उत्तर प्रदेश में इंडिया गठबंधन में वाम दलों की अनदेखी स्वीकार नहीं होगी : भाकपा (माले)

लखनऊ। भाकपा (माले) ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में इंडिया गठबंधन की चर्चा करते समय यह नहीं भुलाया जा सकता कि वाम दल भी इस गठबंधन का अभिन्न हिस्सा हैं। गठबंधन की संरचना और भविष्य को केवल सपा-कांग्रेस तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता।

पार्टी समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के उस हालिया बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त कर रही थी, जिसमें उन्होंने कहा है कि वर्ष 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में वही इंडिया गठबंधन रहेगा, जो 2024 के लोकसभा चुनाव में था।

भाकपा (माले) के राज्य सचिव कॉमरेड सुधाकर यादव ने कहा कि भाजपा, एनडीए और देश में बढ़ते फासीवाद को परास्त करने की लड़ाई व्यापक लोकतांत्रिक एकता और वामपंथी हस्तक्षेप के बिना मुकम्मल नहीं हो सकती। वामपंथ ने हमेशा सांप्रदायिकता, कॉरपोरेट लूट, संविधान-विरोधी हमलों और जनविरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष की अग्रिम पंक्ति में रहकर भूमिका निभाई है। इसलिए गठबंधन की राजनीति में उसकी भागीदारी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में इंडिया गठबंधन के घटक दलों के बीच हुए आधिकारिक सीट-बंटवारे में वाम दलों को एक भी सीट नहीं दी गई थी, जबकि बिहार सहित अन्य राज्यों में वामपंथी दलों को सम्मानजनक हिस्सेदारी मिली थी। इसके बावजूद भाकपा (माले) और माकपा ने भाजपा को पराजित करने तथा लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के बड़े लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए समाजवादी पार्टी समेत इंडिया गठबंधन के उम्मीदवारों का पूरे मनोयोग से समर्थन किया।

इस संयुक्त प्रयास का परिणाम था कि उत्तर प्रदेश ने भाजपा को अपने दम पर बहुमत हासिल करने से रोकने में निर्णायक भूमिका निभाई।

कॉमरेड सुधाकर यादव ने कहा कि सपा प्रमुख के ताजा बयान से यह आशंका पैदा होती है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में भी इंडिया गठबंधन के नाम पर केवल सपा और कांग्रेस के बीच सीटों का बंटवारा होगा तथा वाम दलों को फिर हाशिए पर रखा जाएगा। यदि ऐसा होता है, तो वाम दल इसे स्वीकार नहीं करेंगे। लोकसभा चुनाव में भाजपा को हराने के व्यापक उद्देश्य से दिया गया समर्थन किसी भी तरह से विधानसभा चुनावों में वाम दलों की राजनीतिक उपेक्षा का आधार नहीं बन सकता।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि भाकपा (माले) ने 2024 के लोकसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन के प्रत्याशियों का समर्थन इस उम्मीद और राजनीतिक समझ के साथ किया था कि 2027 के विधानसभा चुनाव में गठबंधन की साझी ताकतों को उचित प्रतिनिधित्व मिलेगा और वाम दलों को सम्मानजनक हिस्सेदारी दी जाएगी। इसलिए आवश्यक है कि अखिलेश यादव अपने हालिया बयान पर पुनर्विचार करें और आगामी विधानसभा चुनाव के लिए सीटों के बंटवारे तथा गठबंधन की रूपरेखा तय करते समय वाम दलों को भी बराबरी के साझेदार के रूप में शामिल करें।

माले राज्य सचिव ने कहा कि भाजपा के खिलाफ सड़क से सदन तक संघर्ष की बात करें तो वामपंथी दल कभी पीछे नहीं रहे हैं। किसानों, मजदूरों, नौजवानों, महिलाओं, दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के सवालों को लेकर वामपंथ लगातार संघर्ष करता रहा है। यह संघर्ष केवल सड़कों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसकी गूंज विधानसभा के भीतर भी सुनाई देनी चाहिए। लोकतंत्र, संविधान और सामाजिक न्याय की रक्षा के लिए उत्तर प्रदेश की विधानसभा में वामपंथी उपस्थिति आज पहले से कहीं अधिक जरूरी है।

(प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित)

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