केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) का यह निष्कर्ष है कि कथित नीट यूजी 2026 पेपर लीक एक सुनियोजित, कई राज्यों में फैली आपराधिक साज़िश का नतीजा था और इसमें नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स ने कथित तौर पर परीक्षा के गोपनीय सवाल लीक किए। ये सवाल कोचिंग चलाने वालों, दलालों और बिचौलियों के नेटवर्क के ज़रिए मोटी रकम के बदले उम्मीदवारों तक पहुँचाए गए।
एजेंसी ने राउज़ एवेन्यू स्थित विशेष अदालत में आरोपपत्र दाखिल की है, जिसमें 13 आरोपियों के नाम शामिल हैं। इनमें एनटीए द्वारा नियुक्त तीन सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स, कोचिंग चलाने वाले, बिचौलिए और उम्मीदवार शामिल हैं। आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के प्रावधानों के तहत आरोप लगाए गए हैं।
चार्जशीट के अनुसार, इस साज़िश की शुरुआत एनटीए के तीन सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स — बॉटनी एक्सपर्ट मनीषा गुरुनाथ मंधारे, केमिस्ट्री एक्सपर्ट प्रह्लाद विट्ठलराव कुलकर्णी और फिजिक्स एक्सपर्ट मनीषा संजय हवलदार — ने की थी। इन पर आरोप है कि उन्होंने अपने आधिकारिक पद का गलत इस्तेमाल करके परीक्षा से पहले नीट-यूजी 2026 के गोपनीय प्रश्न-पत्रों तक अनधिकृत पहुँच हासिल की और उन्हें सिंडिकेट के सदस्यों के साथ साझा किया।
सीबीआई का आरोप है कि लीक हुए पेपर एक व्यवस्थित नेटवर्क के ज़रिए बांटे गए, जिसमें तेजस शाह, शिवराज मोटेगांवकर, डॉ. मनोज शिरुरे, मनीषा संजय वाघमारे, धनंजय लोखंडे, शुभम मधुकर खैरनार, यश यादव, मांगीलाल बिवाल, दिनेश बिवाल और विकास बिवाल शामिल थे। इन सभी ने कथित तौर पर पेपर फैलाने और पेमेंट की व्यवस्था करने में खास भूमिका निभाई।
जांच में पाया गया कि परीक्षा से कई दिन पहले टेलीग्राम और व्हाट्सएप जैसे एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के ज़रिए पीडीएफ और इमेज फॉर्मेट में गोपनीय प्रश्न-पत्रों का आदान-प्रदान किया गया था। सीबीआई के अनुसार, ज़ब्त किए गए मोबाइल फ़ोन, पेन ड्राइव और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की फ़ोरेंसिक जांच से ऐसे डिजिटल सबूत मिले हैं जिनसे पता चलता है कि लीक हुए पेपर कई आरोपियों के बीच कैसे आगे बढ़े।
एजेंसी ने कथित तौर पर पेपर के आगे बढ़ने की प्रक्रिया (चेन ऑफ़ सर्कुलेशन) का पता लगाया है। इसके मुताबिक, मांगीलाल बिवाल को टेलीग्राम के ज़रिए यश यादव से लीक हुए सवाल मिले थे। आरोप है कि बिवाल ने इस लेन-देन की गारंटी के तौर पर यादव के एक साथी को अपने 10वीं और 12वीं के असली सर्टिफ़िकेट और एक साइन किया हुआ खाली चेक दिया था। चार्जशीट में कहा गया है कि बाद में तलाशी के दौरान ये दस्तावेज़ बरामद किए गए।
जांचकर्ताओं का यह भी आरोप है कि यश यादव को लीक हुए पेपर नासिक के आरोपी शुभम मधुकर खैरनार से मिले थे। यादव के मोबाइल फ़ोन की फ़ोरेंसिक जांच से कथित तौर पर “एपी ब्रोकर” नाम से सेव किए गए कॉन्टैक्ट (जिसकी पहचान खैरनार के तौर पर हुई) के साथ चैट और लीक हुए सवालों वाली पीडीएफ फ़ाइलें मिलीं।
सीबीआई के अनुसार, खैरनार ने धनंजय लोखंडे से ₹25 लाख की कथित डील में लीक हुए पेपर हासिल किए थे। पूछताछ के दौरान, खैरनार ने कथित तौर पर पैसों के लेन-देन की जानकारी दी।
जांच में यह भी दावा किया गया है कि लोखंडे को लीक हुए पेपर मनीषा संजय वाघमारे से मिले थे। आरोप है कि उन्होंने बिचौलियों के ज़रिए क्वेश्चन पेपर की फ़िज़िकल कॉपी पहुँचाने का इंतज़ाम किया था। वाघमारे के घर पर तलाशी के दौरान, जांचकर्ताओं को एक मोबाइल फ़ोन मिला जिसमें “नीट 2026” नाम का एक व्हाट्सऐप ग्रुप था; एजेंसी इसे अहम सबूत मानती है।
चार्जशीट में यह भी आरोप लगाया गया है कि वाघमारे एनटीए के केमिस्ट्री एक्सपर्ट प्रह्लाद कुलकर्णी के संपर्क में थीं। कुलकर्णी ने नीट-यूजी 2026 के लिए केमिस्ट्री पेपर का मराठी से अंग्रेज़ी में अनुवाद (बैक ट्रांसलेशन) किया था। सीबीआई के अनुसार, वाघमारे ने उन छात्रों के ज़रिए बायोलॉजी और केमिस्ट्री के लीक सवाल हासिल किए, जिनका परिचय उन्होंने सब्जेक्ट एक्सपर्ट मंधारे और कुलकर्णी से कराया था।
एजेंसी ने जांच के दौरान पूछताछ किए गए उम्मीदवारों के बयानों का भी ब्यौरा दिया है। चार्जशीट के मुताबिक, एक उम्मीदवार और उसके पिता को कथित तौर पर ₹4 लाख में नीट-यूजी 2026 क्वेश्चन पेपर तक पहुँच देने, साथ ही कोचिंग सपोर्ट और एनटीए के किसी सब्जेक्ट एक्सपर्ट द्वारा ऑफ़लाइन रिविज़न क्लास देने का ऑफ़र दिया गया था। सीबीआई का कहना है कि ये बातचीत 2025 के आखिर और 2026 की शुरुआत में एक बड़ी साज़िश के तहत हुई थी।
एजेंसी का कहना है कि इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, बरामद दस्तावेज़ों, चैट रिकॉर्ड और गवाहों के बयानों की फोरेंसिक जांच से मिलकर कथित आपराधिक साज़िश, सरकारी अधिकारियों द्वारा अपने पद का गलत इस्तेमाल और नीट-यूजी 2026 के आयोजन से पहले परीक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारी को गैर-कानूनी तरीके से फैलाने की बात साबित होती है।
सीबीआई ने स्पेशल सीबीआई कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है। अब कोर्ट सबूतों की जांच करेगा और मामले का संज्ञान लेने पर फैसला करेगा।
(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और क़ानूनी मामलों के जानकार हैं।)