Sat. Dec 7th, 2019

लोकपाल बनाम जोकपालः आठ माह में 1160 शिकायतें, लेकिन जांच किसी की भी नहीं

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देश को 52 साल की लड़ाई के बाद मिला पहला लोकपाल। आठ माह के कार्यकाल में लोकपाल ने एक भी मामले में जांच का आदेश पारित नहीं किया है। लगता है लोकपाल को इंतजार है कि कब किसी विपक्षी दल के नेता की शिकायत मिले और वो जांच का आदेश जारी करें।

अब तक शिकायतों और सुनवाई में लोकपाल को शायद सरकार में शामिल लोगों के विरुद्ध एक भी ऐसी शिकायत नहीं मिली जिसमें जांच का आदेश पारित किया जा सके? दरअसल सीबीआई और ईडी की तरह फिलवक्त लोकपाल भी राष्ट्रभक्ति के मोड में है, जहां माना जाता है कि भाजपा सरकार कुछ गलत कर ही नहीं सकती। गलती की शिकायत करने वाले ही वास्तविक दोषी हैं। बुरा हो आरटीआई का जिसने लोकपाल की पोल भी खोल दी है। आरटीआई शुभम् खत्री ने डाली थी।

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आरटीआई से हुए खुलासे में पता चला है कि भ्रष्टाचार विरोधी लोकपाल ने नई दिल्ली के 5-स्टार होटल पर महीने के 50 लाख रुपये खर्च किए हैं। इन 5-स्टार होटल प्रॉपर्टी के अंतर्गत लोकपाल का ऑफिस स्पेस किराए पर लिया जाता था। ये बात सामने आई है। आरटीआई से ये भी पता चला है कि जब से इस लोकपाल का गठन हुआ है तब से लेकर अब तक अलग-अलग सरकारी संस्थाओं में होने वाले भ्रष्टाचार के खिलाफ हजारों शिकायतें आ चुकी हैं पर इनमें से एक भी मामले पर अब तक पूरी तरह से सुनवाई नहीं हो पाई है।

देश में भ्रष्टाचार रोकने के लिए नियुक्त लोकपाल ने एक हजार मामलों में सुनवाई की है, लेकिन किसी में भी अभी तक जांच के आदेश नहीं दिए हैं। जवाब में बताया गया है कि 31 अक्तूबर तक लोकपाल कार्यालय को लोक सेवकों के खिलाफ 1160 शिकायतें मिलीं, जिसमें बेंच ने 1000 मामलों की सुनवाई की। इनमें से कुछ मामलों में प्रारंभिक जांच भले हुई हो लेकिन किसी को भी अभी तक गहन जांच के लिए आगे नहीं बढ़ाया गया।

आरटीआई के जवाब में ये भी कहा गया है कि सरकार ने अभी तक आरटीआई फाइल करने के लिए कोई आधिकारिक फॉर्मेट ही नहीं बनाया है, जबकि आठ महीने पूरे होने को हैं। जवाब में यह भी सामने आया है कि लोकपाल अस्थायी रूप से नई दिल्ली में अशोका होटल से चल रहा है, क्योंकि इसके पास राष्ट्रीय राजधानी में स्थायी कार्यालय नहीं है।  लोकपाल कार्यालय पांच सितारा अशोका होटल में चल रहा है।

होटल में यह कार्यालय दूसरी मंजिल पर 12 कमरों में संचालित हो रहा है। लोकपाल इस होटल के लिए 50 लाख रुपये महीना किराया देती है और अब तक यह 3.85 करोड़ रुपयों का भुगतान होटल को कर चुकी है। लोकपाल और इसके सदस्यों, कर्मचारियों का वेतन भत्ता अलग से है, यदि उसे जोड़ दिया जाय तो खर्च कई करोड़ में पहुंच जाएगा।

इस साल मार्च में सरकार ने पूर्व न्यायाधीश पीसी घोष को देश का पहला लोकपाल नियुक्त किया था। उनके अलावा लोकपाल कार्यालय में आठ पद हैं, जिसके लिए चार न्यायिक और चार गैर न्यायिक सदस्य भी नियुक्त किए गए। लोकपाल को पूर्व या वर्तमान प्रधानमंत्री, सांसद, मंत्री या सरकारी अफसर के अलावा किसी बोर्ड, कार्पोरेशन, सोसायटी, ट्रस्ट या स्वायत्त संस्था के खिलाफ जांच करने का अधिकार है।

सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की पूर्व प्रमुख अर्चना रामसुंदरम, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्य सचिव दिनेश कुमार जैन, महेंद्र सिंह और इंद्रजीत प्रसाद गौतम लोकपाल के  गैर न्यायिक सदस्य हैं। न्यायमूर्ति दिलीप बी भोंसले, न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार मोहंती और न्यायमूर्ति अजय कुमार त्रिपाठी को भ्रष्टाचार निरोधक निकाय के  न्यायिक सदस्य हैं। लोकपाल और लोकायुक्त कानून के तहत कुछ श्रेणियों के सरकारी सेवकों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए केंद्र में लोकपाल और राज्यों में लोकायुक्त की नियुक्ति का प्रावधान है। यह कानून 2013 में पारित किया गया था।

गौरतलब है कि विदेश में लोकपाल जैसी संस्था काफी साल पहले से है, लेकिन भारत में इसका प्रवेश साल 1967 में हुआ। उस वक्त पहली बार भारतीय प्रशासनिक सुधार आयोग ने भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों को लेकर लोकपाल संस्था की स्थापना का विचार रखा था। हालांकि इसे स्वीकार नहीं किया गया था।

इस बिल को लेकर समाजसेवी अन्ना हजारे ने अनशन किया और वो एक बड़ी लड़ाई में तब्दील हो गई। उसके बाद लोकसभा ने 27 दिसंबर, 2011 को लोकपाल विधेयक पास किया। फिर 23 नवंबर 2012 को प्रवर समिति को भेजने का फैसला किया। उसके बाद 17 दिसंबर 2013 को राज्यसभा में लोकसभा विधेयक पारित हुआ।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार होने के साथ कानूनी मामलों के जानकार भी हैं।)

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