Subscribe for notification

रोजगार मांग रहे युवकों पर कैप्टन ने चलवाई बर्बर लाठियां

‘शाही शहर’ पटियाला में ‘मोती महल’ की ओर जाते बेरोजगारों पर पंजाब की ‘बहादुर’ पुलिस ने 3 घंटे में चार बार बर्बर लाठीचार्ज किया। शाही शहर कहलाने वाले पटियाला का मोती महल राज्य के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की स्थानीय ‘रिहाइशगाह’ है। इस बर्बर लाठीचार्ज में 20 से ज्यादा नौजवान युवक-युवतियां गंभीर जख्मी होकर अस्पतालों में जेरे-इलाज हैं। यह पंजाब पुलिस के समूचे राज्य में दनदनाते लाठीतंत्र की नई तस्वीर है लेकिन पुरानी नहीं।                 

पुलिसिया बर्बरता का शिकार इन लोगों का गुनाह यह है कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार ने महज 10 दिन पहले पेश किए अपने बजट में 2 लाख बेरोजगार युवकों को रोजगार देने का वादा किया था और इनमें से कुछ बेरोजगार नौकरी की गुहार लेकर ‘मोती महल’ जा रहे थे। तमाम दुनिया को याद था कि 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पूरी दुनिया में मनाया जा रहा है लेकिन शाही शहर की पुलिस को नहीं! यही वजह है कि उसने महिलाओं-युवतियों को भी दौड़ा-दौड़ा कर बेरहमी के साथ पीटा और अपमानित किया।

कई महिलाओं और युवतियों के कपड़े फट गए। कई सिरों से आन-बान-शान का प्रतीक माने जाने वाली पगड़ी उतर गई। पुलिस प्रताड़ना की हद पार होने के बाद आजिज आए कई पीड़ितों ने भाखड़ा नहर में कूदकर जान देने की कोशिश की तो कोई बस व ट्रक के टायर के नीचे आ गया। हालांकि खुदकुशी की कोशिश करने वाले इन लोगों को बचा लिया गया। सूबे में ऐसा पहली बार हुआ।                   

गौरतलब है कि डिग्रीधारी बेरोजगार अध्यापक-अध्यापिकाएं रोजगार की गुहार के साथ मुख्यमंत्री की पटियाला स्थित रिहाइश मोती महल की ओर कूच कर रहे थे। इसलिए भी कि बेशक कहने को पंजाब की सरकार चंडीगढ़ से चलती है लेकिन ज्यादातर फैसले ‘महल’ से होते हैं। समकालीन पंजाब में सत्ता का प्रत्येक राज्य सचिवालय नहीं बल्कि पटियाला राजशाही का मोती महल है।                                         

बेशुमार बेरोजगारों पर अंधाधुंध लाठीचार्ज के बाद पुलिस ने 15 अध्यापकों को आधिकारिक तौर पर हिरासत में भी लिया। बेरोजगार अध्यापक यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष दीपक कंबोज बताते हैं कि खुद मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने उनके साथ मीटिंग करके पोस्टें निकालने का वादा किया था। 2 दिन पहले सरकार ने सिर्फ 1664 पोस्टें निकालीं, जबकि टेट पास अध्यापकों की संख्या 14136 है। वहीं, 12 हजार अध्यापकों के पद खाली पड़े हैं। ऐसे में इतने कम पद निकालना बेरोजगारों से भद्दा मजाक है। 8 मार्च को बेरोजगारों ने पटियाला के नेहरू पार्क से दोपहर 2 बजे मार्च के रूप में निकलने का ऐलान किया था।

पुलिस ने इन्हें पार्क में ही बंद करने का हथकंडा अपनाते हुए मेन गेट पर ताला जड़कर दूसरी तरफ दीवार पर रस्सी लगा दी। बावजूद इसके इकट्ठा हुए बेरोजगार दीवार फांद कर बाहर निकले। वे सीआईडी की तरफ से जिला प्रशासन को दिए अपने मार्च के रूट को ऐन मौके पर बदलकर ‘शाही कैप्टन महल’के एकदम करीब पहुंच गए। वहां उन्होंने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी शुरू की ही थी कि पुलिस का कहर उन पर बगैर चेतावनी टूट पड़ा। नतीजतन कई जख्मी हुए, कई और कई पगड़ियां सड़क पर गिरीं और कई दुपट्टे फटे।

