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इस्तीफा देने वाले 2012 बैच के आईएएस ने कहा- “मैं अपनी बोलने की आजादी वापस चाहता हूं”

नई दिल्ली। देश की सर्वोच्च सेवा से जुड़ा एक शख्स आजकल अपने इस्तीफे को लेकर चर्चे में है। यहां बात हो रही है कानन गोपीनाथन की। मूलत: केरल के रहने वाले कानन ने आईएएस की नौकरी से इस्तीफा दे दिया है। कानन आजकल दादरा और नगर हवेली में सचिव के पद पर कार्यरत थे। 2012 में आईएएस में चयनित हुए कानन 2017 में आयी केरल में बाढ़ के दौरान तब चर्चित हुए थे जब उन्होंने आईएएस रहते एक सामान्य इंसान की तरह राहत और बचान के कार्य में हिस्सा लिया था।

लेकिन कानन के इस्तीफे के पीछे का कारण बहुत खास है। जो न केवल पूरी व्यवस्था से जुड़ा है बल्कि संविधान और उसके संचालन पर भी सवालिया निशान खड़ा कर देता है। इंडियन एक्सप्रेस के हवाले से आई खबर के मुताबिक उन्होंने कहा कि “मैं अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को वापस चाहता हूं। मैं अपने तरीके से जीना चाहता हूं अगर यह एक दिन के लिए भी संभव हो तो।”

इंजीनियरिंग की पृष्ठभूमि से आए कानन के जेहन में सिविल सर्विस को लेकर ढेर सारे सपने थे। लेकिन कुछ सालों नौकरी करने के बाद उन्हें उसकी सीमा पता चल गयी। इतना ही नहीं इशारे-इशारे में उन्होंने कश्मीर के मसले को भी उठाया। उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा कि “अगर आप मुझसे पूछिएगा कि जब दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्रों में से एक ने एक पूरे राज्य में बंदी की घोषणा कर दी और यहां तक कि मौलिक अधिकारों का हनन किया, तो आप क्या कर रहे थे। तो मैं कम से कम इतना जवाब देने में सक्षम रहूं कि इस्तीफा दे दिया था।”

कानन राहत और बचाव काम में हिस्सा लेते हुए।

उन्होंने कहा कि “मैंने सिविल सेवा को इस उम्मीद के साथ ज्वाइन किया था कि मैं उन लोगों की आवाज बन सकता हूं जिन्हें चुप करा दिया गया है। लेकिन यहां मैंने अपनी खुद आवाज खो दी। यहां सवाल यह नहीं है कि मैंने क्यों इस्तीफा दिया बल्कि मैं कैसे नहीं दे सकता हूं। मैं नहीं सोचता कि मेरे इस्तीफे का कोई प्रभाव पड़ेगा। लेकिन जब देश बेहद उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है, जब कोई हमसे पूछता है कि मैंने क्या किया था तो मैं यह नहीं कहना चाहता हूं कि ‘मैंने छुट्टी ले ली थी और उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका चला गया था।’ उससे अच्छा नौकरी से इस्तीफा दे देना है”।

कानन ने आगे कहा कि “हम कहा करते थे कि व्यवस्था को बदलने के लिए हमें व्यवस्था में रहना जरूरी है। मैंने बहुत कोशिश की। लेकिन मुझे इस व्यवस्था में सुधार की कोई उम्मीद नहीं है। लोग जानते हैं मैंने उनके लिए कितना किया है। लेकिन वह ज्यादा नहीं है। मेरे पास कोई बचत नहीं है। और इस समय मैं एक सरकारी गेस्ट हाउस में रह रहा हूं। अगर मुझसे जाने के लिए कहा जाए तो मुझे नहीं पता कि मैं यहां से कहां जाऊंगा। मेरी पत्नी के पास नौकरी है। वह मुझे बहुत सहयोग करती है। जो मुझे बहुत ज्यादा साहस देता है।”

दादरा और नगर हवेली प्रशासन में जिले के कलेक्टर रहते वह केरल में तबाही वाली बाढ़ के दौरान राहत और बचाव के काम में हिस्सा लेने के लिए चर्चे में आये थे। यहां तक कि दादरा नगर हवेली के आधिकारिक प्रतिनिधि के तौर पर उन्होंने मुख्यमंत्री सहायता कोष में एक करोड़ रुपये भी दिए थे। कानन के इस्तीफे के बाद मीडिया में नई बहस शुरू हो गयी है। कानन बीआईटी मेसरा से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिग्री ले रखी है। वहां से पढ़ाई के बाद उन्होंने कुछ दिनों तक डिजाइन इंजीनियर के तौर पर काम किया और उसके बाद 2012 में सिविल सर्विस की परीक्षा दी जिसमें उन्होंने 59 रैंक हासिल की।   

This post was last modified on August 25, 2019 10:51 am

Janchowk

Janchowk Official Journalists in Delhi

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