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हवाई जहाज से आया कोरोना, देश के गरीब मुआवजे के हकदार

भारत में कोरोना का रोग गरीब लेकर नहीं आए। रिक्शा चलाने वाले लोगों का इसमें कोई कसूर नहीं है। छोटे शहर हों या फिर गांव- उनका कोरोना फैलाने में कोई हाथ नहीं है। देश में कोरोना हवाई जहाज से आया। विदेश में रहने वाले या विदेश से भारत आए लोगों ने कोरोना फैलाया। कोरोना की बीमारी रिक्शे वाले से हवाई जहाज वालों तक नहीं, बल्कि हवाई जहाज वालों से रिक्शे वाले तक पहुंचा। इसका सबूत है कि आज भी जब हम सामुदायिक संक्रमण के मुहाने पर हैं तो कोरोना मरीजों की तादाद उन शहरों में सबसे ज्यादा है जहां हवाई अड्डे हैं।

देश की राजधानी दिल्ली। यहां अंतरदेशीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों हवाई अड्डे हैं। 13 अप्रैल तक दिल्ली में कोरोना मरीजों की संख्या 1154 है। निस्संदेह जमात वाले इसमें ज्यादा हैं। मगर, ये जमात वाले कौन हैं? वही लोग हैं जो विदेश से निजामुद्दीन मरकज में आए लोगों से संक्रमित हुए। इसलिए दिल्ली में कोरोना संक्रमण के लिए अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से इसका जुड़ा होना सबसे बड़ी वजह है। इसके अलावा देश के बाकी बड़े शहरों से भी इसके हवाई संपर्क हैं जो कोरोना फैलने की अन्य संभावित वजहों में एक है।

बात करें महाराष्ट्र की। 13 अप्रैल को यहां कोरोना के 2064 मरीज थे। इनमें देश की वाणिज्यिक राजधानी कही जाने वाली मुंबई में 1357 मरीज हैं। यानी महाराष्ट्र में कोरोना मरीजों के आधे से ज्यादा मुंबई में हैं। मुंबई भी दिल्ली की तरह देशी और विदेशी हवाई अड्डों से जुड़ा है। मुंबई ने अपने आस-पास के शहरों में भी कोरोना फैलाया है। पुणे 266, थाणे 190, नासिक 30, पालघर 28, नागपुर 28 की संख्या बताती है कि कोरोना का संक्रमण विदेश से महानगर में और फिर महानगर से छोटे शहर तक फैला।

तमिलनाडु पर गौर करें देश का तीसरा महानगर चेन्नई है। 13 अप्रैल को तमिलनाडु में 1173 कोरोना के मरीज थे। इनमें अकेले राजधानी चेन्नई में 209 मरीज हैं। कोयम्बटूर में 126 और तिरुप्पुर में 79 की संख्या भी उसी बात की पुष्टि करती है कि कोरोना की बीमारी बड़े शहरों से छोटे शहरों की ओर बढ़ी।

पश्चिम बंगाल का कोलकाता चार प्रमुख महानगरों में इकलौता है जिस पर हठात यह आरोप नहीं लग सकता कि इसी ने छोटे शहरों को कोरोनामय किया है। पश्चिम बंगाल में 13 अप्रैल को 152 मरीज थे। राजधानी कोलकाता में महज 11 मरीज हैं। यहां कोरोना का प्रकोप देर से पहुंचा।

उत्तर प्रदेश में की बात करें तो यहां संक्रमण के 558 केस हैं। इनमें सबसे ज्यादा आगरा में 139 मामले हैं जो विदेशी पर्यटकों का केंद्र है। इसके बाद दिल्ली-एनसीआर में पड़ने वाले गौतम बुद्धनगर यानी नोएडा का नंबर है जहां 66 मामले हैं। दिल्ली से सटे मेरठ में 56, सहारनपुर में 39 और राजधानी लखनऊ में 33 मामले हैं।

कर्नाटक के उदाहरण में बेंगलुरू अहम है जो देश से हवाई मार्गों के जरिए जुड़ा है। कर्नाटक में कोरोना मरीजों की संख्या 277 है। इनमें राजधानी बेंगलुरू में 77 मरीज हैं।

राजस्थान में कोरोना का संक्रमण इटली से आए यात्री के जरिए पहुंचा था। प्रदेश में 13 अप्रैल को 847 कोरोना संक्रमित दर्ज हैं। इनमें से अकेले जयपुर में 361 मरीज हैं।

कारोबार के लिए मशहूर गुजरात में 538 कोरोना के मरीज हैं। इनमें अकेले अहमदाबाद में 295 मरीज हैं। व़डोदरा में 102 और सूरत में 33 मरीज हैं। तीनों शहर किसी न किसी रूप में विदेशियों के संपर्क में रहे जा सकने वाले साधनों से जुड़े हैं।

मध्यप्रदेश में 562 कोरोना संक्रमितों में सिर्फ भोपाल में 134 हैं। इसी तरह उत्तराखण्ड में 35 कोरोना संक्रमित हैं। इनमें से देहरादून में 18 हैं। जम्मू कश्मीर 270 कोरोना के मरीज हैं। इनमें से 69 श्रीनगर से हैं। लद्दाख में 15 कोरोना मरीज हैं। इनमें से लेह में 12 हैं।

तेलंगाना में जो 531 कोरोना संक्रमित हैं उनमें से हैदराबाद से 197 हैं। हैदराबाद बड़ा शहर है और यह अंतरराष्ट्रीय आवाजाही से भी जुड़ा हुआ है। छोटे शहरों की बात करें तो तेलंगाना के गुंटूर में 93 और करनूल में 84 मरीज हैं जबकि एसपीएस नेल्लोर में 56 मरीज हैं।

केरल देश में पहला ऐसा राज्य है जहां सीधे चीन के वुहान शहर से कोरोना का मरीज आया था। यहां 378 मामलों में कासरगोड में 166 मरीज हैं।

झारखण्ड में विदेश से कोरोना नहीं आया। यहां पहला मरीज तबलीगी जमात से जुड़ा था। यहां 19 मरीजों में राजधानी रांची से जुड़े मरीजों की संख्या 8 है, जबकि बोकारो में भी 8 मरीज हैं। यहां भी गांवों तक कोरोना नहीं पहुंचा है।

देश के पैमाने पर अगर कोरोना के हॉटस्पॉट की बात करें तो यह गांवों तक नहीं पहुंचा है। बिहार, झारखण्ड, बंगाल, त्रिपुरा, असम, पूर्वोत्तर में कोरोना देर से पहुंचा तो इसकी वजह हवाई अड्डों के जरिए इसका विदेशी संपर्क ना के बराबर होना है। जो मामले आए भी हैं तो वे देश की राजधानी से अंतरराज्यीय संबंध के कारण आए हैं।

देश में कोरोना के संक्रमण की प्रवृत्ति बताती है कि देशव्यापी लॉकडाउन के बजाए महानगरों और नगरों की घेराबंदी की जानी चाहिए। देशव्यापी लॉकडाउन से गरीब तबके को हो रहे नुकसान से बचाने की जरूरत है। गलती अगर हवाई जहाज में चलने वाले करें तो इसका खामियाजा रिक्शा चलाने वाले क्यों भुगतें- इसका जवाब देश को देना होगा। देश के गरीब मुआवजे के हकदार हैं।

(प्रेम कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल विभिन्न न्यूज़ चैनलों के पैनल में इनको बहस करते देखा जा सकता है।)

This post was last modified on April 14, 2020 10:52 am

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