लघु बचत योजनाओं में ब्याज दर कटौती के फैसले पर भारी पड़ा बंगाल का चुनाव

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अपने सुना होगा कि सुबह का भूला शाम को घर लौट आता है तो उसे भूला नहीं कहते लेकिन हमारे देश की वित्त मंत्री जी शाम को भूल गयी थीं पर अगले दिन वापस लौट आयीं! मोदी सरकार ने छोटी बचत की योजनाओं पर ब्याज दरों में कटौती के फैसले को 24 घंटे के भीतर ही वापस ले लिया है। वित्त मंत्रालय की ओर से एनएससी और पीपीएफ सहित छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरों में कटौती की अधिसूचना जारी करने के कुछ घंटों बाद ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस आदेश को वापस लेने की घोषणा की है।

आज सुबह केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ट्वीट कर जानकारी दी वह आदेश ‘भूलवश’ जारी हो गया था। उसे वापस लिया जा रहा है। अब जो नौकरशाह वित्त मंत्रालय में काम कर चुके हैं और वित्त मामलों के विशेषज्ञ यह अच्छी तरह जानते हैं कि वित्त मंत्रालय से ऐसे आदेश भूलवश जारी नहीं होते। इसके लिए कई दिनों तक फाइल चलती है। इस पर संबंधित विभाग के डाइरेक्टर, ज्वाइंट सेक्रेटरी से लेकर एडिशनल सेक्रेटरी और सेक्रेटरी तक की सहमति ली जाती है। इस फैसले को लेने से पहले वित्त मंत्री आरबीआई समेत अलग-अलग संस्थाओं और लोगों से विचार विमर्श करती हैं और अपनी मंजूरी देती हैं। वित्त मंत्री की मंजूरी के बाद ही आदेश निकाला जाता है।

छोटी बचत की ब्याज दर पर तो विशेष सावधानी रखी जाती है। ऐसा इसलिए, क्योंकि वर्ष 2016 में इसी तरह के एक नोटिफिकेशन पर हंगामा मच गया था। उस समय पीपीएफ और वरिष्ठ नागरिक बचत योजना पर ब्याज दर में कटौती पर जो हंगामा मचा था कि तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस आर्डर को निकालने वाले सभी अधिकारियों की भरपूर क्लास ली थी। उसके बाद रिवाज्ड आर्डर निकला था। उसके बाद से ही छोटी बचत की योजना में ब्याज दर घटाने की फाइल दूर तक जाने लगी।

दरअसल, ब्याज दरें श्यामला गोपीनाथ कमेटी की रिपोर्ट के हिसाब से तय होती हैं। जब प्रणब मुखर्जी वित्त मंत्री हुआ करते थे, तब उन्होंने छोटी बचत की योजनाओं पर ब्याज दर तय करने के लिए एक फार्मूला बनवाया था। यह फार्मूला रिजर्व बैंक की तत्कालीन डिप्टी गवर्नर श्यामला गोपीनाथ की अध्यक्षता वाली कमेटी ने तय किया था। अभी शक्तिकांत दास, जो रिजर्व बैंक के गवर्नर हैं, वह उस समय केंद्रीय वित्त मंत्रालय के बजट विभाग में एडिशनल सेक्रेटरी थे। वह भी इस कमेटी के सदस्य थे। इनके अलावा राजीव कुमार, जो अभी नीति आयोग के उपाध्यक्ष हैं, वह उस समय फिक्की के महासचिव हुआ करते थे और वह भी इस कमेटी के सदस्य थे। इसी कमेटी ने जो फार्मूला तय किया था, उसी से छोटी बचत की योजनाओं का ब्याज दर तय किया जाता है।

दरअसल, माना जा रहा है कि पश्चिम बंगाल, असम और तीन अन्य राज्यों में चल रहे विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को किसी नुकसान से बचाने के लिए ब्याज दरों में कटौती का फैसला वापस लिया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, नेशनल स्मॉल सेविंग फंड (एनएसएसएफ) में पश्चिम बंगाल का योगदान सबसे ज्यादा है। यही वजह है कि सरकार ने बंगाली मतदाताओं की नाराजगी से बचने के लिए अपने फैसले को एक दिन में ही पलट दिया।पश्चिम बंगाल ने योगदान के मामले में उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। पिछले कुछ सालों में देखा गया है कि एनएसएसएफ में बंगाल का योगदान लगातार बढ़ता गया। 2007-08 में जो 12.4 प्रतिशत था, वह 2009-10 में बढ़कर 14 फीसदी से अधिक हो गया। वहीं, 2017-18 में बढ़कर 15.1 प्रतिशत हो गया। 2017-18 में हुए 5.96 लाख करोड़ रुपये के स्मॉल सेविंग्स कलेक्शन में से बंगाल का कंट्रीब्यूशन करीब 90,000 करोड़ रुपये था। इस फैसले से चुनाव पर असर पड़ना निश्चित था, इसलिए आनन फानन में इसे वापस लिया गया है।

