Sunday, November 27, 2022

नॉर्थ ईस्ट डायरी: असम में होर्डिंग को खराब करने के मामले ने भाषाई कटुता का माहौल बनाया

Follow us:

ज़रूर पढ़े

असम के बंगाली भाषी बराक घाटी के कछार जिले में असमिया में लिखे राज्य सरकार के होर्डिंग को कथित रूप से खराब करने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। कछार की एसपी रमनदीप कौर ने बताया कि समर दास (34) और राजू देब (33) के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 425 और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान की रोकथाम अधिनियम की धारा 3 के तहत मामला दर्ज किया गया है। अधिकारी ने कहा कि पुलिस ने जल जीवन मिशन, जिस विभाग के होर्डिंग थे, द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत पर कार्रवाई की।

कौर ने कहा, “यह सरकारी संपत्ति है और उन पर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के लिए मामला दर्ज किया गया है।” दो संगठन ऑल बंगाली स्टूडेंट्स यूथ ऑर्गनाइजेशन (एबीएसवाईओ) और बंगाली डेमोक्रेटिक यूथ फ्रंट (बीडीवाईएफ) कथित तौर पर इस घटना में शामिल थे। दास और देब एबीएसवाईओ के सदस्य हैं।
घटना पहले सोमवार को सामने आई जिसमें कुछ लोग सिलचर रेलवे स्टेशन के पास स्थित होर्डिंग को तोड़ते हुए दिखाई दे रहे थे। असमिया अक्षरों को धुंधला कर दिया गया था, और नीचे काली स्याही में ‘बांग्ला लेखन’, या ‘बंगाली में लिखना’ लिखा गया था।
बराक घाटी के तीन जिले – कछार, करीमगंज और हैलाकांडी – एक बंगाली भाषी अंचल हैं।

असम में कई दशकों से भाषा को लेकर रस्साकशी रही है। 1960 के दशक में दरारें और गहरी हो गईं जब सरकार ने असम राजभाषा अधिनियम (1960) पारित किया जिसने असमिया को राज्य की आधिकारिक भाषा के रूप में प्रस्तावित किया। असमिया और बंगालियों के बीच ‘भाषा युद्ध’ के कारण विभाजन के दोनों ओर कई ‘शहीद’ हुए हैं। 19 मई, 1961 को सिलचर रेलवे स्टेशन पर पुलिस की गोलीबारी में 11 लोग मारे गए थे और तब से बराक घाटी में इस दिन को “भाषा शहीद दिवस” के रूप में मनाया जाता है। घटना के बाद, असमिया राज्य की आधिकारिक भाषा बनी रही, लेकिन अपवाद के रूप में, बराक घाटी जिलों में बंगाली को आधिकारिक भाषा का दर्जा दिया गया था।

एबीएसवाईओ के रथिंद्र दास ने कहा कि उनके सदस्य केवल साइनबोर्ड पर असमिया के इस्तेमाल का शांतिपूर्ण विरोध करने गए थे, और दो युवकों को फंसाया गया है। “यह काम कुछ बदमाशों द्वारा किया गया था। हम केवल विरोध करने गए थे और किसी संपत्ति को नष्ट करने का कोई इरादा नहीं था। हमारे लिए सिलचर रेलवे स्टेशन एक पवित्र स्थान है जहां 11 बंगाली अपनी भाषा के लिए शहीद हुए थे।’ उन्होंने कहा कि बराक घाटी में लगभग सभी होर्डिंग बंगाली में लिखे गए हैं।
भाजपा प्रवक्ता और सिलचर के सांसद राजदीप रॉय ने आरोप लगाया कि यह घटना राज्य में भाषा के नाम पर हिंसा भड़काने की साजिश का हिस्सा हो सकती है। उन्होंने ट्वीट किया: “विडंबना यह है कि सीएम हिमन्त विश्व शर्मा द्वारा  दुर्गापूजा की पूरी ‘सप्तमी’ को बराक के ‘बंगालियों’ के साथ बिताने के कुछ दिनों बाद ही भाषा का मुद्दा सामने आया है! क्या यह संयोग है या इसके पीछे कोई दुर्भावनापूर्ण मंशा है?”

असम में बंगाली भाषी बराक घाटी और असमिया भाषी ब्रह्मपुत्र घाटी के बीच ऐतिहासिक विभाजन रहा है। असम राजभाषा अधिनियम, 1960, जिसने असमिया को राज्य की आधिकारिक भाषा घोषित किया, में बराक घाटी जिलों में आधिकारिक उद्देश्यों के लिए बंगाली के उपयोग के लिए विशेष प्रावधान हैं।

(दिनकर कुमार द सेंटिनल के संपादक रहे हैं। आजकल आप गुवाहाटी में रहते हैं।)

तत्काल समाचारों के लिए, हमारा जनचौक ऐप इंस्टॉल करें

Latest News

Constitution Day Special : देहरादून में छपा था भारत का हस्तलिखित संविधान

विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की शासन व्यवस्था को संचालित करने वाला विश्व का सबसे बड़ा संविधान न केवल...
जनचौक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें

Janchowk Android App

More Articles Like This

- Advertisement -