्कीम को लेकर एक खुला पत्र लिखा है। उन्होंने… Read More

विश्व पर्यावरण दिवस: वनाधिकारों को जमीन पर उतारने की मांग को लेकर छत्तीसगढ़ के सैकड़ों गांवों में प्रदर्शन

रायपुर। विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर आज छत्तीसगढ़ के आदिवासी अधिकार और वनाधिकार पर काम करने… Read More

शहर छोड़ने वाले मजदूरों को पीसने के लिए तैयार है गांव की जातिवादी चक्की

बिहार के गाँवों से बहुत सारे मज़दूर दो पैसा कमाने के लिए दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र,… Read More

असंगठित क्षेत्र और दिहाड़ी मज़दूरों की परवाह से ही पटरी पर लौटेगी अर्थव्यवस्था

भारत के 90 फ़ीसदी लोगों का गुज़र-बसर असंगठित क्षेत्र और दिहाड़ी मज़दूरी के ज़रिये ही होती है।… Read More