Tuesday, July 5, 2022

water

स्पेशल रिपोर्ट: बेहिसाब पानी होने के बावजूद आखिर बिहार के लोग मछली के लिए आंध्रा और बंगाल पर क्यों हैं निर्भर?

सुपौल, बिहार। बिहार मत्स्य निदेशालय के आंकड़ों के मुताबिक बिहार में सालाना मछली उत्पादन करीब साढ़े पांच लाख मीट्रिक टन है, जबकि खपत 8 लाख मीट्रिक टन है। बाकी मछली के लिए बिहार को आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल...

सरकारी दावों पर पानी फेरता झारखंड के पानी का सच

कहा जाता है कि पहाड़ से पानी का रिश्ता सदियों पुराना है। प्रकृति के इसी गठबंधन की वजह से पहाड़ और जंगल से घिरे इलाकों में कभी पानी की कमी नहीं रही। लेकिन झारखंड में पिछले तीस साल के...

कैसे बचेगा पंजाब का अस्तित्व?

गुरुबाणी के संदेश ‘पवन गुरु, पानी पिता, माता धरा सामान’ में आस्था रखने वाले पंजाबियों के लिए वैज्ञानिकों ने दो साल पहले भविष्यवाणी की थी कि 2025 तक पंजाब के भूजल संसाधन सूख जाएंगे और अगले कुछ सालों में...

झारखंड में आदिम जनजाति असुर की 300 आबादी दूषित पानी पीने को मजबूर  

 वैसे तो झारखण्ड में बारह महीने ही पेयजल की भारी किल्लत रहती है, प्रायः ग्रामीण नदी, चुंआ (खेतों में या नदी-नालों के पास गड्ढा खोदकर बनाया गया एक मिनी कुंआ जिसमें रस्सी व बाल्टी की जरूरत नहीं होती), चापाकल...

ग्राउंड रिपोर्ट: सजल नेत्रों से अपने गांव को डूबते देख रहे हैं लोहारी के लोग

लोहारी (देहरादून)। बिजली के लिए देहरादून जिले के सुदूरवर्ती लोहारी गांव को बांध के पानी में जलसमाधि दे दी गई है। वह भी गांव वालों को बिना पूरा मुआवजा दिये और बिना उनके रहने की व्यवस्था किये। इस तरह...

जल संकट: गंगा भी न बुझा सकी अमरोहा की प्यास!

अमरोहा। देश में जल संकट की समस्या अब आम होती जा रही है।  ऐसा शायद ही कोई राज्य हो जो जल संकट से ना जूझ रहा हो। गांव-देहात में गिरता वाटर लेवल चिंताजनक है। हैंडपंप, सबमर्सिबल से धरती के...

 अदृश्य पानी, दिखता संकट

22 मार्च को विश्व जल दिवस मनाया जाता है। ताजा पानी के महत्व को रेखांकित करने के लिए 1993 से यह आयोजन होता है। इस वर्ष के आयोजन का विषय भूजल है जो कम से कम भारत में पेयजल...

शंकरगढ़ ग्राउंड जीरो से: पानी की किल्लत के चलते लोग कर रहे हैं पलायन

शंकरगढ़ (प्रयागराज)। कभी देश को दिशा देने वाले इलाहाबाद यानि प्रयागराज की मौजूदा तस्वीर बेहद परेशान करने वाली है। उसके एक इलाके शंकरगढ़ में एक पूरे समुदाय को गुजारे के लिए भीख मांगनी पड़ रही है। पेट के अन्न...

करोड़ों खर्च कर भी ख़त्म होते नौलों पर बसावट का विस्तार भारी

विश्व भर में जलवायु परिवर्तन का हो हल्ला मचा हुआ है, जहां पहले नदियां बहती थीं वहां सूखा पड़ा हुआ है। बर्फ़ से लदे रह चांदनी रात में चमकने वाले पहाड़ अब काले पड़ गए हैं पर विश्व अभी...

ग्राउंड रिपोर्ट: खुद ढिबरी और लालटेन के दौर में जी रहा है दुनिया को रौशन करने वाला नेतरहाट

नेतरहाट (लातेहार)। आजादी के 74 साल और अलग राज्य गठन के 21 साल बाद झारखंड आज भी बुनियादी सुविधाओं से कोसों दूर हैं। इसका जीता जाता उदाहरण है लातेहार जिले का महुआडांड़ प्रखंड का कुरगी और ताहेर गांव। आदिम...
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