बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा स्थित बेंच ने सोमवार (5 अक्टूबर) को मौखिक रूप से उस तरीके पर सवाल उठाया, जिसके तहत चुनाव प्राधिकरण चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के अंतर्गत नागरिकों के नाम हटा रहा है।
भारत निर्वाचन आयोग को सर्वोच्च न्यायालय की उन टिप्पणियों की याद दिलाते हुए, जिनमें कहा गया था कि आयोग यह सुनिश्चित करने के लिए बाध्य है कि सभी भारतीय नागरिकों को अंतिम मतदाता सूची में शामिल किया जाए, न्यायमूर्ति वाल्मीकि मेनेजेस और न्यायमूर्ति अमित जमसंदेकर की खंडपीठ ने आयोग से कहा: “फैसला पढ़िए, उसमें लिखा है कि चुनाव आयोग का यह दायित्व है कि वह सुनिश्चित करे कि सभी भारतीय नागरिक सूची में शामिल हों… अगर नागरिकों को बाहर रखा जाता है तो हम आपके एसआईआर का क्या करेंगे? अगर नागरिकों को सूची से हटाया जा रहा है तो इस पूरी एसआईआर प्रक्रिया का उद्देश्य ही क्या है?”
न्यायाधीशों ने चुनाव आयोग को मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के प्रावधानों की भी याद दिलाई, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि जब तक एसआईआर के तहत मसौदा मतदाता सूची को अंतिम रूप नहीं दिया जाता, तब तक मौजूदा मतदाता सूची ही मान्य रहेगी। इसलिए, उन्होंने चुनाव आयोग द्वारा पूर्व-भरे जनगणना प्रपत्र जमा न करने वाले नागरिकों के नाम एसआईआर से हटाने पर आपत्ति जताई।
“एसआईआर के माध्यम से आप ड्राफ्ट रोल से लोगों को नहीं हटा रहे हैं, बल्कि प्रभावी रूप से मौजूदा रोल से लोगों को हटा रहे हैं… आपका तर्क यह है कि चूंकि एसआईआर प्रक्रियाधीन है, इसलिए हमें मौजूदा रोल को नहीं देखना चाहिए और केवल ड्राफ्ट रोल पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए… हम मौजूदा सूची को नजरअंदाज नहीं कर सकते,” बेंच ने टिप्पणी की।
ये टिप्पणियां सालगांवकर परिवार द्वारा दायर एक याचिका की सुनवाई के दौरान की गईं, जिसमें दावा किया गया है कि पता बदलने के लिए फॉर्म 8 दाखिल करने के बावजूद उनके नाम मतदाता सूची के प्रारूप से हटा दिए गए हैं।
हालांकि, चुनाव आयोग ने यह तर्क दिया है कि एसआईआर दिशानिर्देशों के तहत, मतदाता के लिए पहले से भरा हुआ जनगणना प्रपत्र जमा करना अनिवार्य है – एक ऐसा प्रपत्र जिसके बारे में पीठ ने टिप्पणी की कि यह हमारे देश के इतिहास में कभी अस्तित्व में नहीं रहा।
ईसीआई ने तर्क दिया है कि किसी मतदाता को नई मतदाता सूची में अपना पता बदलवाने के लिए, उसे फॉर्म 8 के साथ जनगणना फॉर्म जमा करना होगा और यदि कोई मतदाता जनगणना फॉर्म जमा करने में विफल रहता है तो उसे फॉर्म 6 (नया शामिल होना) भरना होगा।
न्यायाधीशों ने इस तर्क पर आपत्ति जताते हुए कहा कि जनगणना प्रपत्र के साथ एक ‘घोषणा’ संलग्न होती है जिसमें यह प्रमाणित किया जाता है कि उक्त मतदाता (जिसने इस पर हस्ताक्षर किए हैं) मौजूदा मतदाता सूची में उल्लिखित क्षेत्र में ही निवास करता है।
पीठ ने कहा कि चुनाव आयोग नागरिकों को झूठी घोषणाएँ करने के लिए बाध्य नहीं कर सकता; यदि उन्होंने अपना निवास स्थान बदल लिया है, तो उनसे अनिवार्य रूप से जनगणना प्रपत्र जमा करने के लिए नहीं कहा जा सकता।
न्यायमूर्ति मेनेजेस ने टिप्पणी की, “यदि कोई मतदाता फॉर्म 8 लेकर आपके पास आता है और कहता है कि उसने अपना पता बदल लिया है, तो आप उसे यह नहीं कह सकते कि देखिए, आपका नाम मौजूदा मतदाता सूची में शामिल नहीं है, अब आपको फॉर्म 6 (नए मतदाता का नाम शामिल करने का फॉर्म) भरना होगा। आपके जनगणना फॉर्म में मूल रूप से यह घोषणा होती है कि व्यक्ति मौजूदा मतदाता सूची में उल्लिखित पते पर ही रहता है।
लेकिन सोचिए, यदि किसी ने अपना निवास स्थान बदल लिया है, तो क्या आप उसे पहले से भरे हुए जनगणना फॉर्म को जमा करके झूठी घोषणा करने के लिए बाध्य कर सकते हैं? वह व्यक्ति फॉर्म 8 क्यों नहीं दे सकता, क्योंकि उसका नाम तो वैसे भी मौजूदा सूची में है, वह केवल अपना पता बदलना चाहता है… जनगणना फॉर्म जमा करने के लिए बाध्य क्यों किया जाए?”
पीठ ने बताया कि नियम 12 में आपत्ति आदि का प्रावधान है और उस प्रावधान का सहारा लेते हुए, कोई नागरिक अनिवार्य रूप से पहले से भरे हुए जनगणना प्रपत्र को जमा करने के बजाय सीधे प्रपत्र 8 क्यों नहीं जमा कर सकता है।
पीठ ने टिप्पणी की “जब कोई व्यक्ति किसी विशेष पते पर नहीं रहता, तो वह पहले से भरे हुए जनगणना प्रपत्र को जमा करके झूठी घोषणा क्यों करे? यह झूठी घोषणा होगी क्योंकि उक्त जनगणना प्रपत्र में यह घोषणा की गई है कि अमुक व्यक्ति यहाँ रहता है… कहने का तात्पर्य यह है कि आप किसी को ऐसी झूठी घोषणा करने के लिए बाध्य नहीं कर सकते। साथ ही, किसी भी नागरिक को आपके इस जनगणना प्रपत्र पर हस्ताक्षर करने की आवश्यकता नहीं है… उन्हें हस्ताक्षर नहीं करने चाहिए… कोई व्यक्ति मतदाता सूची में शामिल होने के लिए आवेदन कैसे कर सकता है जब वह उस विशेष निर्वाचन क्षेत्र या वार्ड में नहीं रहता?”
ये टिप्पणियां तब की गईं जब चुनाव आयोग के वकील गौरीश अग्नि ने यह तर्क दिया कि मतदाताओं के लिए मसौदा मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए जनगणना प्रपत्र जमा करना अनिवार्य था। पीठ मंगलवार (6 अक्टूबर) को इस मामले की सुनवाई जारी रखेगी।
(जनचौक ब्यूरो)