स्वच्छ शहर इंदौर में गंदा पानी पीने से मौत का कहर, सैकड़ों बीमार!

मध्यप्रदेश का इंदौर शहर ऐसा शहर है जिसे आठवीं बार भारत के स्वच्छ शहर का खिताब हासिल हुआ था। लेकिन यह कैसी स्वच्छता है जहां का पानी ज़हर बन जाए और किसी को कानों-कान ख़बर ना हो। 

इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से अब तक 13 लोग काल कवलित हो चुके हैं सैंकड़ों बीमार हैं। डायरिया और उल्टी की शिकायत के बाद अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराए गए हैं। सरकार ने अपने बचाव में तुरंत मृत परिवारों को दो-दो लाख देने और उपचारार्थ भर्ती लोगों के नि: शुल्क इलाज की घोषणा भी कर दी है। लेकिन इससे स्वच्छ शहर पर लगे दाग साफ़ नहीं हो सकते।

इन दुखद और दर्द भरे घावों को भरने के लिए नगर निगम और सरकार को उन स्थलों की पड़ताल करनी होगी जहां से नर्मदा जल में गंदे नालों और शौचालयों ने मिलकर इस पावन जल को दूषित किया है।

बताया जा रहा है कि दो वर्ष पहले नगर निगम में 75 वार्डों में दूषित जल मिलने की बात सामने आई थी जिसे एक अखबार ने प्रकाशित करने का जोखिम भी लिया था।किंतु क्षेत्र में कथित दबंग भाजपा नेता वर्तमान में केबिनेट मंत्री के भय से बात आई गई हो गई। अब मौतों के साथ बात आखिरकार उजागर हो ही गई किंतु कथित मंत्री से इस घटना का जवाब चाहा तो उसे घंटा सवाल कहकर टरकाने की कोशिश की गई। 

पत्रकार चीखता रहा इस हादसे पर मंत्री की अभद्र भाषा को लेकर किंतु उन पर इंदौर के स्वच्छ शहर का तमगों की खुमारी जारी रही।

बेशक यह कोई बड़ा सवाल नहीं था उनके मुताबिक यह तकनीकी खराबी से हुआ छोटा मोटा मामला है। यक़ीनन नागरिकों की जान का मलाल उन्हें क्यों हो?

इस बीच मध्य प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय दुबे ने स्थानीय अधिकारियों के साथ भगीरथपुरा क्षेत्र का दौरा करके हालात का जायजा लिया। भगीरथपुरा मध्य प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के विधानसभा क्षेत्र ‘इंदौर-1’ में आता है। कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि उल्टी-दस्त के प्रकोप से भगीरथपुरा में 1,400 से 1,500 लोग प्रभावित हुए जिनमें से लगभग 200 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं। मामला इंदौर हाईकोर्ट भी पहुंच गया कोर्ट ने नगर निगम प्रशासन से शीघ्र स्वच्छ जल भगीरथपुरा को देने का आदेश भी जारी किया गया है।

महत्वपूर्ण विषय यह है कि नगर निगम में इस मामले को संज्ञान ना लेने वाले दोषियों के ख़िलाफ़ अपराध पंजीबद्ध किए जाएं तथा उन 75 वार्डों के जल के बारे में तुरंत जांच की जाए जिनके बारे में मालवा अखबार ने चेताया था।

इस दुखद सरकार की लापरवाही से उपजे इस गंदले उर्फ जहरीले पानी कांड पर क्षेत्रीय मंत्री को अपनी बदजुबानी के लिए क्षमा भी मांगना चाहिए। मृतक परिवार के लिए राशि को कम से कम पांच लाख किया जाना चाहिए तथा उसे त्वरित कार्रवाई के ज़रिए भेजना चाहिए। चूंकि यह हादसा इंदौर प्रशासन की नाक के नीचे हुआ है इसलिए महापौर और नगर निगम आयुक्त पर भी कार्रवाई अपेक्षित है।

कितनी दुर्भाग्यपूर्ण है यह घटना स्वच्छ शहर इंदौर उसका भगीरथपुरा  जहां नर्मदा जल में दूषित जल ने मिलकर एक दर्जन से अधिक लोगों को  सीधे पानी के नाम पर जहर पिलाकर मार दिया।शर्म करो सरकार।नए साल के पहले दिन  आई ये ख़बर सबको रुला रही है।

(सुसंस्कृति परिहार लेखिका और एक्टिविस्ट हैं।)

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