मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गृह मंत्री को लिखा पत्र, सीआरपीएफ की तैनाती के बदले बकाया करोड़ों रुपये माफ करने की मांग

रांची। झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान के लिए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की तैनाती के बदले केंद्र सरकार का 13,299.69 करोड़ रुपये का बकाया है। इस राशि को माफ करने की मांग को लेकर 18 जुलाई 2025 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा। सोरेन ने पत्र में कहा कि इतनी बड़ी राशि का भुगतान करने के लिए राज्य को मजबूर करना झारखंड की विकास योजनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा।

इससे पहले, 10 जुलाई 2025 को रांची में आयोजित 27वीं पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक के दौरान सोरेन ने गृह मंत्री शाह से मुलाकात की थी। इस मुलाकात में मुख्यमंत्री ने आत्मीयता और सम्मान के साथ शाह का स्वागत किया और सीआरपीएफ की तैनाती के खर्च को माफ करने का आग्रह किया। अब इस मुद्दे पर सोरेन ने आधिकारिक रूप से पत्र लिखकर बकाया राशि माफ करने की मांग दोहराई है।

यह राशि झारखंड में उग्रवाद को समाप्त करने के लिए सीआरपीएफ की तैनाती पर खर्च की गई है। सोरेन ने पत्र में लिखा कि उग्रवाद को जड़ से खत्म करना केंद्र और राज्य सरकार की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि 6 अक्टूबर 2023 को नई दिल्ली में आयोजित नक्सल प्रभावित राज्यों की समीक्षा बैठक में उन्होंने गृह मंत्री शाह के समक्ष यह बात रखी थी कि केंद्र और राज्य के संयुक्त प्रयासों से नक्सलवाद के खिलाफ अभियान में उल्लेखनीय सफलता मिली है। सोरेन ने यह भी अनुरोध किया था कि नक्सल विरोधी अभियान में निरंतरता बनाए रखने के लिए राज्य में तैनात सीआरपीएफ आईजी का कार्यकाल कम से कम तीन वर्ष रखा जाए।

पत्र में सोरेन ने लिखा, “उग्रवाद को समाप्त करना केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त जिम्मेदारी है। मैं केंद्र सरकार से आग्रह करता हूं कि झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान के लिए सीआरपीएफ की तैनाती के बदले बकाया 13,299.69 करोड़ रुपये की राशि को पूर्ण रूप से माफ किया जाए।” उन्होंने यह भी बताया कि झारखंड में नक्सल विरोधी अभियानों में 400 से अधिक पुलिसकर्मी शहीद हुए हैं, क्योंकि राज्य अपने गठन के बाद से उग्रवाद प्रभावित रहा है।

सोरेन ने सहकारी संघवाद के तहत केंद्र से इस बकाया राशि को माफ करने में सहयोग और सकारात्मक रवैये की अपेक्षा जताई। उन्होंने पत्र में लिखा कि कोविड-19 महामारी के बाद राज्य सरकार आर्थिक पुनरुद्धार, आपदा प्रबंधन और जन कल्याणकारी योजनाओं के कार्यान्वयन में जुटी है। सीमित संसाधनों के कारण राज्य पर वित्तीय बोझ बढ़ गया है। ऐसी स्थिति में, सीआरपीएफ की तैनाती के बदले बकाया राशि का भुगतान विकास योजनाओं को प्रभावित करेगा।

सोरेन ने बताया कि झारखंड 2000 में अपने गठन के बाद से ही उग्रवाद प्रभावित रहा है। राज्य सरकार ने सीमित संसाधनों और सीआरपीएफ की सहायता से नक्सल उन्मूलन अभियान चलाया, जिसके परिणामस्वरूप उग्रवादी गतिविधियों में उल्लेखनीय कमी आई है। उन्होंने केंद्र से सहकारी संघवाद के सिद्धांत के तहत सीआरपीएफ की तैनाती से संबंधित बकाया शुल्क माफ करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया।

वहीं, झारखंड पुलिस ने उसी दिन बताया कि 55 नक्सलियों, जिनमें शीर्ष भाकपा (माओवादी) कमांडर शामिल हैं, को पकड़ने के लिए व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। इन नक्सलियों पर कुल 8.45 करोड़ रुपये का इनाम घोषित है। पुलिस के अनुसार, पिछले छह महीनों में 197 माओवादियों को गिरफ्तार किया गया, 10 ने आत्मसमर्पण किया, और 17 मारे गए।

हालांकि, कुछ खबरों के अनुसार, सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों, पहाड़ों और जंगलों के किनारे बसे आदिवासियों पर नक्सल उन्मूलन अभियान के दौरान सीआरपीएफ और पुलिस बलों द्वारा कथित उत्पीड़न की शिकायतें सामने आती रही हैं। इनमें ज्यादातर पीड़ित निरीह आदिवासी ही होते हैं। फिर भी, “अबुआ” (हमारी यानी जनता की) सरकार का इस ओर ध्यान नहीं गया है।

(झारखंड से विशद कुमार की रिपोर्ट)

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