वित्त मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को लघु बचत योजनाओं पर ब्याज दरों में कटौती के फैसले को वापस लेने तथा पुरानी दरों को बनाये रखने के लिये औपचारिक आदेश जारी किया। इससे पहले, दिन में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार लघु बचत योजनाओं पर ब्याज दरों में बड़ी कटौती के फैसले को वापस लेगी।

कार्यालय ज्ञापन के अनुसार यह निर्णय किया गया है कि एक अप्रैल से शुरू वित्त वर्ष 2021-22 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के लिये लघु बचत योजनाओं पर ब्याज दरें 2020-21 की चौथी तिमाही एक जनवरी 2021 से 31 मार्च 2021 के लिये अधिसूचित दर के समान रहेंगी। यानी उसमें कोई बदलाव नहीं होगा। बयान के अनुसार, उचित प्राधिकार ने इसे मंजूरी दी है। सीतारमण ने सुबह ट्वीट किया, भारत सरकार की छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दर वही रहेगी जो 2020-2021 की अंतिम तिमाही में थी, यानी जो दरें मार्च 2021 तक थीं। पहले दिया गया आदेश वापस लिया जाएगा।

बुधवार को जारी वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, नये वित्त वर्ष की पहली तिमाही के लिये लोक भविष्य निधि (पीपीएफ) पर ब्याज दर 0.7 प्रतिशत कम कर 6.4 प्रतिशत जबकि राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र (एनएससी) पर 0.9 प्रतिशत कम कर 5.9 प्रतिशत कर दी गयी थी। लघु बचत योजनाओं पर ब्याज दरों की प्रत्येक तिमाही आधार पर समीक्षा होती है और अधिसूचित की जाती है। पुरानी दरें बरकरार रहने से पीपीएफ और एनएससी पर सालाना ब्याज दरें 7.1 प्रतिशत और 6.8 प्रतिशत बनी रहेंगी। अन्य लघु बचत योजनाओं पर भी पिछली तिमाही की ब्याज दरों को बरकरार रखा गया है।

दरअसल छोटी बचत योजनाओं में निवेश करने वाले लोगों को झटका देते हुए केंद्र की भाजपा सरकार ने बुधवार को पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ) और नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (एनएससी) समेत छोटी बचत की योजनाओं पर ब्याज दरों में 1.1 प्रतिशत तक की कटौती की थी। यह कटौती एक अप्रैल से शुरू हुए वित्त वर्ष 2021-22 की पहली तिमाही के लिए की गई थी। सोशल मीडिया यूजर्स और विपक्षी पार्टियों द्वारा इसका भारी विरोध किया गया।

सोशल मीडिया पर भारी विरोध के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को कहा कि सरकार छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दर घटाने के फैसले को वापस लेगी और उन्होंने ब्याज दरों को 31 मार्च को खत्म हुए वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही के स्तर पर लाने का आश्वासन दिया। हालांकि, इसके बाद भी कांग्रेस ने सरकार पर हमला बोला है और सवाल किया कि आप सरकार चला रहे हैं या सर्कस।

आज कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने सीतारमण पर निशाना साधा.राहुल गांधी ने ट्वीट किया, ‘’पेट्रोल-डीज़ल पर तो पहले से ही लूट थी, चुनाव ख़त्म होते ही मध्यवर्ग की बचत पर फिर से ब्याज कम करके लूट की जाएगी. जुमलों की झूठ की, ये सरकार जनता से लूट की!’’

प्रियंका गांधी ने लिखा, “सरकार ने आमजनों की छोटी बचत वाली स्कीमों की ब्याज दरों में कटौती कर दी थी। आज सुबह जब सरकार जागी तो उसको पता चला कि अरे ये तो चुनाव का समय है।सुबह उठते ही सारा दोष ओवरसाइट पर मढ़ दिया।’’

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेता डेरेक ओ ब्रायन का कहना है कि सरकार चुनाव के कारण डर गई है और फैसले को वापस ले लिया, लेकिन चुनाव के बाद कैंची फिर से चल सकती है। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा ‘निर्मला जी यह भी हमें बता दें कि किसकी “लापरवाही ” से यह आदेश निकले और ऐसे समय में जब भाजपा लोगों को लुभाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है यह आदेश कैसे निकल गया।’ टीएमसी नेता डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि चुनाव रैली में मोदी-शाह झूठे वादे कर रहे हैं, इसलिए ये फैसला वापस लिया गया।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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