Sunday, May 29, 2022

Poor

आर्थिक सर्वे बताता है कि और चौड़ी होगी अमीरों और गरीबों के बीच की खाईं

आर्थिक सर्वेक्षण देश की अर्थव्यवस्था के स्वास्थ का लेखा जोखा पेश करता है। इसलिए सबकी निगाह उसी तरफ लगी रहती है। देश जिस राह में चल रहा है और चलना चाहता है उसकी एक बानगी उसमें दिखाई देती है।...

ऑक्सफैम-2022 रिपोर्ट के साये में देश का बजट

केंद्रीय बजट बनाने की तैयारियां तेजी से चल रही हैं। इसी बीच ऑक्सफैम रिपोर्ट-2022 भी 17 जनवरी को हम सबके समक्ष आ गई है। इसकी रिपोर्ट  सरकार को उसकी असफलता का आइना दिखाती हुई प्रतीत हो रही है। वस्तुतः...

कोविड-19 ने चौड़ी कर दी है देश और समाज में असमानता की खाई

नव वर्ष आने के साथ कोविड-19 ने फिर से दस्तक देना शुरू कर दिया है। कोविड-19 तथा असमानता के बढ़ने के बीच एक सीधा सम्बन्ध रहा है -ऐसा कोरोना की पहली और दूसरी लहर में स्पष्ट हुआ। दोनों का...

कोविड काल में 80% बच्चों में सीखने में आयी कमी और 10 % बच्चे बन गए बाल श्रमिक: रिपोर्ट

भारत में कोरोना के कारण जनता कर्फ्यू के रूप में 22 मार्च 2020 को लॉकडाउन की शुरुआत हुई। इस लॉकडाउन के कारण सबसे अधिक शिक्षा के क्षेत्र में असर पड़ा। इस प्रभाव को ग्रामीण क्षेत्रों के SC, ST, OBC...

आजादी के 70 साल बाद भी आबादी के बड़े हिस्से को नसीब नहीं हो पाया एक अदद आशियाना

आधी रात के समय बिहार के समस्तीपुर जिले की भागपुरा पंचायत के एक गांव चटोली के तालाब के पास कुछ पचास लोग बड़ी ही व्याकुलता और चिंता के साथ चर्चा कर रहे थे। वह यहाँ इकट्ठे हुए थे अपने...

महात्‍मा गांधी केंद्रीय विश्‍वविद्यालय मोतिहारी में आरक्षण का उड़ता मखौल

महात्‍मा गांधी दलितों को "हरिजन" कहते थे और पूना पैक्‍ट के वक्‍त उन्‍होंने अंबेडकर को भरसक विश्‍वास दिलाने का प्रयास किया था कि वे सवर्ण हिंदुओं को दलितों के साथ भेदभाव नहीं करने देंगे। गांधी जी की तमाम भलमनसाहत...

आखिर गरीबों, दलितों और वंचितों पर कहर बनकर क्यों टूट पड़ती है पुलिस?

किसी बड़ी महामारी के बीत जाने के बाद, उससे जुड़े कुछ दृश्य और घटनाएं लोक-चेतना में स्थाई निवास बुन लेते हैं। कोरोना की दो लहरों के दौरान हुई मीडिया कवरेज में प्रवासी मजदूरों की घर वापसी, जलती चिताएं, ऑक्सीजन...

गरीबों के आंदोलनकारी व उनके प्रतिनिधियों का 4 अक्टूबर को होगा दिल्ली में सम्मेलन

लखनऊ। गरीबों खासकर ग्रामीण गरीबों के देशभर के आंदोलनकारी संगठनों और उनके प्रतिनिधि 4 अक्टूबर को दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में मिलेंगे। मजदूर किसान मंच द्वारा आयोजित सम्मेलन में ग्रामीण गरीबों के लिए विचार विमर्श होगा व भावी कार्यक्रम...

‘राष्ट्रीय पोषण सप्ताह’ का सरकारी ढोंग बनाम भूख से मरती मुल्क की 19 करोड़ जनता

भारत में सन् 1982 से 1 सितम्बर से 7 सितम्बर तक एक सप्ताह ‘राष्ट्रीय पोषण सप्ताह’ मनाने की शुरूआत की गई है। सरकारी दावे के अनुसार इस सप्ताह को मनाने का मुख्य उद्देश्य आम जनता में पोषण के बारे...

सिलेंडर नहीं, सरकार ने हाथी दे दिया जिसे पालना है मुश्किल!

ग्रामीण इलाकों की दलित बहुजन महिलाओं का अस्तित्व ईंधन का पर्याय रहा है। आज 21वीं सदी के तीसरे दशक में भी उस स्थिति में बहुत बदलाव नज़र नहीं आता है। आज भी सुबह से शाम तक ग्रामीण इलाके की...
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दूसरी बरसी पर विशेष: एमपी वीरेंद्र कुमार ने कभी नहीं किया विचारधारा से समझौता

केरल के सबसे बड़े मीडिया समूह मातृभूमि प्रकाशन के प्रबंध निदेशक, लोकप्रिय विधायक, सांसद और केंद्र सरकार में मंत्री...
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