Sunday, December 4, 2022

गुजरात की महिलाओं ने मांगा अमित शाह का इस्तीफा, राष्ट्रपति को लिखा पत्र  

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बिल्किस बानो के अपराधियों को गुजरात सरकार द्वारा छोड़े जाने के खिलाफ सुहासनी अली, महुआ मोइत्रा, रेवती लॉल और द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में नोटिस के जवाब में गुजरात सरकार की एफिडेविट ने  केंद्र सरकार को ही कठघरे में खड़ा कर दिया है। एफिडेविट के अनुसार बिलकिस बानो के बलात्कारियों व उसके परिवार के सदस्यों के 11 हत्यारों को छोड़ने के लिए अनुमति केन्द्र सरकार के गृह मंत्रालय ने दी थी। यह तर्क कि अपराधियों ने 14 साल की सजा काट ली है भी अब झूठा साबित हो गया है क्योंकि ये सभी 11 लोग 998 दिनों से लेकर 1576 दिनों तक पैरोल या फरलॉ पर जेल से बाहर रहे हैं। फिर ताउम्र सजा सिर्फ 14 साल की जेल से पूरी हो जाए यह कोई तय विधि का सिद्धांत नहीं है।

बिल्किस के अपराधियों पर पैरोल और फरलॉ दरमियान शील भंग सहित अन्य अपराध दर्ज हुए। जेल से रिहाई के लिए अच्छा व्यवहार एक आधार बनता है। लेकिन इनमें से तीन लोग ऐसे हैं-मितेश भट्ट, रमेश चांदना व राधेश्याम शाह-जिनके खिलाफ इस सजा के दौरान अन्य मुकदमे दर्ज हुए। मितेश के ऊपर तो एक महिला की मर्यादा का उल्लंघन करने के लिए मुकदमा दर्ज है। रमेश चांदना, राजूभाई सोनी व जसवंत नाई पैरोल या फरलॉ पर छूटने के बाद क्रमशः 122, 197 व 75 दिनों देर से जेल में वापस लौटे। क्या यह अच्छे व्यवहार की निशानी है? फिर स्वतंत्रता दिवस के दिन जब से जेल से छूटे तो इनका फूल माला पहना कर लड्डू खिला कर स्वागत किया गया। यानी ऐसा भी नहीं प्रतीत होता कि इन्होंने जो कुकृत्य किया उसका उन्हें जरा सा भी अफसोस हो। तो इन 11 अपराधियों को छोड़ने का क्या आधार है सिवाए इसके कि ये सभी कहीं न कहीं भारतीय जनता पार्टी या राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ से जुड़े लोग हैं और सरकार भी चुनाव से पहले साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण के उद्देश्य की पूर्ति के लिए इनका पुनः इस्तेमाल करना चाह रही है।

अंकिता भंडारी में भी भाजपा अपराधियों के साथ दिखी

अंकिता भण्डारी हत्याकांड मामले में बताया जा रहा है कि फोरेंसिक जांच में बलात्कार की पुष्टि नहीं हुई है। आरोपियों में भूतपूर्व भाजपा नेता का बेटा पुलकित आर्य भी शामिल है। एक रा.स्वं.सं. के कार्यकर्ता के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज हुआ है क्योंकि उन्होंने अंकिता के एक रिश्तेदार के खिलाफ एक आपत्तिजनक संदेश सोशल मीडिया पर डाला था।

 यह भाजपा की कौन सी मानसिकता है जो अपराधियों को बचाने की कोशिश करती है?

गांधी की भूमि पर बीजेपी विधायक द्वारा इन अपराधियों को संस्कारी कहना गलत।बिलकिस बानो के मामले में भाजपा की नैतिकता का तो इतना पतन हो गया है कि भाजपा के एक विधायक, जो 11 अपराधियों को माफ करने वाली समिति के सदस्य भी थे, ने अपराधियों में से कुछ को संस्कारी ब्राह्मण बताया है। महात्मा गांधी की भूमि पर उनके सबसे जाने माने मूल्यों सत्य व अहिंसा की जगह भाजपा असत्य व हिंसा की संस्कृति स्थापित करना चाह रही है।

