‘सतलुज’ भारत से बाहर भी नहीं दिखेगी

ओटीटी प्लेटफार्म ज़ी5 ने फ़िल्म ‘सतलुज’ अपने अन्तर्राष्ट्रीय कैटलॉग से भी हटा दी है यानी भारत से बाहर के दर्शकों के लिए भी यह फ़िल्म अब उपलब्ध नहीं होगी।

फ़िल्म के निर्देशक हनी त्रेहान ने ‘स्क्रीन’ से बातचीत में इसकी पुष्टि की। लगभग चार साल से सेंसर में फंसी फ़िल्म ‘पंजाब 95’ नाम बदलकर ‘सतलुज’ के रूप में 3 जुलाई को सीधे ज़ी5 पर रिलीज़ हुई थी लेकिन दो दिन बाद ही कथित रूप से सूचना प्रसारण मंत्रालय के आदेश ओटीटी प्लेटफार्म ने फ़िल्म की भारत में स्ट्रीमिंग रोक दी थी।

मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा पर केंद्रित फ़िल्म इस तरह ओटीटी से हटाये जाने के बाद चर्चा में आ गई। पंजाब में जहां गुरद्वारों और गांवों में फ़िल्म के प्रदर्शन होने लगे, पंजाब से बाहर लोग इंटरनेट, सोशल मीडिया में साझा किए जाने से फ़िल्म देखने लगे।

फ़िल्म को लेकर पंजाब में अस्सी और नब्बे के दशक में उग्रवाद के दौर पर चर्चा होने लगी और पंजाब, जहाँ अगले साल विधानसभा चुनाव होने लगे हैं, राजनीति भी गरमाने लगी।

दिलजीत दोसांझ अभिनीत फ़िल्म की सोशल मीडिया में काफ़ी तारीफ़ भी हो रही है और “एकतरफा” प्रस्तुति के आरोप भी लग रहे हैं।

फ़िल्म उग्रवाद के दौर में पंजाब के ‘पुलिस स्टेट’ बन जाने की कहानी दिखाती है जिस दौरान पुलिस पर उग्रवाद से निबटने के नाम पर सैकड़ों लोगों को ग़ायब करने, फ़र्ज़ी एनकाउंटर करने और ग़ैर क़ानूनी रूप से दाह संस्कार करने के आरोप हैं। फ़िल्म के मुख्य किरदार खालड़ा ने शवदाह गृहों के रिकॉर्ड के आधार पर आंकड़े जुटाए थे और इस बारे में सरकार से सवाल किया था और बाद में उनका भी पुलिस द्वारा अपहरण कर लिया गया और पुलिस हिरासत में यातना देकर उनकी हत्या की गई।

(जनचौक ब्यूरो)

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