लखनऊ। जंतर मंतर पर चल रहे छात्र-युवा आंदोलन और संसद मार्च के समर्थन में भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माले) ने सोमवार को उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में राज्यव्यापी प्रतिवाद मार्च, प्रदर्शन और धरने आयोजित किए। जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन के बाद राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपे गए।
प्रदर्शनों के माध्यम से शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को तत्काल भंग करने, उसकी जगह जवाबदेह, पारदर्शी और लोकतांत्रिक परीक्षा प्रणाली स्थापित करने, नई शिक्षा नीति-2020 को वापस लेने, पेपर लीक और शिक्षा क्षेत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार पर प्रभावी रोक लगाने तथा सभी के लिए सस्ती, समावेशी और गुणवत्तापूर्ण सार्वजनिक शिक्षा सुनिश्चित करने की मांग उठाई गई।
राजधानी लखनऊ में परिवर्तन चौक से जिलाधिकारी कार्यालय तक मार्च निकाला गया। इसी तरह गोरखपुर, देवरिया, बलिया, गाजीपुर, चंदौली, वाराणसी, मिर्जापुर, सोनभद्र, रायबरेली, अयोध्या, बस्ती, सीतापुर, लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, कानपुर, जालौन सहित अनेक जिलों में भी एकजुटता कार्यक्रम आयोजित किए गए।
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने दिल्ली के जंतर मंतर आंदोलन और संसद मार्च पर मोदी सरकार की दमनात्मक कार्रवाई की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि न्याय और जवाबदेही की मांग को लेकर छात्र-युवा पिछले एक महीने से शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हैं तथा 23 दिनों तक ऐतिहासिक भूख हड़ताल चली।
18 जुलाई को 21 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को पुलिस द्वारा जबरन उठाकर ले जाना और आइसा के अनशनकारियों को हिरासत में लेने की कोशिश यह साबित करती है कि सरकार संवाद के बजाय दमन के रास्ते पर चल रही है।
वक्ताओं ने कहा कि भ्रष्टाचार, पेपर लीक और सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था के सुनियोजित विनाश के खिलाफ देशभर में बढ़ते जनाक्रोश का सरकार के पास कोई जवाब नहीं है। इसलिए मोदी सरकार लोकतांत्रिक असहमति को कुचलने, आंदोलनकारियों को धमकाने और पुलिस बल के सहारे उनकी आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। यह लोकतंत्र और संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला है।
उन्होंने कहा कि तमाम दमन के बावजूद आइसा अध्यक्ष नेहा, मनीष, आमीन सहित अन्य साथियों ने 23 दिनों तक अपना अनिश्चितकालीन अनशन जारी रखकर संघर्ष की मिसाल पेश की। आज जंतर मंतर से संसद मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस ने कई स्थानों पर लाठीचार्ज कर मार्च रोकने की कोशिश की, लेकिन देशभर से पहुंचे हजारों छात्र-युवाओं ने अपने दृढ़ संकल्प से सरकार की मंशा को विफल कर दिया। यह लोकतांत्रिक संघर्ष की महत्वपूर्ण जीत है।
संसद मार्च के अवसर पर 23वें दिन आइसा अध्यक्ष नेहा सहित तीनों प्रमुख अनशनकारियों और अन्य साथियों ने अपना अनशन समाप्त किया और शाम को आंदोलनकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मिलकर ज्ञापन दिया। शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव तथा छात्रों के अधिकारों की लड़ाई आगे भी पूरी ताकत से जारी रहेगी।
(प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित)