Friday, January 27, 2023

सत्येंद्र रंजन

बीबीसी डॉक्यूमेंटरी: सवाल सिर्फ मोदी का नहीं है

अगर मंशा और प्रसारण के समय के सवाल को छोड़ दिया जाए, तो इसमें कोई शक नहीं है कि बीबीसी डॉक्यूमेंटरी-द मोदी क्वेश्चन-ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय समाज में गहराए सांप्रदायिक विभाजन और भारतीय राज्य-व्यवस्था के...

बीबीसी डॉक्यूमेंट्री: कठघरे में तो ब्रिटेन खड़ा हुआ है

बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री- द मोदी क्वेश्चन- से गोधरा ट्रेन अग्निकांड, गुजरात दंगों या उसमें गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की कथित भूमिका के बारे में कोई नई जानकारी सामने नहीं आई है। यानी इसमें फरवरी-मार्च 2002 के घटनाक्रमों...

इस अर्थव्यवस्था का अब क्या औचित्य?

आर्थिक गैर-बराबरी एक दशक से अधिक समय से दुनिया भर में चर्चा में है। इसलिए गैर-सरकारी संस्था ऑक्सफेम ने अपनी ताजा रिपोर्ट- सरवाइवल ऑफ द रिचेस्ट में जो बातें कहीं हैं, वे चौकाने वाली नहीं हैं। दरअसल गैर-बराबरी का मुद्दा...

नव-उदारवाद ने भारत को बनाया या बिगाड़ा?

नव उदारवादी आर्थिक नीतियों के जो परिणाम आज हम देख रहे हैं, उसके लिए सिर्फ मोदी सरकार को जिम्मेदार ठहराना इंसाफ नहीं होगा। बल्कि इसकी जिम्मेदारी उन तमाम सरकारों पर आएगी, जिन्होंने पिछले तीन दशक में इन नीतियों पर...

गौर कीजिए भारत के वर्तमान के इस पहलू पर

कुछ पहले आई इस खबर ने भारत में जश्नभरा माहौल बना दिया कि भारत अब दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। इसके साथ ही ये खबर भी आई कि इस दशक के अंत तक अमेरिका और...

एक रोशनी जो जुगनू की चमक साबित हुई

यूक्रेन पर रूस की विशेष सैनिक कार्रवाई शुरू होने के बाद भारत सरकार ने जो रुख लिया, उससे दुनिया भर के कूटनीतिक विशेषज्ञ चौंके। संयुक्त राष्ट्र में रूस की निंदा के लिए पश्चिमी देशों की तरफ से लाए गए...

अब बेनकाब हो गया है पश्चिम का सॉफ्ट पॉवर भी

विश्व प्रसिद्ध अर्थशास्त्री माइकल हडसन ने यूक्रेन संकट के बारे में लिखे अपने एक हालिया लेख का शीर्षक दिया है- The American Empire self-destructs यानी अमेरिकी साम्राज्य आत्म-विनाश कर रहा है। हडसन ने ये लेख मुख्य तौर पर यूक्रेन...

तीर कभी बन जाते हैं खुद निशाने!

यूक्रेन के मुद्दे पर बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने बार-बार धमकी दी थी कि अगर रूस ने यूक्रेन पर हमला किया, तो उसे अंतरराष्ट्रीय भुगतान के सिस्टम- स्विफ्ट से बाहर कर दिया जाएगा। 24 फरवरी को जब रूस...

पुतिन ने परदा गिरा दिया है

युद्ध समस्या का समाधान नहीं है। इसीलिए कहा जा सकता है कि हमेशा इसे अंतिम विकल्प के रूप में ही चुना जाना चाहिए। अतः यूक्रेन पर रूस के हमले के सिलसिले में रुख तय करते हुए यही प्रश्न निर्णायक...

दस मार्च को जिन बातों पर नज़र रहेगी

चुनाव अब लोकतंत्र को सुनिश्चित करने का किस हद तक पैमाना रह गए हैं, इस प्रश्न के लगातार अधिकाधिक प्रासंगिक होते जाने के बावजूद सच यही है कि अभी भी बहुसंख्यक लोगों के लिए ये सवाल अभी महत्त्वपूर्ण नहीं...

About Me

30 POSTS
0 COMMENTS

Latest News

हिंडनबर्ग के वो 88 सवाल जिन्होंने कर दिया अडानी समूह को बेपर्दा

एक प्रणाली तब ध्वस्त हो जाती है जब अडानी समूह जैसे कॉर्पोरेट दिग्गज दिनदहाड़े एक जटिल धोखाधड़ी करने में...