चूंकि भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने कानून के राज की धज्जियां उड़ाने का काम किया है। भाजपा और उसकी सरकारों द्वारा नियम की धज्जियां उड़ाकर बिल्किस के अपराधियों को छोड़ा गया। गुजरात सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई एफिडेविट से अमित शाह के मंत्रालय की सहमति की पुष्टि के बाद अमित शाह पर सवाल उठे हैं। सोशलिस्ट पार्टी की हिंदू मुस्लिम एकता समिति द्वारा पिछले महीने “बिल्किस बानो हमें माफ करो पद यात्रा ” का आयोजन किया था। लेकिन गुजरात पुलिस ने यात्रा के एक दिन पहले ही सभी पदयात्रियों को गोधरा से गिरफ्तार कर 9 दिन की पदयात्रा को 3 दिन में सरकारी वाहनों से पूर्ण करा दिया। जिसके बाद संदीप पांडेय ने उपवास कर सरकार के इस भेदभाव के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।

सोशलिस्ट पार्टी – गुजारत की हिंदू मुस्लिम एकता समिति ने अहमदाबाद के मिर्जापुर स्थित अपने कार्यालय में प्रेस वार्ता कर केंद्र और गुजरात सरकार के इस फैसले का विरोध किया। जिसके बाद बिल्किस बानो के अपराधियों को जेल से रिहाई दे दी गई। प्रेस को संबोधित करते हुए अमिता बुच ने कहा ” बिल्किस के बानो के जिन अपराधियों को छोड़ा गया है उन्होंने बहुत ही घिनावना अपराध किया है। उन्हें नहीं छोड़ा जाना चाहिए था। इनलोगों के संस्कार और आचरण अच्छे नहीं है। पैरोल पर भी महिलाओं के साथ अभद्र व्यहार किया और इनके खिलाफ पुलिस ने मुकदमे भी दर्ज किया। जेल में भी स्वीधाएं दी गई। अब गुजरात सरकार की एफिडेविट से खुलासा हुआ है। कि केंद्रीय गृह मंत्रालय की सहमति से था सब कुछ हुआ है। इसीलिए हम गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग करते हैं क्योंकि उन्होंने तमाम संस्तुतियों के खिलाफ जाकर जघन्य अपराध में संलिप्त लोगों की सजा माफ करने का आदेश किया। अमित शाह तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें और जनता से माफी मांगे।

वर्षा सोलंकी ने कहा “हम सब महिलाओं ने यह तय किया है। महिला सम्मान और महिला अधिकार के लिए सभी महिलाओं को राजनैतिक और सामाजिक तौर पर मजबूत करेंगे। हम सबकी सहानुभूति बिल्किस बानो और उसके परिवार के साथ है।”

अनहद की नूर जहां दीवान ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा “नियम के अनुसार रात को दस बजे किसी महिला को पुलिस उठा नहीं सकती। लेकिन नियम कायदे को ताक पर रखते हुए पदयात्रा से एक दिन पहले मुझे और तनु श्री को गोधरा पुलिस ने उठाया था । हालांकि जनता द्वारा B डिवीजन पुलिस स्टेशन के घेराव के बाद रात 12 बजे पुलिस ने महिलाओं को छोड़ दिया था।” 

नूर जहां ने सवाल किया बिल्किस बानो को जो लोग न्याय दिलाना चाहते हैं।उनके खिलाफ पुलिस इतनी सख्त क्यों? कलीम सिद्दीक़ी ने कहा। भाजपा सरकार आरएसएस , विश्व हिंदू परिषद और भाजपा की आबरू को बचाने के लिए सरकार और पुलिस आंदोलनकारियों काम कर रही है। जब तक बिल्किस बानो के अपराधी जेल नहीं पहुंच जाते संघर्ष जारी रहेगा। हम सब ने महिला आयोग के मारफत राष्ट्रपति से गुजारिश की है। गृह मंत्री से इस्तीफा लें। जनता से अपील की गई है कि सभी लोग राष्ट्रपति को इस मामले में पत्र लिख बिल्किस बानो को न्याय दिलाने के संघर्ष में शामिल हों।

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