निहत्थे और बेबस लोगों ने पुलिस के इतने जबरदस्त जुल्म का जवाब भाखड़ा में कूदकर या वाहनों के नीचे खुद को कुचल कर दिया। इन पंक्तियों को लिखे जाने तक सरकार की ओर से इस भयावह घटना पर किसी किस्म की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है और पटियाला का पुलिस-प्रशासन अमला शाही शहर में शानो-शौकत के साथ मनाई जाने वाली होली की तैयारियों में मसरूफ हो गया है, सो कोई भी आला अफसर बात के लिए फोन पर उपलब्ध नहीं है।                                 

हालांकि आम आदमी पार्टी, शिरोमणि अकाली दल, सीपीआई, सीपीएम और लोक इंसाफ पार्टी के बड़े नेता लाठीचार्ज में गंभीर जख्मी होकर अस्पताल पहुंचे बेरोजगारों से मिलने जरूर आए। पुलिस से मिले जख्मों के ज्यादातर पीड़ित पटियाला के राजेंद्रा अस्पताल में भर्ती हैं। लोक इंसाफ पार्टी के नेता विधायक सिमरजीत सिंह बैंस कहते हैं, “यही पंजाब का सच है कि बेरोजगारों को रोजी रोटी की बजाए पुलिस के डंडे दिए जा रहे हैं।”

आम आदमी पार्टी विधायक अमन अरोड़ा के मुताबिक, “बगैर चेतावनी शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे युवक-युवतियों पर इस तरह का पुलिस बल प्रयोग बेहद निंदनीय है।” शिरोमणि अकाली दल नेता डॉ दलजीत सिंह के अनुसार सरकार की गलत नीतियों से युवाओं की जिंदगी बर्बाद हो रही है। विपक्षी नेता आज भी घायलों का हालचाल लेने आते रहे। कुछ गंभीर जख्मियों को बेहतर इलाज के लिए बड़े अस्पतालों में भेज दिया गया है।                                 

8 मार्च की पटियाला में हुई पुलिसिया बर्बरता बेहद शर्मनाक और अफसोस जनक है। वैसे इससे पहले अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार में भी ऐसा कई बार हुआ है। मानवाधिकार संगठन से जुड़े विक्रम मेहरा के अनुसार प्रकाश सिंह बादल सरकार में लाठीचार्ज की 3000 से ज्यादा घटनाएं हुईं थीं और मौजूदा कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार के अब तक के (3 साल के) कार्यकाल में पुलिस ने लगभग 1800 बार निहत्थे लोगों पर बल प्रयोग किया।                 

यह एक बड़ी त्रासदी है कि पंजाब के नौजवान एक तरफ बेरोजगारी के चलते नशों की दलदल में आकंठ डूबे हुए हैं और जो सही राह पर चलते हुए हक मांगने जाते हैं, उन्हें इस मानिंद पुलिस के दमन से रौंदा जाता है। पटियाला में मुख्यमंत्री के पुश्तैनी आवास पर हुआ यह सब कुछ बखूबी बताता है।

(अमरीक सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल जालंधर में रहते हैं।)

This post was last modified on March 10, 2020 8:41 am

Leave a Comment
Disqus Comments Loading...
Share
Published by

Recent Posts

बिहार की सियासत में ओवैसी बना रहे हैं नया ‘माय’ समीकरण

बिहार में एक नया समीकरण जन्म ले रहा है। लालू यादव के ‘माय’ यानी मुस्लिम-यादव…

10 hours ago

जनता से ज्यादा सरकारों के करीब रहे हैं हरिवंश

मौजूदा वक्त में जब देश के तमाम संवैधानिक संस्थान और उनमें शीर्ष पदों पर बैठे…

12 hours ago

भुखमरी से लड़ने के लिए बने कानून को मटियामेट करने की तैयारी

मोदी सरकार द्वारा कल रविवार को राज्यसभा में पास करवाए गए किसान विधेयकों के एक…

12 hours ago

दक्खिन की तरफ बढ़ते हरिवंश!

हिंदी पत्रकारिता में हरिवंश उत्तर से चले थे। अब दक्खिन पहुंच गए हैं। पर इस…

13 hours ago

अब की दशहरे पर किसान किसका पुतला जलायेंगे?

देश को शर्मसार करती कई तस्वीरें सामने हैं।  एक तस्वीर उस अन्नदाता प्रीतम सिंह की…

14 hours ago

प्रियंका गांधी से मिले डॉ. कफ़ील

जेल से छूटने के बाद डॉक्टर कफ़ील खान ने आज सोमवार को कांग्रेस महासचिव प्रियंका…

16 hours ago