जज तबस्सुम ख़ान को निशाना बनाने का मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने लिया स्वत: संज्ञान

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने नरसिंहपुर मंडल के अंतर्गत आने वाले नर्मदापुरम की जिला एवं सत्र न्यायाधीश तबस्सुम खान को उनके न्यायिक कार्य के कारण दी गई धमकियों और उनके खिलाफ चलाए गए दुष्प्रचार का स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार को उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने और दोषियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की जानकारी देने का निर्देश दिया है।

जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनिंद्र सिंह की खंडपीठ ने कहा कि अदालत के आदेशों को ऊपरी अदालत में चुनौती दी जा सकती है, लेकिन किसी न्यायाधीश को केवल इसलिए धमकाया नहीं जा सकता कि उन्होंने ऐसा आदेश दिया है जो समाज के किसी वर्ग को पसंद नहीं है।

पीठ ने बुधवार (1 जुलाई) को पारित अपने आदेश में कहा कि जज तबस्सुम खान को निशाना बनाने जैसी घटनाएं न्यायपालिका की स्वतंत्रता और न्यायिक अधिकारियों के निर्भीक होकर काम करने की क्षमता पर सीधा असर डालती हैं।

हाईकोर्ट ने राज्य के पुलिस महानिदेशक तथा अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव (गृह) को निर्देश दिया कि वे तीन दिनों के भीतर अदालत को बताएं कि जज खान को निशाना बनाने वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है।

अदालत ने नर्मदापुरम के पुलिस अधीक्षक को भी जज तबस्सुम खान को सुरक्षा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। इस पर राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि उन्हें पहले ही सुरक्षा प्रदान की जा चुकी है। उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी ने यह भी बताया कि इस मामले में एक एफआईआर दर्ज कर ली गई है।

गौरतलब है कि जज तबस्सुम खान ने 12 जून को साल 2022 में नर्मदापुरम में एक मवेशी ट्रांसपोर्टर की पीट-पीटकर हत्या के मामले में सात गौरक्षकों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद उन्हें सोशल मीडिया पर धमकियां दी जाने लगीं और उनके खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं।

ख़बरों के अनुसार, एक व्यक्ति ने वीडियो जारी कर धमकी दी कि यदि दोषियों को रिहा नहीं किया गया तो ‘नरसंहार’ होगा। वहीं, एक अन्य सोशल मीडिया अकाउंट से हिंदुओं से जज को देश से बाहर निकालने की अपील की गई। कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि उनका फैसला उनके धर्म से प्रभावित था।

इस मामले पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन ने भी चिंता जताई थी। संगठन ने कहा था कि यदि जजों को कानून के अनुसार दिए गए फैसलों के कारण व्यक्तिगत परिणाम भुगतने का डर दिखाया जाएगा, तो इसका भारतीय न्याय व्यवस्था की ‘रीढ़’ मानी जाने वाली जिला अदालतों की स्वतंत्रता और कार्यप्रणाली पर गंभीर नकारात्मक असर पड़ेगा।

शुक्रवार (3 जुलाई) को यूनाइटेड क्रिश्चियन फोरम ने भी एक बयान जारी कर जज तबस्सुम खान के प्रति एकजुटता व्यक्त की और उनके खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की निंदा की।

फोरम ने कहा, “यूनाइटेड क्रिश्चियन फोरम तबस्सुम खान के खिलाफ चलाए जा रहे इस सुनियोजित अभियान के विरोध में उनके साथ मजबूती से खड़ा है। हमें देश की स्वतंत्र न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। हम उम्मीद करते हैं कि राज्य सरकार उन्हें जल्द से जल्द समुचित सुरक्षा उपलब्ध कराएगी और इस नफरत फैलाने वाले अभियान को भड़काने वाले लोगों के खिलाफ कानून के तहत शीघ्र कार्रवाई करेगी।”

फोरम के राष्ट्रीय अध्यक्ष माइकल विलियम्स ने कहा कि यह केवल एक जज की सुरक्षा का सवाल नहीं है, बल्कि लोकतंत्र के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ की सुरक्षा का मुद्दा है।

फोरम ने यह भी याद दिलाया कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर संयुक्त राष्ट्र के बुनियादी सिद्धांतों के अनुसार, यह राज्य की जिम्मेदारी है कि जज किसी भी अनुचित दबाव, प्रलोभन या धमकी से मुक्त होकर स्वतंत्र रूप से निर्णय ले सकें।

(वायर से साभार)

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