लखनऊ। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) ने उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार पर लोकतंत्र का गला घोंटने और प्रदेश को एक पूर्ण ‘पुलिसिया निगरानी राज्य’ (सर्विलांस स्टेट) में तब्दील करने का आरोप लगाते हुए 27 अगस्त को प्रदेश के जिला मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन की घोषणा की।
भाकपा (माले) के राज्य सचिव सुधाकर यादव ने सोमवार को यहां लालकुआं स्थित पार्टी कार्यालय में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में पुलिस और स्थानीय अभिसूचना इकाई (एलआईयू) द्वारा वामपंथी और किसान आंदोलन से जुड़े नेताओं व कार्यकर्ताओं को धमकाकर उनका निजी डेटा मांगा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि थानों से फोन कर, व्हाट्सएप संदेश भेजकर और प्रोफार्मा थमाकर निम्नलिखित संवेदनशील जानकारियां जबरन जुटाने का दबाव बनाया जा रहा है जिसमें आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट और बैंक खाते का विवरण, पारिवारिक वंशावली (फैमिली ट्री) और निजी संपर्कों की सूची, चल-अचल संपत्ति, वैध/अवैध व्यवसाय और संपत्ति विवाद की जानकारी के अलावा सोशल मीडिया प्रोफाइल, डिजिटल गतिविधियां और आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी माँगी जा रही है।
उन्होंने कहा कि डेटा न देने की स्थिति में कार्यकर्ताओं को गिरफ्तारी और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां दी जा रही हैं। गोरखपुर, अयोध्या, महाराजगंज, बस्ती, गाजीपुर, पीलीभीत, सीतापुर, लखीमपुर खीरी, जालौन, बांदा, मुरादाबाद और मथुरा सहित दर्जनों जिलों में यह अवैध प्रक्रिया जारी है।\
यादव ने स्पष्ट किया कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा घोषित और संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित ‘निजता के मौलिक अधिकार’ का यह खुला उल्लंघन है। राजनीतिक कार्यकर्ताओं को अपराधी या आतंकवादी की तरह चिन्हित कर उनकी व्यक्तिगत जिंदगी में दखलंदाजी करना राज्य प्रायोजित तानाशाही है।
उन्होंने कहा, “फर्जी मुठभेड़ों और हिरासत में मौतों के जरिए प्रदेश में पहले ही ‘पुलिस राज’ कायम किया जा चुका है। अब 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लालकिले से गढ़े गए ‘दिमागी नक्सल’ जैसे विभाजनकारी बयानों की आड़ में प्रशासन हर असहमति को कुचलने पर उतारू है। जंतर मंतर आंदोलन, छात्रों, युवाओं, जेनरेशन-जी व अल्फा और जागरूक नागरिकों के बढ़ते प्रतिरोध से घबराकर सरकार जासूसी का सहारा ले रही है।
भाकपा (माले) राज्य सचिव ने चेतावनी दी कि यदि राजनीतिक कार्यकर्ताओं के अवैध सर्विलांस और प्रताड़ना की यह तानाशाही कार्रवाई तत्काल बंद नहीं हुई, तो सड़कों पर व्यापक जन-प्रतिरोध खड़ा किया जाएगा। 27 अगस्त को जिला मुख्यालयों पर राज्यव्यापी धरना-प्रदर्शन के साथ पार्टी अन्य विपक्षी व जनवादी दलों को भी एकजुट कर इस अलोकतांत्रिक कदम का पुरजोर विरोध करेगी।
(प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित)